Skip to content
Criss Cross ClassesCriss Cross ClassesOur Content is Our Power
Menu
  • Home
  • CBSE
    • Hindi Medium
      • Class 9
      • Class 10
      • Class 11
      • Class 12
    • English Medium
      • Class 9
      • Class 10
      • Class 11
      • Class 12
  • State Board
    • UP Board (UPMSP)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Bihar Board (BSEB)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Chhattisgarh Board (CGBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Haryana Board (HBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Jharkhand Board (JAC)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Uttarakhand Board (UBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Madhya Pradesh Board (MPBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Punjab Board (PSEB)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Rajasthan Board (RBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
  • Contact us
  • About us
Menu
Class 9 Math Chapter 6 समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल Notes in Hindi

समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल Notes || Class 9 Math Chapter 6 in Hindi ||

Posted on August 17, 2026 by

पाठ – 6

समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल

In this post we have given the detailed notes of class 9 Math chapter 6 Measuring Space: Perimeter and Area in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 board exams.

इस पोस्ट में कक्षा 9 के गणित के पाठ 6 समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं गणित विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT — Ganita Manjari (2026-27)
ClassClass 9
SubjectMath
Chapter no.Chapter 6
Chapter Nameसमष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल (Measuring Space: Perimeter and Area)
CategoryClass 9 Math Notes in Hindi
MediumHindi
Class 9 Math Chapter 6 समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल (Measuring Space: Perimeter and Area) Notes in Hindi
Explore the topics
पाठ – 6
समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल
पाठ 6, समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल
परिमाप की मूल अवधारणा
मूल आकृतियों का परिमाप:
वृत्त का परिमाप — π (पाई) और C/D अनुपात
π के इतिहास की एक झलक:
वृत्त की चाप (Arc) की लंबाई
व्यावहारिक उदाहरण — 400 मीटर दौड़-पथ:
उदाहरण 1 — दो प्रतिच्छेदी वृत्तों की परिधि:
उदाहरण 2 — कौन-सा पथ लंबा है? (अर्द्धवृत्तों की पहेली):
क्षेत्रफल — आयत और समांतर चतुर्भुज
त्रिभुज का क्षेत्रफल
माध्यिका (Median) का गुण:
हीरोन का सूत्र (Heron’s Formula)
उदाहरण 3 — समबाहु त्रिभुज (भुजा a इकाई):
उदाहरण 4 — समद्विबाहु त्रिभुज (समान भुजाएँ a इकाई, आधार 2b इकाई):
उदाहरण 5 — त्रिभुज की भुजाएँ 3, 4, 5 इकाई:
परिवृत्त और अंतर्वृत्त की त्रिज्या से क्षेत्रफल:
ब्रह्मगुप्त का सूत्र (चक्रीय चतुर्भुज का क्षेत्रफल)
उदाहरण 6 — आयत के लिए सत्यापन:
उदाहरण 7 — समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज के लिए सत्यापन:
ब्रह्मगुप्त का सूत्र हीरोन के सूत्र का व्यापकीकरण है:
आयत को वर्ग बनाना — बौधायन की रचना
वृत्त का क्षेत्रफल
वृत्त के त्रिज्यखंड (Sector) का क्षेत्रफल:
विशेष स्थिति और व्यापकीकरण
त्वरित पुनरावृत्ति — सभी सूत्रों की तालिका

पाठ 6, समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल

परिमाप की मूल अवधारणा

किसी भी आकृति का परिमाप (perimeter) उसकी सभी सीमा-रेखाओं की कुल लंबाई होता है। कल्पना कीजिए कि एक छोटा कीड़ा किसी आकृति की सीमा-रेखा पर बिना मुड़े चलता है, जब तक वह अपने आरंभिक बिंदु पर वापस नहीं आ जाता — इस चलने में तय की गई कुल दूरी ही उस आकृति का परिमाप है।

मूल आकृतियों का परिमाप:

  • वर्ग (Square): यदि भुजा a इकाई है, तो परिमाप = 4a इकाई।
  • समबाहु त्रिभुज (Equilateral triangle): यदि भुजा a इकाई है, तो परिमाप = 3a इकाई।
  • आयत (Rectangle): यदि लंबाई a इकाई और चौड़ाई b इकाई है, तो परिमाप = 2(a + b) इकाई। ध्यान दीजिए कि वर्ग के परिमाप का सूत्र, आयत के परिमाप के सूत्र की एक ‘विशिष्ट स्थिति’ है, जब a = b रख दिया जाए।

वर्ग की भुजा को दोगुना करने पर परिमाप भी दोगुना हो जाता है — परिमाप और भुजा का अनुपात हमेशा 4:1 स्थिर रहता है। इसी प्रकार समबाहु त्रिभुज के लिए परिमाप और भुजा का अनुपात हमेशा 3:1 पर स्थिर रहता है, चाहे त्रिभुज का आकार कितना भी बड़ा या छोटा क्यों न हो।

वृत्त का परिमाप — π (पाई) और C/D अनुपात

प्राचीन काल से ही लोगों को यह ज्ञात था कि किसी भी वृत्त की परिधि (circumference, C) और उसके व्यास (diameter, D) का अनुपात सदैव स्थिर रहता है, चाहे वृत्त का आकार कुछ भी हो। इस स्थिर अनुपात को ग्रीक अक्षर π (पाई) कहा जाता है।

