पाठ – 8
अगले पद का पूर्वानुमान — अनुक्रमों और श्रेढ़ियों का अन्वेषण
In this post we have given the detailed notes of class 9 Math chapter 8 Predicting What Comes Next: Exploring Sequences and Progressions in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 board exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के गणित के पाठ 8 अगले पद का पूर्वानुमान — अनुक्रमों और श्रेढ़ियों का अन्वेषण के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं गणित विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT — Ganita Manjari (2026-27) |
| Class | Class 9 |
| Subject | Math |
| Chapter no. | Chapter 8 |
| Chapter Name | अगले पद का पूर्वानुमान — अनुक्रमों और श्रेढ़ियों का अन्वेषण (Predicting What Comes Next: Exploring Sequences and Progressions) |
| Category | Class 9 Math Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
पाठ 8, अगले पद का पूर्वानुमान — अनुक्रमों और श्रेढ़ियों का अन्वेषण
अनुक्रम से परिचय (Introduction to Sequences)
अनुक्रम (Sequence): संख्याओं की एक क्रमिक सूची, जिसमें प्रत्येक संख्या को अनुक्रम का पद (Term) कहते हैं, अनुक्रम कहलाती है। जैसे वर्ग संख्याओं के अनुक्रम 1, 4, 9, 16, 25, 36, … में 1 पहला पद है, 4 दूसरा पद है और 25 पाँचवाँ पद है।
- अनुक्रम परिमित (Finite) भी हो सकते हैं और अपरिमित (Infinite) भी। उदाहरण के लिए 1, 2, 3, 4, 5, 6, … एक अपरिमित अनुक्रम है, जबकि 6, 12, 24, 48, 96 एक परिमित अनुक्रम है, जिसमें केवल 5 पद हैं।
- तीन बिंदु ( … ) यह दर्शाते हैं कि अनुक्रम अपरिमित रूप से आगे चलता रहता है।
कुछ परिचित अनुक्रम:
- प्राकृत संख्याएँ — 1, 2, 3, 4, 5, 6, … (प्रत्येक पद पिछली संख्या से 1 अधिक है)
- विषम संख्याएँ — 1, 3, 5, 7, 9, 11, … (क्रमागत पदों के बीच 2 का अंतर है)
- त्रिभुजाकार संख्याएँ — 1, 3, 6, 10, 15, 21, … (क्रमागत पदों के बीच अंतर 2, 3, 4, 5, 6, … है; प्रत्येक पद उतनी ही प्राकृत संख्याओं का योग है — जैसे 1 = 1, 3 = 1 + 2, 6 = 1 + 2 + 3, 10 = 1 + 2 + 3 + 4)
- वर्ग संख्याएँ — 1, 4, 9, 16, 25, 36, … (क्रमागत पदों के बीच अंतर 3, 5, 7, 9, 11, … है; प्रत्येक पद उतनी ही क्रमिक विषम संख्याओं का योग है — जैसे 1 = 1, 4 = 1 + 3, 9 = 1 + 3 + 5, 16 = 1 + 3 + 5 + 7)
पद-संकेतक (Notation for terms):
किसी अनुक्रम के पहले पद को t1, दूसरे पद को t2, तीसरे पद को t3 और सामान्य रूप से nवें पद को tn से प्रदर्शित किया जाता है। यदि एक साथ कई अनुक्रमों की बात करनी हो तो अलग-अलग अक्षरों का प्रयोग करते हैं — t1, t2, t3, … एक अनुक्रम के लिए; s1, s2, s3, … दूसरे के लिए; u1, u2, u3, … तीसरे के लिए। ध्यान रहे — पद-संख्या n सदैव एक ऋणेतर पूर्णांक (positive integer) होती है, किंतु पद स्वयं ऋणात्मक, भिन्न या कोई भी वास्तविक संख्या हो सकता है। जैसे अनुक्रम 1, 1/2, 1/3, 1/4, … में पद घटते क्रम में हैं, तथा –7, –3, 1, 5, 9, … में क्रमागत पदों के बीच 4 का अंतर है।
