पाठ – 7
संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय
In this post we have given the detailed notes of class 9 Math chapter 7 The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 board exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के गणित के पाठ 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं गणित विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT — Ganita Manjari (2026-27) |
| Class | Class 9 |
| Subject | Math |
| Chapter no. | Chapter 7 |
| Chapter Name | संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय (The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability) |
| Category | Class 9 Math Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
पाठ 7, संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय
प्रायिकता क्या है?
जिस प्रकार हम लंबाई, क्षेत्रफल अथवा आयतन जैसी राशियों को मापते हैं, उसी प्रकार प्रायिकता (Probability) भी एक प्रकार का मापन है। भौतिक राशियों के स्थान पर प्रायिकता का उपयोग किसी घटना के घटित होने की संभावना के मापन में किया जाता है। यह किसी विशेष घटना के होने को लेकर हमारी निश्चितता अथवा आत्मविश्वास को व्यक्त करने में सहायता करती है। उदाहरण के लिए — क्या आज वर्षा होगी? क्या हमारा विद्यालय हॉकी प्रतियोगिता में जीतेगा? क्या मैं लकी ड्रॉ में चयनित होऊँगा?
इन सभी को यादृच्छिक घटनाएँ (Random Events) कहा जाता है। हम इनके संभावित परिणामों से अवगत होते हैं, परंतु यह पहले से ज्ञात नहीं होता कि कौन-सा परिणाम निश्चित रूप से प्राप्त होगा। ऐसी घटनाओं का वर्णन करने के लिए हम असंभव, निश्चित, कम संभव, अधिक संभव या समान रूप से संभव जैसे शब्दों का उपयोग करते हैं। जब यह निर्णय व्यक्ति के अपने अनुभव या मत पर आधारित होता है (जैसे — “सूर्य तेज चमक रहा है इसलिए वर्षा नहीं होगी”), तो उसे व्यक्तिनिष्ठ प्रायिकता (Subjective Probability) कहते हैं।
इस अध्याय में हम सीखेंगे कि प्रायिकता का आकलन अधिक वस्तुनिष्ठ (Objective) विधि से कैसे किया जा सकता है। इसके लिए पहले हमें यादृच्छिकता और प्रायिकता के पैमाने को समझना होगा।
यादृच्छिकता क्या है? (What is Randomness?)
यादृच्छिकता (Randomness): यह एक ऐसी परिस्थिति या क्रिया (जैसे सिक्के को उछालना अथवा पासा फेंकना) है, जहाँ हम सभी संभावित परिणामों को जानते हुए भी यह नहीं बता सकते कि निश्चित रूप से कौन-सा परिणाम आगे आएगा।
- सिक्का उछालना: परिणाम चित (Heads) या पट (Tails) ही हो सकता है, परंतु किसी एक उछाल में कौन-सा आएगा, यह निश्चित नहीं कहा जा सकता।
- पासा फेंकना: संभावित परिणाम 1, 2, 3, 4, 5 या 6 हैं, परंतु किसी विशेष प्रयास में कौन-सा अंक आएगा, यह नहीं कहा जा सकता।
ऐसे प्रेक्षणों को प्रायिकता में प्रयोग अथवा परीक्षण (Experiment/Trial) कहते हैं और इनकी अनिश्चितता के कारण इन्हें यादृच्छिक कहा जाता है।
यादृच्छिक प्रेक्षण (Random Observation): एक यादृच्छिक प्रयोग ऐसी प्रक्रिया है जिसकी पुनरावृत्ति की जा सकती है (जैसे सिक्का उछालना), जहाँ प्रत्येक बार परिणाम भिन्न हो सकता है और परिणाम पहले से ज्ञात नहीं होता।
