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Class 12 Hindi ch 18 Notes In Hindi

जहां कोई वापसी नहीं (CH- 18) Detailed Summary – Class 12 Hindi अंतरा (CH- 18)

Posted on February 16, 2022March 25, 2023 by Anshul Gupta

पाठ – 18

जहां कोई वापसी नहीं

In this post we have given the detailed notes of class 12 Hindi chapter 18 जहां कोई वापसी नहीं These notes are useful for the students who are going to appear in class 12 board exams

इस पोस्ट में क्लास 12 के हिंदी के पाठ 18 जहां कोई वापसी नहीं के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 12 में है एवं हिंदी विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 12
SubjectHindi (अंतरा)
Chapter no.Chapter 18
Chapter Nameजहां कोई वापसी नहीं
CategoryClass 12 Hindi Notes
MediumHindi
Class 12 Hindi Chapter 18 जहां कोई वापसी नहीं
Explore the topics
पाठ – 18
जहां कोई वापसी नहीं
निर्मल वर्मा का जीवन परिचय
शिक्षा: –
कार्य: –
रचनाएं: –
उपन्यास: –
कहानीयां: –
यात्रा संस्मरण: –
निबंध संग्रह: –
नाटक: –
संचयन: –
अनुवाद: –
पुरस्कार: –
साहित्यिक विशेषताएं: –
भाषा शैली: –
मृत्यु: – 25 अक्टूबर 2005 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया।
जहां कोई वापसी नहीं
पाठ की मूल संवेदना: –
जहां कोई वापसी नहीं – पाठ का सार
अमझर शब्द का अर्थ: –
आधुनिक भारत के नए शरणार्थी: –
प्रकृति और औद्योगिकरण के कारण विस्थापन में अंतर: –
यूरोप एवं भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएं: –
सिंगरौली की उर्वरा भूमि अपने लिए अभिशाप: –
औद्योगिकरण के कारण पर्यावरण संकट: –

निर्मल वर्मा का जीवन परिचय 

निर्मल वर्मा का जन्म 3 अप्रेल 1929 हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री नंद कुमार वर्मा था, जो ब्रिटिश भारत सरकार के रक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी थे। आठ भाई-बहनों में पांचवें निर्मल वर्मा की संवेदनशील बनावट पर हिमाचल की पहाड़ियों की छाया दूर से ही पहचानी जा सकती है।

शिक्षा: – 

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में M.A किया।

कार्य: – 

1959 में चेकोस्लाविया के प्राच्य विद्या संस्थान प्राग के निमंत्रण पर वहां गए और चेक उपन्यासों और कहानियों का हिंदी में अनुवाद किया। हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए यूरोप की सांस्कृतिक और राजनीतिक समस्याओं पर लेख और रिपोर्टें लिखीं जो उनके निबंधों के संग्रह में शामिल हैं। इसके बाद वे 1970 में भारत आए और स्वतंत्र लेखन शुरू किया।

रचनाएं: –

  • उपन्यास: –

    • वे दिन, लाल टीन की छत, एक चिथड़ा सुख तथा अंतिम अरण्य, रात का रिपोर्टर – जिस पर सीरियल तैयार किया गया है, निर्मल वर्मा द्वारा रचित उपन्यास है।
  • कहानीयां: –

    • तीन एकांत, परिंदे, जलती झाड़ी, कव्वे और काला पानी, पिछली गर्मियों में, बीच बहस में, सूखा तथा अन्य कहानियां आदि।
  • यात्रा संस्मरण: –

    • चीड़ों की चांदनी, हर बारिश में, धुंध से उठती धुन।
  • निबंध संग्रह: –

    • शब्द और स्मृति, ढलान से उतरते हुए, कला का जोखिम। 
  • नाटक: – 

    • तीन एकान्त (1976)।
  • संचयन: – 

    • दूसरी दुनिया (1978)
  • अनुवाद: – 

    • कुप्रिन की कहानियाँ, रोमियो जूलियट और अँधेरा, टिकट संग्रह (कारेल चापेक की कहानियाँ), इतने बड़े धब्बे, झोंपड़ीवाले, बाहर और परे, बचपन, आर यू आर, एमेके एक गाथा।

पुरस्कार: –

  • कव्वे और काला पानी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (1985), 
  • पूर्ण कार्य के लिए साधना सम्मान (1993), 
  • U.P. हिंदी संस्थान के सर्वोच्च राम मनोहर लोहिया अति विशिष्ट सम्मान (1995), 
  • ज्ञानपीठ के मूर्तिदेवी पुरस्कार (1995) और 
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार (2000), 
  • 1996 में, ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय, USA की पत्रिका द वर्ल्ड लिटरेचर के बहुसम्मानित पुरस्कार न्यूश्ताद् अवार्ड के लिए भारत से नामांकित किया गया था।

साहित्यिक विशेषताएं: –

निर्मल वर्मा को नई कहानी आंदोलन का अग्रदूत माना जाता है। उनकी रचनाओं में चिंतन की गहराई है। उन्होंने न केवल भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक समस्याओं पर, बल्कि यूरोप की सांस्कृतिक और राजनीतिक समस्याओं पर भी कई लेख लिखे हैं।

