पाठ – 7
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ
In this post we have given the detailed notes of class 10 Social Science (Geography) chapter 7 Lifelines of National Economy in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 board exams.
इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (भूगोल) के पाठ 7 राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है।
⚠️ CBSE 2026-27 नोट: CBSE बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से सिर्फ मानचित्र-आधारित (map pointing) प्रश्न पूछे जाएंगे — theory सीधे नहीं पूछी जाएगी। अन्य राज्य बोर्डों में पूरा पाठ पूछा जा सकता है, इसलिए नीचे पूरे विस्तृत नोट्स दिए गए हैं।
| Board | CBSE Board, JAC Board, RBSE Board, MPBSE Board, UBSE Board |
| Textbook | NCERT — Contemporary India-II (Reprint 2026-27) |
| Class | Class 10 |
| Subject | Social Science (Geography) |
| Chapter no. | Chapter 7 |
| Chapter Name | राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ (Lifelines of National Economy) |
| Category | Class 10 SST Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
पाठ 7, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ
परिचय — परिवहन, संचार और व्यापार
व्यापार, परिवहन (transport) और संचार (communication) आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं तथा किसी भी देश के आर्थिक विकास में एक-दूसरे के पूरक बनते हैं। ये किसी अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाओं (lifelines) के समान कार्य करते हैं — लोगों, वस्तुओं, सेवाओं और सूचनाओं को उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक पहुँचाते हैं तथा देश के एक भाग को दूसरे भाग से जोड़ते हैं। दक्ष परिवहन साधन तीव्र विकास की पूर्वशर्त हैं क्योंकि ये वस्तुओं, विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं। संचार तकनीक में प्रगति के कारण ही विश्व एक “वैश्विक ग्राम (global village)” बन सका है।
भारत जैसे विशाल एवं विविध भू-भाग वाले देश में दूर-दराज के क्षेत्रों को शहरों से तथा देश को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने के लिए एक सुविकसित परिवहन तंत्र आवश्यक है। इस पाठ में सड़क मार्ग, रेल मार्ग, पाइपलाइन, जलमार्ग, वायुमार्ग, संचार तंत्र, अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा एक व्यापार के रूप में पर्यटन — इन सभी का अध्ययन किया गया है, जो मिलकर देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं।
सड़क मार्ग (Roads)
भारत में विश्व के सबसे बड़े सड़क तंत्रों में से एक है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 62.16 लाख किलोमीटर है (NCERT के अनुसार)। भारत के लगभग 90% यात्री यातायात तथा लगभग 65% माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, क्योंकि सड़क परिवहन कम दूरी के लिए किफायती है, विभिन्न प्रकार के भू-भाग से गुज़र सकता है, तथा घर-घर तक (door-to-door) सेवा प्रदान करता है।
सड़कों के प्रकार
- राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways – NH): देश के दूर-दराज के भागों को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें, जिनका निर्माण व रखरखाव केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा किया जाता है। ये राज्यों की राजधानियों, प्रमुख शहरों तथा बंदरगाहों को जोड़ती हैं।
- राज्य राजमार्ग (State Highways – SH): राज्य की राजधानी को विभिन्न ज़िला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कें, जिनका निर्माण व रखरखाव राज्य लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा किया जाता है।