प्रायिकता गणित की वह शाखा है जिसमें यादृच्छिकता और किसी यादृच्छिक परिस्थिति में एक विशिष्ट परिणाम होने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाता है। उदाहरण के लिए, सिक्का उछालने पर चित आने की प्रायिकता 1/2 और पट आने की प्रायिकता भी 1/2 होती है, क्योंकि दोनों समप्रायिक (equally likely) परिणाम हैं।
वर्षा जैसी घटना को यादृच्छिक इसलिए माना जाता है क्योंकि यह वायुमंडल के अनेक जटिल कारकों (तापमान, आर्द्रता, वायु प्रणाली, दबाव) पर निर्भर करती है और इन कारकों के प्रति इतनी संवेदनशील होती है कि पूर्ण निश्चितता से इसका अनुमान लगाना असंभव है। फिर भी आँकड़ों से प्राप्त प्रतिरूपों (patterns) के आधार पर वर्षा की प्रायिकता का आकलन किया जा सकता है।
प्रायिकता का पैमाना (The Probability Scale)
किसी घटना के घटित होने की संभावना को प्रकट करने के लिए प्रायिकता को 0 से 1 तक के पैमाने पर मापा जाता है।
- प्रायिकता 0 — घटना का घटित होना असंभव है (जैसे बिना खेले जीत जाना)।
- प्रायिकता 1 — घटना का घटित होना निश्चित है।
- प्रायिकता 0.5 — घटना का घटित होना या न होना समप्रायिक (समान संभावना) है।
- प्रायिकता 0.75 — घटना के घटित होने की अधिक संभावना है (75%)।
अधिकांश घटनाओं की प्रायिकता 0 और 1 के मध्य होती है, जो यह व्यक्त करती है कि उनके घटित होने की कितनी संभावना है। जैसे-जैसे किसी विशेष रंग के परिणाम की संख्या बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे उसकी प्रायिकता पैमाने पर असंभव से लेकर कम संभावित, समप्रायिक, अधिक संभावित होते हुए निश्चित की ओर बढ़ती जाती है।
| घटना | इसका आशय है |
| एक पासे पर 6 से बड़ी संख्या आना | असंभव — पासे में केवल 1 से 6 तक की संख्याएँ होती हैं। |
| एक मानक पासे पर 3 आना | कम संभावित — परंतु असंभव नहीं, क्योंकि पासे का एक फलक 3 है। |
| एक सिक्का उछालने पर चित आना | समप्रायिक संभावना — चित या पट आने की संभावना समान है। |
| ताश के 52 पत्तों की गड्डी से 2 से 10 तक की संख्या वाला कोई पत्ता निकालना | अधिक संभावित — 52 पत्तों में 2 से 10 तक की संख्या वाले 36 पत्ते होते हैं। |
| सभी लाल मिठाइयों के थैले से 1 लाल मिठाई निकालना | निश्चित — सभी मिठाइयाँ लाल हैं। |
प्रायिकता का वस्तुनिष्ठ मापन
वस्तुनिष्ठता के दृष्टिकोण से किसी घटना की प्रायिकता मापने की दो प्रमुख विधियाँ हैं —
- अनुभव से प्राप्त प्रमाणों का उपयोग: इसमें एक प्रयोग को बार-बार दोहराकर अथवा पूर्व के प्रेक्षणों से सांख्यिकीय आँकड़ों का विश्लेषण करके प्रमाण संग्रहित किए जाते हैं और सापेक्षिक आवृत्ति (relative frequency) की गणना करके प्रायिकता का आकलन किया जाता है। इसे प्रायोगिक प्रायिकता (Experimental Probability) कहते हैं।
- सैद्धांतिक विधियों का उपयोग: इसमें यह मान लिया जाता है कि सभी संभव परिणाम समप्रायिक हैं। तब संभव परिणामों की कुल संख्या के सापेक्ष अनुकूल परिणामों की संख्या के आधार पर प्रायिकता निकाली जाती है। इसे सैद्धांतिक प्रायिकता (Theoretical Probability) कहते हैं।
प्रायोगिक प्रायिकता (Experimental Probability): प्रेक्षण अथवा प्रयोग करना
किसी प्रयोग में घटना, प्रयोग का फल होती है और उसे परिणाम (Outcome) कहा जाता है। एक प्रयोग में सभी संभव परिणामों के समुच्चय को प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) कहते हैं। प्रतिदर्श समष्टि को कोष्ठकों में सूचीबद्ध किया जाता है और परिणामों को अल्पविराम द्वारा पृथक किया जाता है।