भाषा शैली: –

भाषा शैली में एक अनूठी जकड़न है, जो विचार के विषय का विस्तार करती है, विभिन्न कारणों से जनता को दिलचस्प बनाती है। शब्द चयन में जटिलता के बावजूद वाक्य संरचना में मिश्रित और मिश्रित वाक्यों की प्रधानता है। जगह-जगह उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग से भाषा-शैली में अनेक नवीन प्रयोगों की झलक मिलती है।

मृत्यु: – 25 अक्टूबर 2005 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया।

 

जहां कोई वापसी नहीं

पाठ की विधा: – यात्रा वृतांत

 

पाठ की मूल संवेदना: – 

प्रस्तुत पाठ में लेखक ने न केवल पर्यावरण संबंधी चिंताओं को रेखांकित किया है, बल्कि विकास के नाम पर पर्यावरणीय विनाश से उत्पन्न होने वाले विस्थापन की मानवीय पीड़ा को भी रेखांकित किया है। लेखक का मानना है कि अंधाधुंध विकास और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन होना चाहिए, नहीं तो विकास हमेशा विस्थापन और पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म देगा और मनुष्य अपने समाज, संस्कृति और पर्यावरण से विस्थापित होकर जीवन जीने को मजबूर होगा।

औद्योगिक विकास के दौर में प्राकृतिक सौन्दर्य किस प्रकार नष्ट हो रहा है, इसका मार्मिक चित्रण इस पाठ में किया गया है। यह पाठ विस्थापितों की अनेक समस्याओं का हृदयस्पर्शी चित्र प्रस्तुत करता है। यह इस सच्चाई को भी उजागर करता है कि आधुनिक औद्योगीकरण की आंधी में मनुष्य न केवल उखड़ जाता है, बल्कि उसका पर्यावरण, संस्कृति और आवास भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है।

 

जहां कोई वापसी नहीं – पाठ का सार

अमझर शब्द का अर्थ: – 

आम के पेड़ों से घिरा एक गाँव, जहाँ आम गिरते हैं। आम के पेड़ तब से सूखने लगे जब से सरकार ने घोषणा की कि अमरोली परियोजना के तहत नवागांव के कई गांवों को नष्ट कर दिया जाएगा। उन पर मायूसी छा गई। यह सही है, अगर एक आदमी को जड़ से उखाड़ दिया जाएगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेगा?

 

आधुनिक भारत के नए शरणार्थी: –

वे लोग जो औद्योगीकरण के तूफान से हमेशा के लिए अपनी मातृभूमि से अलग हो गए, वही लोग आधुनिक भारत के नए शरणार्थी कहलाते हैं।

 

प्रकृति और औद्योगिकरण के कारण विस्थापन में अंतर: –

बाढ़ या भूकंप के कारण जब लोग अपने घरों को छोड़कर कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थान पर चले जाते हैं और स्थिति सामान्य होने पर अपने घरों को लौट जाते हैं, तो उन्हें प्रकृति के कारण विस्थापित कहा जाता है। जब औद्योगीकरण के विकास के नाम पर लोगों को निर्वाचित गृह भूमि से अलग कर दिया जाता है और ये लोग फिर कभी घर वापस नहीं आ पाते हैं तो उन्हें औद्योगीकरण के नाम पर विस्थापित कहा जाता है।

 

यूरोप एवं भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएं: –

यूरोप एवं भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएं काफी भिन्न हैं। यूरोप में मनुष्य और भूगोल के बीच संतुलन बनाए रखना पर्यावरण का सवाल है, जबकि भारत में संस्कृति के बीच संतुलन बनाए रखने का सवाल है।

 

सिंगरौली की उर्वरा भूमि अपने लिए अभिशाप: –

सिंगरौली की भूमि इतनी उपजाऊ थी और जंगल इतने समृद्ध थे कि हजारों बनवासी और किसान शताब्दियों से उनकी मदद से अपना भरण-पोषण करते रहे हैं। आज सिंगरौली की वही अतुलनीय दौलत उनके लिए अभिशाप बन गई, इसलिए सिंगरौली की अपार क्षमता दिल्ली के सत्ताधारीओं और उद्योगपतियों की नजरों से ओझल नहीं हो पाई। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण बैकुंठ और अकेलेपन के लिए काला पानी माने जाने वाला सिंगरौली अब राष्ट्रीय गौरव के साथ प्रगति के नक्शे पर आ गया है।

 

औद्योगिकरण के कारण पर्यावरण संकट: –

यह सच है कि औद्योगिक वातावरण ने संकट पैदा कर दिया है, औद्योगीकरण के कारण लोग गाँव-गाँव जाकर ज़मीन से आज़ाद हो गए हैं। ऐसा करने से वहां का माहौल खराब हो गया, साथ ही मनुष्य और उसका परिवेश भी बर्बाद हो गया है। जिससे प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच संतुलन बिगड़ गया। औद्योगीकरण के कारण विस्थापित उद्योगों और कचरे ने पर्यावरण संकट पैदा किया। मनुष्य ने प्रकृति और संस्कृति के बीच संतुलन को नष्ट कर दिया है। हमें ऐसी योजनाएँ बनानी होंगी जो इस संतुलन को बनाए रखें और विकास और प्रगति करें।

We hope that class 12 Hindi Chapter 18 जहां कोई वापसी नहीं notes in Hindi helped you. If you have any query about class 12 Hindi Chapter 18 जहां कोई वापसी नहीं notes in Hindi or about any other notes of class 12 Hindi Notes, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

Category: Class 12 Hindi

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