- ज़िला सड़कें (District Roads): ज़िला मुख्यालय को उसी ज़िले के अन्य स्थानों से जोड़ने वाली सड़कें, जिनका रखरखाव ज़िला परिषद (Zila Parishad) करती है।
- ग्रामीण सड़कें (Rural Roads): गाँवों को कस्बों से जोड़ने वाली सड़कें, जो देश की कुल सड़कों का एक बड़ा हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत असंबद्ध गाँवों को हर मौसम में चलने योग्य सड़कों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।
- सीमा सड़कें (Border Roads): सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation – BRO) द्वारा निर्मित व अनुरक्षित। ये सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, सैनिकों व सामग्री की तीव्र आवाजाही में सहायक हैं, तथा उत्तरी व पूर्वोत्तर सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्रों में सुगमता बढ़ाती हैं।
- अन्य सड़कें: इसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी परियोजनाएँ तथा अन्य विशेष प्रयोजन की सड़कें शामिल हैं।
स्वर्णिम चतुर्भुज सुपर हाईवे (Golden Quadrilateral Super Highways)
स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) भारत के चार सबसे बड़े महानगरों — दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता — को जोड़ने वाला सुपर/एक्सप्रेस-वे तंत्र है। इसका उद्देश्य भारत के महानगरों के बीच की दूरी और यात्रा-समय को कम करना है। इस परियोजना का क्रियान्वयन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India – NHAI) द्वारा किया गया।
उत्तर-दक्षिण एवं पूर्व-पश्चिम गलियारे (North-South and East-West Corridors)
उत्तर-दक्षिण गलियारा श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) को कन्याकुमारी (तमिलनाडु) से जोड़ता है, जिसमें कोच्चि-सलेम शाखा भी शामिल है। पूर्व-पश्चिम गलियारा सिलचर (असम) को पोरबंदर (गुजरात) से जोड़ता है। स्वर्णिम चतुर्भुज के साथ ये गलियारे भारत के प्रमुख वितरण केंद्रों के बीच समय व दूरी को कम करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।
सड़कों का घनत्व (Density of Roads)
सड़क घनत्व (प्रति 100 वर्ग किमी क्षेत्र में सड़क की लंबाई) भारत के विभिन्न राज्यों में बहुत भिन्न-भिन्न है — जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में यह लगभग 10 किमी जितना कम है, जबकि केरल जैसे राज्यों में 375 किमी तक अधिक हो सकता है (आँकड़े राज्य और वर्ष के अनुसार बदलते हैं, परंतु ये असमान वितरण को दर्शाते हैं)। सामान्यतः मैदानी क्षेत्रों में सड़क घनत्व अधिक तथा पहाड़ी, वनाच्छादित और मरुस्थलीय क्षेत्रों में कम पाया जाता है।
रेल मार्ग (Railways)
भारत में विश्व के सबसे बड़े रेल तंत्रों में से एक है, और भारतीय रेल को एशिया का सबसे बड़ा रेल तंत्र (एकल प्रबंधन के अंतर्गत) माना जाता है। भारतीय रेल माल तथा यात्रियों की ढुलाई का मुख्य साधन है, तथा लंबी दूरी तक माल की तीव्र ढुलाई को संभव बनाकर उद्योग, कृषि के विकास एवं देश के आर्थिक जीवन को एकीकृत करने में सहायक रही है।
भारतीय रेल की समस्याएँ
- भीड़-भाड़ (Overcrowding): विशेष रूप से शहरों में तथा व्यस्त समय (peak hours) में रेलगाड़ियाँ अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली रहती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा एवं देरी होती है।
- भौतिक बनावट के कारण असमान वितरण: भौतिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारकों ने विभिन्न क्षेत्रों में रेल तंत्र के विकास को प्रभावित किया है। हिमालय के पर्वतीय, पहाड़ी व सघन वन क्षेत्रों, पूर्वोत्तर के दुर्गम भागों तथा पश्चिमी राजस्थान के बालू मैदानों जैसे क्षेत्रों में कठिन भू-भाग के कारण रेल सेवा सीमित है।
- पुराना ढाँचा एवं धीमा आधुनिकीकरण: बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए संकेत-प्रणाली, पटरियों और डिब्बों के निरंतर आधुनिकीकरण की आवश्यकता है।