उदाहरण 1: प्रयोग — एक सिक्का उछाला गया। संभावित परिणाम — चित (H) या पट (T)। प्रतिदर्श समष्टि — {H, T}।
प्रयोग — एक पासा फेंका गया। संभावित परिणाम — 1, 2, 3, 4, 5 या 6। प्रतिदर्श समष्टि — {1, 2, 3, 4, 5, 6}।
प्रायोगिक प्रायिकता (Experimental Probability) = घटना के घटित होने की संख्या ⁄ परीक्षण की कुल संख्या
उदाहरण 2: मान लीजिए, आप एक पासा 50 बार फेंकते हैं और उसमें ठीक 8 बार 4 प्राप्त होता है।
पासे पर 4 प्राप्त होने की प्रायोगिक प्रायिकता = 8 ⁄ 50 = 0.16 अथवा 16%।
हम यह भी कह सकते हैं कि 4 की सापेक्षिक आवृत्ति (relative frequency) = 8 ⁄ 50 = 0.16 है।
सापेक्षिक आवृत्ति हमें सैद्धांतिक पूर्वानुमानों की अपेक्षा वास्तविक आँकड़ों पर आधारित प्रायिकता को समझने में सहायता करती है। यह विशेष रूप से सांख्यिकी और आँकड़ों के विश्लेषण में उपयोगी होती है।
ज्ञातव्य — साँप-सीढ़ी के खेल का प्रारंभ प्राचीन भारत में हुआ था। यह ज्ञान्-चौपड़ नामक पारंपरिक खेल से विकसित हुआ, जिसका उपयोग नैतिक शिक्षा देने वाले शैक्षणिक उपकरण के रूप में किया जाता था — इसमें प्रत्येक सीढ़ी एक गुण और प्रत्येक साँप एक अवगुण का प्रतीक थी।
सैद्धांतिक प्रायिकता (Theoretical Probability)
सैद्धांतिक प्रायिकता में किसी घटना के घटित होने की संभावना का अध्ययन इस आधार पर किया जाता है कि सभी संभावित परिणाम समप्रायिक हैं। यह एक आदर्श और पूर्णतया न्यायसंगत स्थिति में की जाने वाली अपेक्षा है, जिसमें किसी आँकड़े या प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती। इसे सामान्यतः P(घटना) अथवा P(परिणाम) से निरूपित किया जाता है।
सैद्धांतिक प्रायिकता (P) = अनुकूल परिणामों की संख्या ⁄ सभी संभावित परिणामों की संख्या
उदाहरण 3: यदि एक आदर्श षट्फलकीय (6 फलक वाले) पासे को फेंका जाए, तो पासे पर 4 प्राप्त होने की सैद्धांतिक प्रायिकता क्या है?
हल —
अनुकूल परिणामों की संख्या = 1 (केवल संख्या 4)
सभी संभावित परिणामों की संख्या = 6 (1 से 6 तक की संख्याएँ)
P (पासे पर 4 प्राप्त होना) = 1 ⁄ 6 = 0.1666… ≈ 0.167 अथवा 16.7%
उदाहरण 4: ‘PROBABILITY’ शब्द से एक अक्षर का यादृच्छिक रूप से चयन किया जाता है। ‘B’ अक्षर के चयनित होने की प्रायिकता क्या है?
हल —
अनुकूल परिणामों की संख्या = 2 (‘PROBABILITY’ शब्द में दो ‘B’ हैं)
सभी संभावित परिणामों की संख्या = 11 (‘PROBABILITY’ शब्द में 11 अक्षर हैं)
P (अक्षर ‘B’ को चुनना) = 2 ⁄ 11 = 0.1818… ≈ 0.182 अथवा 18.2%
प्रायिकता के माध्यम से सांख्यिकीय आँकड़ों का विश्लेषण
सांख्यिकीय आँकड़ों के माध्यम से प्रमाण संग्रह की विधि का उपयोग व्यापार जगत में विपणन, बिक्री का पूर्वानुमान लगाने, बीमा तथा विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में व्यापक रूप से किया जाता है।
उदाहरण 5: मान लीजिए, आप अपनी कक्षा के 50 विद्यार्थियों के प्रिय फल की सूचना संग्रहीत करते हैं और परिणाम इस प्रकार आते हैं — 20 विद्यार्थी आम पसंद करते हैं, 15 विद्यार्थी सेब पसंद करते हैं, 10 विद्यार्थी केला पसंद करते हैं और 5 विद्यार्थी अंगूर पसंद करते हैं। यदि कक्षा से यादृच्छिक रूप से एक विद्यार्थी चुना जाए, तो उसका प्रिय फल आम होने की प्रायिकता क्या है?