अनुक्रम के लिए व्यापक सूत्र (Explicit Rule for a Sequence)
व्यापक सूत्र (Explicit Formula): ऐसा सूत्र जिसमें पद की स्थिति संख्या n का उपयोग करके सीधे उस पद का मान ज्ञात किया जाता है, व्यापक सूत्र कहलाता है। इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि इससे बिना पिछले पद जाने ही अनुक्रम का कोई भी पद (जैसे 20वाँ, 53वाँ या 300वाँ पद) सीधे प्राप्त किया जा सकता है।
उदाहरण 1: व्यंजक un = 2n – 1 पर विचार कीजिए। n में 1, 2, 3, … रखने पर u1 = 2 × 1 – 1 = 1, u2 = 2 × 2 – 1 = 3, u3 = 2 × 3 – 1 = 5 प्राप्त होते हैं। अतः un = 2n – 1 विषम संख्याओं के अनुक्रम का व्यापक सूत्र है।
व्यापक सूत्र से यह भी जाँचा जा सकता है कि कोई संख्या अनुक्रम का पद है या नहीं, और उसकी स्थिति भी ज्ञात की जा सकती है। जैसे 137 विषम संख्या किस स्थिति पर है, यह जानने के लिए un = 137 अर्थात 2n – 1 = 137 हल करने पर n = 69 प्राप्त होता है — अतः 137, अनुक्रम का 69वाँ पद है।
उदाहरण 2: अनुक्रम sn = 5n – 2 में जाँचिए कि 308 और 471 इसके पद हैं या नहीं। sn = 308 अर्थात 5n – 2 = 308 से 5n = 310, n = 62 प्राप्त होता है — अतः 308 इस अनुक्रम का 62वाँ पद है। परंतु 5n – 2 = 471 हल करने पर 5n = 473, n = 94.6 प्राप्त होता है। चूँकि 94.6 एक प्राकृत संख्या नहीं है, अतः 471 इस अनुक्रम का पद नहीं है (क्योंकि n हमेशा एक प्राकृत संख्या होनी चाहिए — यह पद की स्थिति दर्शाता है)।
अनुक्रम के लिए पुनरावर्ती सूत्र (Recursive Rule for a Sequence)
पुनरावर्ती सूत्र (Recursive Formula): किसी अनुक्रम के पदों को उनसे पहले आए पद(पदों) से संबद्ध करके अनुक्रम की व्याख्या करना पुनरावर्ती सूत्र कहलाता है। इसका उपयोग करने के लिए अनुक्रम के पूर्व पद ज्ञात होने चाहिए। जैसे अनुक्रम 1, 4, 7, 10, 13, … के लिए t1 = 1, tn = tn–1 + 3 (जहाँ n ≥ 2) एक पुनरावर्ती सूत्र है।
उदाहरण 3: पुनरावर्ती सूत्र u1 = 1, un = 2un–1 + 3 (n ≥ 2) से प्रथम चार पद ज्ञात कीजिए।
हल: u2 = 2u1 + 3 = 2 × 1 + 3 = 5; u3 = 2u2 + 3 = 2 × 5 + 3 = 13; u4 = 2u3 + 3 = 2 × 13 + 3 = 29। अतः प्रथम चार पद 1, 5, 13, 29 हैं।
उदाहरण 4: पुनरावर्ती सूत्र s1 = 3, sn = sn–1 (sn–1 – 1) (n ≥ 2) से प्रथम चार पद ज्ञात कीजिए।
हल: s2 = s1(s1 – 1) = 3 × (3 – 1) = 3 × 2 = 6; s3 = s2(s2 – 1) = 6 × (6 – 1) = 6 × 5 = 30; s4 = s3(s3 – 1) = 30 × (30 – 1) = 30 × 29 = 870। अतः प्रथम चार पद 3, 6, 30, 870 हैं।
विरहांक-फिबोनाची अनुक्रम (Virahānka–Fibonacci Sequence):