क्षेत्र एवं मंडल (Zones and Divisions)
कुशल प्रबंधन के लिए भारतीय रेल को कई क्षेत्रों (zones) में बाँटा गया है, जिनमें से प्रत्येक का नेतृत्व एक महाप्रबंधक (General Manager) करता है। प्रत्येक क्षेत्र को आगे कई मंडलों (divisions) में विभाजित किया गया है, जो मंडल रेल प्रबंधक (Divisional Railway Manager) के अधीन कार्य करते हैं। यह क्षेत्र-मंडल संरचना विकेंद्रीकृत प्रशासन, पटरियों व स्टेशनों के बेहतर रखरखाव तथा इतने विशाल एवं विविध भू-भाग व राज्यों में फैले तंत्र के कुशल परिचालन में सहायक है।
पाइपलाइन परिवहन (Pipelines)
पाइपलाइनों का उपयोग अब कच्चे तेल (crude oil), पेट्रोलियम पदार्थों तथा प्राकृतिक गैस/LPG को तेल एवं गैस क्षेत्रों से रिफाइनरियों तक तथा आगे बाज़ारों तक पहुँचाने के लिए किया जाता है, जिससे टैंकरों व रेल द्वारा होने वाले परिवहन-हानि (trans-shipment losses) व देरी से बचा जा सकता है। पाइपलाइनों द्वारा घोल (slurry) में परिवर्तित ठोस पदार्थों को भी भेजा जा सकता है।
प्रमुख पाइपलाइन नेटवर्क
- मुंबई हाई – गुजरात – पंजाब पाइपलाइन: यह पाइपलाइन (बॉम्बे हाई–कोयली–अहमदाबाद से होते हुए पंजाब के जालंधर तक विस्तारित) गुजरात व मुंबई हाई के तेल क्षेत्रों को कोयली (गुजरात) व मथुरा (उत्तर प्रदेश) की रिफाइनरियों से जोड़ती है, तथा आगे पंजाब तक विस्तृत है। यह उत्तरी व पश्चिमी भारत के विभिन्न भागों तक कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पाद पहुँचाने वाले प्रमुख नेटवर्कों में से एक है।
- हज़ीरा–विजयपुर–जगदीशपुर (HVJ) गैस पाइपलाइन: यह गुजरात के हज़ीरा को मध्य प्रदेश के विजयपुर होते हुए उत्तर प्रदेश के जगदीशपुर से जोड़ती है। यह गुजरात व मुंबई हाई के गैस क्षेत्रों को पश्चिमी व उत्तरी भारत के उर्वरक, विद्युत तथा औद्योगिक परिसरों से जोड़ती है, और इसकी शाखाएँ कानपुर, अंता, औरैया जैसे अन्य स्थानों तक विस्तारित हैं।
पाइपलाइनों ने पेट्रोलियम व गैस के परिवहन में सड़क तथा रेल तंत्र पर पड़ने वाले भार को कम किया है, और तरल व गैसीय पदार्थों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए इन्हें सबसे सुविधाजनक व प्रभावी साधन माना जाता है।
जलमार्ग (Waterways)
जलमार्ग सबसे सस्ता परिवहन साधन है, जो भारी व स्थूल वस्तुओं की ढुलाई के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। जलमार्ग बहुत कम ऊर्जा की खपत करते हैं, इसलिए ये ईंधन-कुशल (fuel-efficient) एवं पर्यावरण-अनुकूल (eco-friendly) परिवहन साधन हैं।
आंतरिक जलमार्ग (Inland Waterways)
भारत में लगभग 14,500 किमी नौगम्य (navigable) जलमार्ग हैं, जो देश के कुल परिवहन में लगभग 1% का योगदान देते हैं। आंतरिक जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कुछ जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterway – NW) घोषित किया है। प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं —
- राष्ट्रीय जलमार्ग सं. 1 (NW1): गंगा नदी पर इलाहाबाद (प्रयागराज) से हल्दिया तक (1,620 किमी)।
- राष्ट्रीय जलमार्ग सं. 2 (NW2): ब्रह्मपुत्र नदी पर सादिया से धुबरी तक (891 किमी)।
- राष्ट्रीय जलमार्ग सं. 3 (NW3): केरल में पश्चिमी तटीय नहर (कोट्टापुरम–कोल्लम, 205 किमी), साथ ही चंपाकारा व उद्योगमंडल नहरें।
- राष्ट्रीय जलमार्ग सं. 4 (NW4): इसमें गोदावरी व कृष्णा नदियों के कुछ भाग तथा काकीनाडा–पुदुच्चेरी नहर शामिल हैं।
आधिकारिक रूप से क्रमांकित राष्ट्रीय जलमार्गों के अतिरिक्त, गोवा की पश्च जल (backwaters) व नहर प्रणाली (मंडोवी और ज़ुआरी नदियाँ, जो कुंभारजुआ नहर से जुड़ी हैं) भी लौह अयस्क के परिवहन में उपयोग की जाती हैं। नदियाँ, नहरें, पश्च जल तथा झीलें मिलकर भारत की आंतरिक जलमार्ग व्यवस्था बनाती हैं।
समुद्री मार्ग एवं बंदरगाह (Ocean Routes and Major Ports)