हल —
आम के प्रिय फल होने की प्रायिकता = विद्यार्थियों की संख्या जिनका प्रिय फल आम है ⁄ विद्यार्थियों की कुल संख्या = 20 ⁄ 50 = 0.4
अतः कक्षा में यादृच्छिक रूप से चयनित विद्यार्थी का प्रिय फल आम होने की संभावना 0.4 अथवा 40% है।
अब मान लीजिए कि आपको इसी आधार पर 1500 विद्यार्थियों वाले संपूर्ण विद्यालय के लिए फल खरीदने हैं। चूँकि सभी विद्यार्थियों से आँकड़े जुटाना अव्यावहारिक है, इसलिए एक प्रतिदर्श (Sample) — यहाँ 50 विद्यार्थियों की एक कक्षा — से एकत्रित आँकड़ों के आधार पर संपूर्ण जनसंख्या (Population) — यानी 1500 विद्यार्थियों — के लिए अनुमान लगाया जाता है। चूँकि आम पसंद करने की प्रायिकता 0.4 आँकी गई थी, इसलिए लगभग 600 आम (1500 का 40%) खरीदने होंगे, शेष अन्य फल होंगे। अनुमान को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए बड़ा और अधिक प्रतिनिधिक प्रतिदर्श (जैसे 100 विद्यार्थी, विभिन्न कक्षाओं से) लिया जा सकता है। सांख्यिकी में इस प्रक्रिया को प्रतिचयन (Sampling) कहा जाता है।
संक्षेप में — प्रायोगिक प्रायिकता वास्तविक आँकड़ों पर आधारित होती है, जबकि सैद्धांतिक प्रायिकता समप्रायिक परिणामों की मान्यता (एक पूर्णतया न्यायसंगत स्थिति) पर आधारित होती है और इसमें प्रायोगिक आँकड़ों की आवश्यकता नहीं होती। पूर्णतया न्यायसंगत स्थिति में भी, विशेषकर जब प्रयासों की संख्या कम हो, प्रायोगिक और सैद्धांतिक प्रायिकता में अंतर हो सकता है। प्रयासों की संख्या बढ़ने के साथ प्रायोगिक प्रायिकता, सैद्धांतिक प्रायिकता के समीप आती जाती है — इसे बृहत् संख्याओं का नियम (Law of Large Numbers) कहते हैं।
द्यूतकार का भ्रम (Gambler’s Fallacy)
अधिकतर लोग सोचते हैं कि यदि कोई घटना एक शृंखला में कई बार यादृच्छिक रूप से घटित होती है (जैसे सिक्का उछालने पर लगातार छह बार चित आना), तो अगली बार उसके विपरीत परिणाम (पट) आने की अधिक संभावना हो जाती है। किंतु सिक्के को पूर्व के परिणामों का कोई हिसाब नहीं रहता — प्रत्येक बार चित और पट की संभावना पहली बार के समान ही 50% अथवा 1/2 बनी रहती है। सिक्के की कोई स्मृति नहीं होती। इस भ्रांति को द्यूतकार का भ्रम (Gambler’s Fallacy) कहते हैं।
उदाहरण 6: मान लीजिए, आप साँप-सीढ़ी खेल रहे हैं और आगे बढ़ने के लिए एक षट्फलकीय निष्पक्ष पासा फेंकते हैं। आपने अभी लगातार तीन बार पासा फेंकने पर तीनों बार 6 प्राप्त किया। अब आप सोचते हैं — “मैं अभी तीन बार छह प्राप्त कर चुका हूँ तो अगली बार 6 आने की कोई संभावना नहीं है!” यह विचार ही द्यूतकार का भ्रम है, क्योंकि पासे का प्रत्येक फेंकना एक स्वतंत्र घटना (Independent Event) है। पासे पर 6 आने की प्रायिकता सदैव ही 1/6 ≈ 0.166 अथवा 16.6% रहती है, चाहे पिछले परिणाम कुछ भी रहे हों।
मूल विचार: साँप-सीढ़ी जैसे संभावनाओं के अनेक खेलों में प्रत्येक बार पासा फेंकना एक स्वतंत्र घटना है। द्यूतकार का भ्रम लोगों को यह मानने पर विवश करता है कि यहाँ कोई प्रतिरूप (pattern) है, जबकि वास्तव में यादृच्छिकता की कोई स्मृति नहीं होती।
न्यायसंगत एवं निष्पक्ष (Fair and Unbiased)