पुनरावर्ती सूत्र में केवल एक ही पूर्व पद सम्मिलित होना जरूरी नहीं — इसमें दो या दो से अधिक पूर्व पद भी सम्मिलित हो सकते हैं। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है V1 = 1, V2 = 2, Vn = Vn–1 + Vn–2 (n ≥ 3) — इससे प्राप्त अनुक्रम है 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, … जहाँ प्रत्येक पद पूर्व के दो पदों का योग है। इसे सर्वप्रथम आचार्य विरहांक ने सातवीं शताब्दी में अपनी कृति वृत्तजातिसमुच्चय में प्राकृत छंद-शास्त्र (मीटर) के संदर्भ में लिखा था। इसका आगे अध्ययन गोपाल (लगभग 1135 सन्) और हेमचंद्र (लगभग 1150 सन्) ने किया, और बाद में इटली के गणितज्ञ फिबोनाची (लगभग 1200 सन्) ने भी इसका अध्ययन किया। इसीलिए इसे विरहांक-फिबोनाची अनुक्रम कहते हैं।
समानांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progression — AP)
समानांतर श्रेढ़ी (AP): ऐसा अनुक्रम जिसमें प्रथम पद के बाद प्रत्येक पद, पिछले पद में एक स्थिर संख्या d जोड़ने पर प्राप्त होता है, समानांतर श्रेढ़ी कहलाती है। इस स्थिर संख्या d को सार्व अंतर (Common Difference) कहते हैं।
वर्गों के बढ़ते प्रतिरूप (चित्र 8.3) में प्रत्येक चरण में कोनों पर 4 वर्ग जुड़ते जाते हैं, जिससे अनुक्रम 1, 5, 9, 13, 17, 21, … बनता है। इसे 1, 1 + 1×4, 1 + 2×4, 1 + 3×4, … लिखा जा सकता है, अर्थात nवाँ पद tn = 1 + (n – 1) × 4 = 4n – 3। यहाँ प्रत्येक क्रमागत पद के बीच अंतर 4 (स्थिर) है, इसलिए यह एक AP है।
सामान्यतः समानांतर श्रेढ़ी को a, a + d, a + 2d, a + 3d, …, a + (n – 1)d के रूप में लिखा जाता है, जहाँ ‘a’ प्रथम पद है और ‘d’ सार्व अंतर है। जैसे 11, 7, 3, –1, –5, … में प्रथम पद 11 है और सार्व अंतर –4 है (क्योंकि पद घट रहे हैं)।
AP का दृश्यांकन (Visualising an AP):
जब चरण-संख्या (x) और उस चरण के वर्गों की संख्या (y) के क्रमिक युग्म — जैसे (1, 1), (2, 5), (3, 9), (4, 13), (5, 17) — को ग्राफ पेपर पर आलेखित किया जाता है, तो ये सभी बिंदु एक सरल रेखा (Straight line) पर स्थित पाए जाते हैं। यह किसी भी AP की एक विशेष पहचान है।
AP के व्यापक तथा पुनरावर्ती सूत्र:
- व्यापक सूत्र: tn = a + (n – 1) × d
- पुनरावर्ती सूत्र: t1 = a, tn = tn–1 + d (जहाँ n ≥ 2)
उदाहरण 5: एक टैक्सी कंपनी ₹200 का निश्चित बुकिंग शुल्क तथा ₹40 प्रति किलोमीटर लेती है। 1 km, 2 km, 3 km, … यात्रा के बाद कुल किराया क्रमशः ₹240, ₹280, ₹320, … होगा। यह एक AP है, जिसमें प्रथम पद a = 240 और सार्व अंतर d = 40 है। अतः nवाँ पद = 240 + (n – 1) × 40 = 200 + 40n, जहाँ n किलोमीटर में तय की गई दूरी है। अतः 10 km यात्रा पर कुल किराया = 200 + 40 × 10 = ₹600 होगा।
प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग (Sum of the First n Natural Numbers)