भारत के अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार का परिवहन समुद्री मार्गों से होता है, क्योंकि समुद्री परिवहन भारी व स्थूल माल को कम लागत में लंबी दूरी तक ढोने के लिए उपयुक्त है। भारत की तटरेखा लगभग 7,516.6 किमी लंबी है, जिसके साथ 12 प्रमुख बंदरगाह तथा लगभग 200 लघु व मध्यम बंदरगाह स्थित हैं।
भारत के प्रमुख बंदरगाह (Major Ports), पश्चिमी तट से पूर्वी तट के क्रम में, निम्नलिखित हैं —
- कांडला (Kandla) (गुजरात) — स्वतंत्रता के बाद कच्छ क्षेत्र में विकसित पहला बंदरगाह, जो मुंबई बंदरगाह पर दबाव कम करने हेतु बनाया गया।
- मुंबई (Mumbai) — भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह, जिसका प्राकृतिक व सुरक्षित पत्तन (harbour) विशाल है।
- न्हावा शेवा / जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (JNPT) — मुंबई बंदरगाह पर बढ़ते दबाव को कम करने हेतु विकसित; भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह।
- मार्मागाओ (Marmagao) (गोवा) — यहाँ से लौह अयस्क का सबसे अधिक निर्यात होता है।
- न्यू मैंगलोर (New Mangalore) (कर्नाटक) — लौह अयस्क सांद्र (concentrates) व कॉफी का निर्यात करता है।
- कोच्चि (Cochin) — एक लैगून के प्रवेश द्वार पर स्थित, इसे “अरब सागर की रानी” कहा जाता है।
- चेन्नई (Chennai) — पूर्वी तट के सबसे पुराने कृत्रिम बंदरगाहों में से एक।
- विशाखापत्तनम (Vishakhapatnam) — सबसे गहरा, भू-आबद्ध (landlocked) व सुरक्षित बंदरगाह, जो लौह अयस्क, पेट्रोलियम व अन्य माल का संचालन करता है।
- पारादीप (Paradip) (ओडिशा) — लौह अयस्क के निर्यात में विशेषीकृत।
- हल्दिया (Haldia) (पश्चिम बंगाल) — कोलकाता बंदरगाह पर बढ़ते दबाव को कम करने हेतु निर्मित।
लघु बंदरगाह (Minor Ports) संख्या में प्रमुख बंदरगाहों से कहीं अधिक हैं, परंतु इनसे होने वाला माल परिवहन अपेक्षाकृत बहुत कम है। ये मुख्यतः स्थानीय व क्षेत्रीय व्यापार की सेवा करते हैं, तथा कुछ तटीय नौवहन (coastal shipping) में भी सहायक हैं।
वायुमार्ग (Airways)
भारत जैसे विशाल व विविध भू-भाग वाले देश में, जहाँ ऊँचे पर्वत, वीरान मरुस्थल, सघन वन तथा लंबी समुद्री दूरियाँ स्थित हैं, वायु परिवहन अत्यंत कम समय में लंबी दूरी तय करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। यह तीव्र व दक्ष सेवा प्रदान करता है, परंतु अन्य साधनों की तुलना में महँगा होने के कारण मुख्यतः सक्षम वर्ग द्वारा प्रयोग किया जाता है।
- वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण 1953 में हुआ था और बाद में इसे निजी क्षेत्र के लिए पुनः खोला गया; आज एयर इंडिया (Air India) तथा उसकी सहायक कंपनियों के साथ-साथ कई घरेलू विमानन कंपनियाँ (domestic airlines) परिचालन कर रही हैं।
- वायु सेवाएँ पूर्वोत्तर राज्यों तथा पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों जैसी दुर्गम जगहों तक संपर्क उपलब्ध कराने में सहायक हैं।
- पवन हंस (Pawan Hans) पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों को हेलीकॉप्टर सेवाएँ प्रदान करता है, तथा अपतटीय (off-shore) तेल प्रतिष्ठानों तक कर्मियों व सामग्री पहुँचाकर पेट्रोलियम क्षेत्र की भी सेवा करता है।
संचार (Communication)
संचार तंत्र ने विश्व में सूचनाओं के प्रवाह में क्रांति ला दी है और इसे एक “वैश्विक ग्राम (global village)” में बदल दिया है। संचार सेवाओं को व्यापक रूप से दो भागों में बाँटा जाता है — व्यक्तिगत संचार (personal communication) तथा जनसंचार (mass communication)।
व्यक्तिगत संचार — डाक तंत्र (Postal Network)
भारत का डाक तंत्र विश्व के सबसे बड़े डाक तंत्रों में से एक है, जो व्यक्तिगत संचार तथा छोटे पार्सलों के परिवहन दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। डाक को मुख्यतः छह श्रेणियों में बाँटा गया है —
- प्रथम श्रेणी डाक (First-class mail)