जब हम किसी सिक्के को ‘न्यायसंगत (fair)’ मानते हैं तो इसका आशय है कि वह सममितीय है और उसके पास ऐसा कोई कारण नहीं है कि वह एक ओर की तुलना में दूसरी ओर अधिक बार गिरे। सिक्के के इस गुण को ‘निष्पक्ष’ (Unbiased) होना कहते हैं। ‘यादृच्छिक रूप से सिक्का उछालना’ का आशय है कि सिक्के को बिना किसी पक्षपात या हस्तक्षेप के स्वतंत्रतापूर्वक उछाला जाए।
प्रायिकता के तत्त्व — प्रतिदर्श समष्टि और घटनाएँ
प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space)
प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space): ‘S’ से निरूपित प्रतिदर्श समष्टि, किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों का समुच्चय होती है। प्रत्येक संभावित परिणाम को प्रतिदर्श समष्टि का तत्त्व (Element) कहा जाता है।
- प्रतिदर्श समष्टि S में प्रत्येक संभावित परिणाम अवश्य ही सम्मिलित होना चाहिए।
- किसी परिणाम को एक बार से अधिक सूचीबद्ध नहीं किया जाना चाहिए।
- प्रतिदर्श समष्टि में तत्त्वों की संख्या को प्रतिदर्श आकार (Sample Size) कहा जाता है और इसे n(S) से निरूपित किया जाता है।
प्रतिदर्श समष्टि के उदाहरण —
- कल वर्षा होने के लिए: S = {वर्षा होगी, वर्षा नहीं होगी}, n(S) = 2
- एक प्रतियोगिता के परिणाम के लिए: S = {जीत, हार, ड्रॉ}, n(S) = 3
- एक सिक्का उछालना: प्रयोग — एक बार निष्पक्ष सिक्का उछालना; S = {चित (H), पट (T)}; प्रतिदर्श आकार = 2
- एक पासा फेंकना: प्रयोग — एक मानकीकृत षट्फलकीय पासा फेंकना; S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}; प्रतिदर्श आकार = 6
- दो सिक्कों को उछालना: प्रयोग — एक साथ दो सिक्कों को उछालना; S = {HH, HT, TH, TT}; प्रतिदर्श आकार = 4
| सिक्का 1 | सिक्का 2 | परिणाम |
| H | H | HH |
| H | T | HT |
| T | H | TH |
| T | T | TT |
सोचिए और विचार कीजिए — यदि हम केवल वर्षा होगी या नहीं होगी के बजाय फुहार, हल्की वर्षा अथवा भारी वर्षा जैसी विभिन्न मात्राओं को भी सम्मिलित करना चाहें, तो प्रतिदर्श समष्टि को {वर्षा नहीं, बूँदा-बाँदी, हल्की वर्षा, भारी वर्षा} में विस्तारित करना होगा — प्रतिदर्श समष्टि को प्रश्न के आवश्यक विवरण-स्तर के अनुरूप पर्याप्त विस्तृत होना चाहिए।
घटनाएँ (Events)
घटना (Event): कोई भी एक संभावित परिणाम अथवा परिणामों का संयोजन, जो किसी यादृच्छिक गतिविधि के करने पर घटित हो सकता है। एक घटना, प्रतिदर्श समष्टि का उपसमुच्चय (Subset) होती है।
- दो सिक्कों को उछालना: प्रतिदर्श समष्टि S = {HH, HT, TH, TT}; घटना — ‘कम-से-कम एक सिक्का चित प्रदर्शित करता है’ — E = {HH, HT, TH}
- षट्फलकीय पासा फेंकना: प्रतिदर्श समष्टि S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}; घटना — ‘पासे पर प्राप्त संख्या 4 से अधिक है’ — E = {5, 6}
- टोकरी से फल निकालना: प्रतिदर्श समष्टि S = {सेब, केला, संतरा}; घटना — ‘वह फल निकालना जो पीला हो’ — E = {केला}
वृक्ष आरेख (Tree Diagrams)
वृक्ष आरेख (Tree Diagram): यह एक दृश्यांकन विधि है जिसका उपयोग किसी बहु-चरणीय प्रयोग (Multi-step Experiment) के सभी संभावित परिणामों को सूचीबद्ध करने के लिए किया जाता है। एक बहु-चरणीय प्रयोग में स्वतंत्र परीक्षणों की एक शृंखला समाहित होती है, जैसे — एक सिक्के को दो बार उछालना अथवा एक पासे को तीन बार फेंकना। वृक्ष की प्रत्येक शाखा एक संभावित परिणाम को दर्शाती है और शाखाओं का आगे विभाजन आगामी घटनाओं के विभिन्न पथों को दर्शाता है।