मान लीजिए S प्रथम 10 प्राकृत संख्याओं का योग है, अर्थात S = 1 + 2 + 3 + … + 10। इसे उल्टे क्रम में भी लिखा जा सकता है — S = 10 + 9 + 8 + … + 1। दोनों समीकरणों को जोड़ने पर प्रत्येक युग्म (1+10, 2+9, 3+8, …) का योग 11 प्राप्त होता है, अर्थात 2S = 11 × 10 = 110, इसलिए S = 55।
व्यापक निगमन (Derivation): मान लीजिए S = 1 + 2 + … + n। इसे उल्टे क्रम में लिखने पर S = n + (n – 1) + … + 1। दोनों को जोड़ने पर 2S = n(n + 1) प्राप्त होता है, अतः
Sn = n(n + 1) / 2
इसे चित्रात्मक रूप से भी समझा जा सकता है — यदि 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 को बिंदुओं द्वारा दर्शाया जाए और उसकी एक उलटी प्रतिकृति साथ जोड़ी जाए, तो कुल बिंदु 7 × 6 का एक आयताकार सरणी बनाते हैं, अर्थात 2 × (1+2+3+4+5+6) = 7 × 6।
ऐतिहासिक तथ्य: इस परिणाम का सबसे पहला ज्ञात लिखित उल्लेख आर्यभट्ट के ग्रंथ ‘आर्यभटीयम’ के अध्याय 2, छंद 19 में मिलता है, जिसमें बताया गया है कि यह योग, पहले और अंतिम पद के औसत को पदों की संख्या से गुणा करके भी प्राप्त किया जा सकता है।
इस सूत्र का उपयोग क्रमागत संख्याओं का योग ज्ञात करने में भी होता है। जैसे 25 + 26 + … + 58 = S58 – S24 = (58 × 59)/2 – (24 × 25)/2 = 1711 – 300 = 1411।
त्रिभुजाकार संख्या और योग सूत्र का संबंध: त्रिभुजाकार संख्याओं के अनुक्रम 1, 3, 6, 10, 15, … का nवाँ पद, प्रथम n प्राकृत संख्याओं के योग के बराबर है, अर्थात tn = n(n + 1) / 2। इससे 10वीं त्रिभुजाकार संख्या = (10 × 11)/2 = 55, 17वीं = (17 × 18)/2 = 153, तथा 80वीं = (80 × 81)/2 = 3240 प्राप्त होती है।
गुणोत्तर श्रेढ़ी (Geometric Progression — GP)
गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP): ऐसा अनुक्रम जिसमें प्रथम पद के बाद प्रत्येक पद, पिछले पद को एक स्थिर संख्या r से गुणा करने पर प्राप्त होता है, गुणोत्तर श्रेढ़ी कहलाती है। इस स्थिर संख्या r को सार्व अनुपात (Common Ratio) कहते हैं।
वर्गों के एक अन्य बढ़ते प्रतिरूप (चित्र 8.6) में हरे वर्गों की संख्या 3, 6, 12, 24, 48, 96, … है, जहाँ हर पद पिछले पद का दुगुना है। इसे 3, 3×2, 3×22, 3×23, … लिखा जा सकता है, अर्थात nवाँ पद tn = 3 × 2n–1। सामान्यतः GP को a, ar, ar2, ar3, …, arn–1 के रूप में लिखा जाता है, जहाँ ‘a’ प्रथम पद तथा ‘r’ सार्व अनुपात है।
- व्यापक सूत्र: tn = arn–1
- पुनरावर्ती सूत्र: t1 = a, tn = r × tn–1 (जहाँ n ≥ 2)
उदाहरण 6: क्या 1, 2, 4, 8, 16, … एक GP है? — हाँ, इसमें सार्व अनुपात r = 2 है।
उदाहरण 7: क्या 1, 3, 9, 27, 81, … एक GP है? — हाँ, इसमें सार्व अनुपात r = 3 है।
उदाहरण 8: क्या 1, –1, 1, –1, 1, … एक GP है? — हाँ, इसमें सार्व अनुपात r = –1 है।
उदाहरण 9: जाँच कीजिए कि अनुक्रम 5, 15/4, 45/16, 135/64, … एक GP है या नहीं तथा इसका nवाँ पद ज्ञात कीजिए।