- द्वितीय श्रेणी डाक (Second-class mail)
- सामान्य डाक (Ordinary post)
- पंजीकृत डाक (Registered post)
- बीमित डाक (Insured post)
- मूल्य वसूली डाक (Value Payable Post – VPP)
प्रथम श्रेणी डाक में पत्र व पोस्टकार्ड शामिल हैं, जिन्हें वायुमार्ग से भेजा जाता है, जबकि द्वितीय श्रेणी डाक में पुस्तक-पैकेट, पंजीकृत समाचार-पत्र व पत्रिकाएँ शामिल हैं, जिन्हें सतही डाक (surface mail — रेल, सड़क व जलमार्ग) द्वारा भेजा जाता है।
दूरसंचार तंत्र (Telecommunication Network)
भारत का दूरसंचार तंत्र विश्व के सबसे बड़े तंत्रों में से एक है, जो देश भर में सूचनाओं व विचारों के तीव्र आदान-प्रदान का प्रभावी साधन उपलब्ध कराता है। इसमें तीव्र विस्तार व आधुनिकीकरण हुआ है, जिससे दूर-दराज व ग्रामीण क्षेत्र भी जुड़ चुके हैं।
जनसंचार (Mass Communication)
जनसंचार एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को अनेक विषयों पर मनोरंजन व जानकारी प्रदान करता है। आकाशवाणी (All India Radio) राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व स्थानीय भाषाओं में विविध कार्यक्रम प्रसारित करता है, जबकि राष्ट्रीय दूरदर्शन चैनल दूरदर्शन (Doordarshan) शैक्षिक व मनोरंजक कार्यक्रमों की विस्तृत श्रृंखला प्रसारित करता है। इसके साथ ही भारतीय व विदेशी विभिन्न भाषाओं में समाचार-पत्र व पत्रिकाएँ भी प्रकाशित होते हैं।
उपग्रह संचार — इनसैट (INSAT)
भारत ने घरेलू संचार, मौसम संबंधी अवलोकन (meteorological observations) तथा अन्य आँकड़ा सेवाओं के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (Indian National Satellite System – INSAT) नामक बहुउद्देशीय उपग्रह प्रणाली अपनाई है। यह उपग्रह प्रणाली दूरदर्शन प्रसारण, दूरसंचार, मौसम विज्ञान तथा आपदा चेतावनी प्रणाली में उपयोग की जाती है, और इसने भारत के संचार ढाँचे को काफी मज़बूत किया है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार (International Trade)
लोगों, राज्यों तथा देशों के बीच वस्तुओं के आदान-प्रदान को व्यापार (trade) कहा जाता है, जो क्षेत्रों, देशों अथवा विश्व भर में फैले बाज़ारों के माध्यम से संचालित होता है। दो देशों के बीच होने वाले व्यापार को अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। यह समुद्री, वायु अथवा स्थल मार्ग से हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रकार
- आयात व्यापार (Import trade): विदेशों से वस्तुओं व सेवाओं की खरीद।
- निर्यात व्यापार (Export trade): देश में उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं को विदेशों में बेचना।
- पुनर्निर्यात व्यापार (Entrepot trade): जब वस्तुएँ एक देश से आयात कर पुनः किसी अन्य देश को निर्यात की जाती हैं, अर्थात् आयात के बाद निर्यात करना।
व्यापार संतुलन (Balance of Trade)
किसी देश के व्यापार संतुलन (balance of trade) से आशय उसके निर्यात व आयात के बीच के अंतर से है। जब किसी देश के निर्यात का मूल्य उसके आयात के मूल्य से अधिक होता है, तो उसे अनुकूल व्यापार संतुलन (favourable balance of trade) कहा जाता है। इसके विपरीत, जब आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक होता है, तो इसे प्रतिकूल व्यापार संतुलन (unfavourable balance of trade) कहा जाता है।
भारत के विदेश व्यापार के बदलते स्वरूप
स्वतंत्रता के समय भारत मुख्यतः कच्चे माल व कृषि उत्पादों जैसी प्राथमिक वस्तुओं (primary products) का निर्यात करता था और निर्मित वस्तुओं (manufactured goods) का आयात करता था। पिछले कई दशकों में भारत के व्यापार की संरचना, दिशा तथा मात्रा में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है —
- अब भारत विविध प्रकार की वस्तुओं का निर्यात करता है — कृषि व संबद्ध उत्पाद, अयस्क व खनिज, रत्न व आभूषण, रासायनिक व संबद्ध उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएँ तथा पेट्रोलियम उत्पाद।