वृक्ष आरेख निम्नलिखित के लिए उपयोगी है —
- बहु-चरणीय प्रयोगों का दृश्यांकन, जहाँ आरंभ से समापन तक प्रत्येक पथ एक पूर्ण परिणाम को दर्शाता है।
- एक प्रतिदर्श समष्टि के सभी परिणामों को सूचीबद्ध करना।
उदाहरण 7: प्रयोग — एक निष्पक्ष सिक्का दो बार उछालना।
एक बिंदु से प्रथम उछाल में प्राप्त प्रत्येक संभव परिणाम (H या T) तक एक रेखा खींची जाती है। इनमें से प्रत्येक परिणाम से आगे द्वितीय उछाल के प्रत्येक संभव परिणाम तक दो रेखाएँ खींची जाती हैं। इस प्रकार वृक्ष आरेख 4 संभावित परिणाम दर्शाता है।
अतः प्रतिदर्श समष्टि S = {HH, HT, TH, TT}
वृक्ष की प्रत्येक शाखा पर उस परिणाम की सैद्धांतिक प्रायिकता भी अंकित की जाती है —
सैद्धांतिक प्रायिकता (P) = अनुकूल परिणामों की संख्या ⁄ संभावित परिणामों की कुल संख्या
दो बार चित (HH) आने की घटना पर विचार करें —
P(HH) = 1 ⁄ 4 = 0.25 अथवा 25%
सोचिए और विचार कीजिए — क्या आप एक बार चित और एक बार पट आने (अर्थात HT तथा TH दोनों को मिलाकर) की प्रायिकता ज्ञात कर सकते हैं? संकेत — HT और TH, दोनों ही ‘एक चित, एक पट’ की घटना में सम्मिलित होते हैं, इसलिए इसकी प्रायिकता 2 ⁄ 4 = 0.5 होगी।
अध्याय के मुख्य बिंदु (सारांश)
- प्रायिकता किसी घटना के घटित होने की संभावना का मापन है।
- प्रायिकता को 0 (असंभावना की ओर संकेत) से लेकर 1 (निश्चितता का संकेत) के पैमाने पर व्यक्त किया जाता है। किसी घटना E की प्रायिकता को P(E) से निरूपित किया जाता है, जहाँ 0 ≤ P(E) ≤ 1 है।
- प्रायोगिक प्रायिकता = घटना घटित होने की संख्या ⁄ प्रयासों की कुल संख्या — यह वास्तविक प्रयोग करके निकाली जाती है।
- सैद्धांतिक प्रायिकता P(A) = अनुकूल परिणामों की संख्या ⁄ संभावित परिणामों की संख्या — यह एक न्यायसंगत, आदर्श स्थिति में सभी परिणामों के समप्रायिक होने की मान्यता पर आधारित होती है।
- प्रतिदर्श समष्टि किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों का समुच्चय है — S = {परिणाम1, परिणाम2, …, परिणामn}
- एक घटना, एक यादृच्छिक प्रयोग के किसी एक परिणाम अथवा संभावित परिणामों के समूह से बनती है — यह प्रतिदर्श समष्टि का एक उपसमुच्चय है।
- वृक्ष आरेख किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभावित परिणामों को सूचीबद्ध व दृश्यांकित करने तथा उनकी प्रायिकता की गणना करने में सहायता करते हैं।
- प्रयासों की संख्या बढ़ने पर प्रायोगिक प्रायिकता, सैद्धांतिक प्रायिकता के समीप आती जाती है — इसे बृहत् संख्याओं का नियम कहते हैं। किंतु किसी एक पासे या सिक्के के पिछले परिणाम अगले परिणाम को प्रभावित नहीं करते — इस भ्रांति को द्यूतकार का भ्रम कहते हैं।
We hope that class 9 Math Chapter 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय (The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 9 Math Chapter 7 संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय (The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability) Notes in Hindi or about any other Notes of class 9 Math in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