हल: t2/t1 = (15/4) ÷ 5 = 3/4; t3/t2 = (45/16) ÷ (15/4) = 3/4; t4/t3 = (135/64) ÷ (45/16) = 3/4। चूँकि क्रमागत पदों का अनुपात सदैव 3/4 (स्थिर) है, अतः यह एक GP है, जिसमें a = 5 तथा r = 3/4 है। इसका nवाँ पद = a × rn–1 = 5 × (3/4)n–1।
फ्रैक्टल्स और सिएरपिंस्की त्रिभुज (Fractals — Sierpiński Triangle):
एक समबाहु त्रिभुज (चरण 0) की तीनों भुजाओं के मध्यबिंदुओं को मिलाकर बीच का त्रिभुज हटाने पर चरण 1 प्राप्त होता है, और यही प्रक्रिया शेष काले त्रिभुजों पर बार-बार दोहराने से यह सुंदर प्रतिरूप बनता है, जिसे सिएरपिंस्की त्रिभुज (Sierpiński Triangle) कहते हैं (पोलिश गणितज्ञ वाक्लाव सिएरपिंस्की के नाम पर)। यह एक फ्रैक्टल (Fractal) है — अर्थात एक ऐसा प्रतिरूप, जो अलग-अलग स्तर पर ज़ूम करने पर भी स्वयं जैसा ही दिखाई देता है।
चरण 0, 1, 2, 3 में काले त्रिभुजों की संख्या क्रमशः 1, 3, 9, 27 है (हर चरण में प्रत्येक त्रिभुज तीन छोटे त्रिभुजों से बदल जाता है), तथा चरण 4 और 5 में यह संख्या क्रमशः 81 और 243 होगी। यह एक GP है, जिसमें a = 1 और r = 3, अर्थात nवें चरण में काले त्रिभुजों की संख्या tn = 3n।
दूसरी ओर, यदि चरण 0 में काले क्षेत्र का क्षेत्रफल 1 वर्ग इकाई हो, तो प्रत्येक अगले चरण में यह क्षेत्रफल पिछले चरण के 3/4 भाग के बराबर रह जाता है। अतः nवें चरण में काले क्षेत्र का क्षेत्रफल sn = (3/4)n — यह भी एक GP है, परंतु इसमें r = 3/4 होने के कारण चरण-संख्या बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्रफल 0 के निकट होता जाता है। इस प्रकार जहाँ त्रिभुजों की संख्या तीव्रता से बढ़ती है, वहीं उनका कुल क्षेत्रफल घटता जाता है।
| चरण (n) | 0 | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | … | n |
| काले त्रिभुजों की संख्या (tn) | 1 | 3 | 9 | 27 | 81 | 243 | … | 3n |
| छायांकित क्षेत्रफल (sn) | 1 | 3/4 | (3/4)2 | (3/4)3 | (3/4)4 | (3/4)5 | … | (3/4)n |
GP का दृश्यांकन (Visualising a GP):
वर्गों के GP प्रतिरूप में जब चरण-संख्या (x) और वर्गों की संख्या (y) के युग्म — (1, 3), (2, 6), (3, 12), (4, 24), (5, 48) — को ग्राफ पर आलेखित किया जाता है, तो ये बिंदु एक सरल रेखा पर स्थित नहीं होते (जैसा AP में होता था), बल्कि तेज़ी से ऊपर उठती हुई एक वक्र रेखा बनाते हैं। इसी प्रकार सिएरपिंस्की त्रिभुज में स्टेज बनाम काले त्रिभुजों की संख्या का आलेख तेज़ी से ऊपर बढ़ता है, जबकि स्टेज बनाम क्षेत्रफल का आलेख 0 के निकट आता हुआ नीचे गिरता है।
उदाहरण 10: एक गेंद भूमि से 24 फुट की ऊँचाई से गिराई जाती है। हर बार टकराने पर वह अपनी पिछली ऊँचाई के 3/4 भाग तक ऊपर उछलती है।