- आयात में पेट्रोलियम, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, सोना-चाँदी, मोती व बहुमूल्य रत्न, परिवहन उपकरण तथा रसायन शामिल हैं।
- समय के साथ भारत के व्यापारिक साझेदारों में भी विविधता आई है, और अब भारत विश्व के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों से व्यापार संबंध रखता है।
एक व्यापार के रूप में पर्यटन (Tourism as a Trade)
भारत में पर्यटन भी एक व्यापार है। लगभग 1.5 करोड़ (15 million) लोग पर्यटन उद्योग में कार्यरत हैं। रोज़गार सृजन, राजस्व स्रोत तथा सांस्कृतिक महत्व की दृष्टि से पर्यटन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं व संस्कृतियों के लोगों को निकट लाकर राष्ट्रीय एकता (national integration) को बढ़ावा देता है, तथा विभिन्न देशों के लोगों के बीच अंतरराष्ट्रीय सद्भावना/समझ (international brotherhood/understanding) को प्रोत्साहित करता है।
- यह स्थानीय हस्तशिल्प व सांस्कृतिक गतिविधियों को सहारा देता है, तथा परिवहन, आवास व गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में रोज़गार उत्पन्न करता है।
- पर्यटन देश के लिए विदेशी मुद्रा (foreign exchange) अर्जित करने में भी सहायक है — प्रतिवर्ष लगभग 27 लाख (2.7 million) विदेशी पर्यटक भारत आते हैं, इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में घरेलू पर्यटक भी यात्रा करते हैं।
- पर्यटन स्थलों में विरासत स्मारक, ऐतिहासिक इमारतें, किले, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थल तथा सांस्कृतिक व धार्मिक स्थल शामिल हैं।
- भारत सरकार ने देश को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच एक पर्यटन स्थल के रूप में प्रोत्साहित करने के लिए “इंक्रेडिबल इंडिया” (Incredible India) सहित कई अभियान चलाए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Points to Remember)
- व्यापार, परिवहन तथा संचार मिलकर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ बनाते हैं।
- स्वर्णिम चतुर्भुज दिल्ली, मुंबई, चेन्नई व कोलकाता को जोड़ता है।
- उत्तर-दक्षिण गलियारा: श्रीनगर से कन्याकुमारी; पूर्व-पश्चिम गलियारा: सिलचर से पोरबंदर।
- सड़कें: राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, ज़िला सड़कें, ग्रामीण सड़कें, सीमा सड़कें (BRO) तथा PMGSY सड़कें।
- भारतीय रेल एकल प्रबंधन के अंतर्गत एशिया का सबसे बड़ा तंत्र है; कुशल प्रबंधन हेतु इसे क्षेत्रों (zones) व आगे मंडलों (divisions) में बाँटा गया है।
- पाइपलाइन कच्चे तेल, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस/LPG का परिवहन करती हैं — जैसे मुंबई हाई–गुजरात–पंजाब पाइपलाइन तथा हज़ीरा–विजयपुर–जगदीशपुर (HVJ) गैस पाइपलाइन।
- राष्ट्रीय जलमार्ग (NW1–NW4) में गंगा, ब्रह्मपुत्र, केरल की पश्चिमी तटीय नहर तथा गोदावरी-कृष्णा/काकीनाडा-पुदुच्चेरी नहर मार्ग शामिल हैं।
- भारत के प्रमुख बंदरगाह: कांडला, मुंबई, JNPT, मार्मागाओ, न्यू मैंगलोर, कोच्चि, चेन्नई, विशाखापत्तनम, पारादीप व हल्दिया।
- पवन हंस पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों को हेलीकॉप्टर सेवाएँ प्रदान करता है।
- डाक को छह श्रेणियों में बाँटा गया है; INSAT भारत की बहुउद्देशीय संचार उपग्रह प्रणाली है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आयात, निर्यात व पुनर्निर्यात व्यापार शामिल हैं; व्यापार संतुलन अनुकूल या प्रतिकूल हो सकता है।
- पर्यटन एक ऐसा व्यापार है जो रोज़गार सृजित करता है, विदेशी मुद्रा अर्जित करता है तथा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है — इसे “इंक्रेडिबल इंडिया” अभियान द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है।
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