हल: पहली उछाल = 24 × 0.75 = 18 फुट; दूसरी उछाल = 18 × 0.75 = 13.5 फुट; तीसरी उछाल = 13.5 × 0.75 = 10.125 फुट; चौथी उछाल = 10.125 × 0.75 = 7.59375 फुट; पाँचवीं उछाल = 7.59375 × 0.75 = 5.695 फुट; छठी उछाल = 5.695 × 0.75 = 4.27125 फुट; सातवीं उछाल = 4.27125 × 0.75 = 3.2034 फुट। यह ऊँचाइयों का अनुक्रम एक GP है, जिसमें a = 18 और r = 0.75 (या 3/4) है। सातवीं उछाल के बाद गेंद अपनी प्रारंभिक ऊँचाई (24 फुट) के 1/6 भाग (= 4 फुट) से कम ऊँचाई तक ही उछलती है।
महत्वपूर्ण सूत्रों की तालिका
| राशि | सूत्र |
| व्यापक सूत्र (सामान्य अनुक्रम) | tn — पद-संख्या n पर आधारित नियम, जैसे tn = 2n – 1 |
| पुनरावर्ती सूत्र (सामान्य अनुक्रम) | t1 दिया हुआ, तn = f(tn–1) — जैसे tn = tn–1 + d |
| त्रिभुजाकार संख्या का nवाँ पद | tn = n(n + 1) / 2 |
| समानांतर श्रेढ़ी (AP) — व्यापक रूप | a, a + d, a + 2d, …, a + (n – 1)d |
| AP का nवाँ पद | tn = a + (n – 1) × d |
| AP का पुनरावर्ती सूत्र | t1 = a, tn = tn–1 + d (n ≥ 2) |
| प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग | Sn = n(n + 1) / 2 |
| गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) — व्यापक रूप | a, ar, ar2, ar3, …, arn–1 |
| GP का nवाँ पद | tn = a × rn–1 |
| GP का पुनरावर्ती सूत्र | t1 = a, tn = r × tn–1 (n ≥ 2) |
पाठ का सारांश (Chapter Summary)
- अनुक्रम संख्याओं की एक क्रमिक सूची है; इसमें हर संख्या को पद कहते हैं।
- व्यापक सूत्र पद की स्थिति संख्या n से सीधे पद का मान देता है; पुनरावर्ती सूत्र पिछले पद(पदों) से अगला पद देता है।
- त्रिभुजाकार संख्या अनुक्रम 1, 3, 6, 10, 15, … का nवाँ पद tn = n(n + 1)/2 है, जो प्रथम n प्राकृत संख्याओं के योग का सूत्र भी है।
- समानांतर श्रेढ़ी (AP) में हर पद, पिछले पद में स्थिर संख्या d (सार्व अंतर) जोड़ने से बनता है — nवाँ पद tn = a + (n – 1)d।
- गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर पद, पिछले पद को स्थिर संख्या r (सार्व अनुपात) से गुणा करने से बनता है — nवाँ पद tn = arn–1।
- AP के क्रमिक युग्म (n, tn) एक सरल रेखा पर स्थित होते हैं, जबकि GP के क्रमिक युग्म सरल रेखा पर स्थित नहीं होते।
- सिएरपिंस्की त्रिभुज और सिएरपिंस्की वर्ग कारपेट जैसे फ्रैक्टल्स के कई गुणधर्म गुणोत्तर श्रेढ़ी से संबंधित होते हैं।
We hope that class 9 Math Chapter 8 अगले पद का पूर्वानुमान — अनुक्रमों और श्रेढ़ियों का अन्वेषण (Predicting What Comes Next: Exploring Sequences and Progressions) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 9 Math Chapter 8 अगले पद का पूर्वानुमान — अनुक्रमों और श्रेढ़ियों का अन्वेषण (Predicting What Comes Next: Exploring Sequences and Progressions) Notes in Hindi or about any other Notes of class 9 Math in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