π के इतिहास की एक झलक:

  • मेसोपोटामिया (लगभग 1900 ई.पू.) में π का मान 3 + 1/8 = 3.125 लिया गया था।
  • आर्किमिडीज़ (250 ई.पू.) ने अंतर्गत और परिगत 96-भुजा वाले बहुभुजों का उपयोग करके दर्शाया कि 3 10/71 < π < 3 1/7 है।
  • चीन के जू चोंगजी (480 ई.) ने π ≈ 355/113 ≈ 3.1415929 का मान दिया, जो 800 से अधिक वर्षों तक विश्व का सबसे सटीक मान रहा।
  • आर्यभट (499 ई.) ने π ≈ 62832/20000 = 3.1416 का मान दिया और इसे ‘आसन्न’ अर्थात सन्निकट बताया।
  • ब्रह्मगुप्त (628 ई.) ने π ≈ √10 ≈ 3.1622 का सुझाव दिया।
  • संगमग्राम के माधव ने π के लिए पहला सटीक (अनंत श्रेणी) सूत्र ढूँढ़ा — π/4 = 1 − 1/3 + 1/5 − 1/7 + … इस श्रेणी की सहायता से माधव ने π का मान 11 दशमलव स्थानों तक (3.14159265358) ज्ञात कर लिया था।

व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रायः π ≈ 22/7 या π ≈ 3.14 लिया जाता है। परंतु ध्यान रहे — π का वास्तविक मान 22/7 के बराबर नहीं है, बल्कि उसके ‘निकट’ है; इसलिए हम π ≈ 22/7 लिखते हैं, π = 22/7 नहीं। सन 1761 में गणितज्ञ लैम्बर्ट ने सिद्ध किया कि π एक अपरिमेय संख्या (irrational number) है, अर्थात इसे a/b के रूप (जहाँ a, b पूर्णांक हों) में नहीं लिखा जा सकता, और इसके दशमलव अंकों में कोई दोहराव वाला प्रतिरूप नहीं होता।

सूत्र (Formula): यदि वृत्त की त्रिज्या (radius) r इकाई है, तो वृत्त की परिधि (circumference):

C = 2πr     (या समतुल्य रूप से C = πd, जहाँ d = व्यास = 2r)

वृत्त की चाप (Arc) की लंबाई

वृत्त के व्यास AB के सापेक्ष प्रतिबिंब लेने या 180° घुमाने पर स्पष्ट होता है कि दोनों अर्द्धवृत्त बराबर हैं; अतः अर्द्धवृत्त की चाप-लंबाई = 2πr ÷ 2 = πr होती है। इसी तरह 90° घुमाने पर चतुर्थांश वृत्त की चाप-लंबाई = 2πr ÷ 4 = πr/2 होती है।

इन दोनों परिणामों से हम किसी भी वृत्त की चाप की लंबाई का व्यापक सूत्र प्राप्त कर सकते हैं, जो चाप द्वारा केंद्र पर बनाए गए कोण पर निर्भर करता है।

सूत्र (Formula): यदि चाप AB वृत्त के केंद्र O पर θ° का कोण अंतरित (subtend) करती है, तो चाप की लंबाई:

चाप की लंबाई l = 2πr × (θ°/360°)

जहाँ r = वृत्त की त्रिज्या और θ° = चाप द्वारा केंद्र पर बना कोण।

व्यावहारिक उदाहरण — 400 मीटर दौड़-पथ:

पाठ्यपुस्तक में एक 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक का उदाहरण दिया गया है, जिसमें दो सीधे खंड (प्रत्येक 84.39 मीटर) और दो अर्द्धवृत्ताकार वक्रीय खंड (सबसे भीतरी त्रिज्या 36.5 मीटर) हैं। यदि धाविका भीतरी सीमा-रेखा से 0.3 मीटर दूरी पर दौड़ती है, तो उसकी त्रिज्या 36.5 + 0.3 = 36.8 मीटर होगी। दोनों अर्द्धवृत्त मिलकर एक पूर्ण वृत्त बनाते हैं, जिसकी परिधि = 2 × π × 36.8 = 2 × 3.1416 × 36.8 = 231.22 मीटर। अतः कुल दूरी = 168.78 + 231.22 = 400 मीटर। बाहरी दौड़-पथों की त्रिज्या अधिक होने के कारण उन्हें अधिक दूरी तय करनी पड़ती है — इसी असमानता की भरपाई के लिए दौड़-पथों में ‘सांतरण (stagger)’ दिया जाता है।

उदाहरण 1 — दो प्रतिच्छेदी वृत्तों की परिधि:

समान त्रिज्या r वाले दो वृत्त इस प्रकार स्थित हैं कि प्रत्येक वृत्त दूसरे के केंद्र से होकर गुजरता है। वृत्त बिंदु C और D पर प्रतिच्छेद करते हैं। त्रिभुज ABC में AB = AC = BC = r होने से यह समबाहु त्रिभुज है, इसलिए ∠CAB = ∠CBA = 60°। इसी तरह ∠BAD = ∠ABD = 60°, अतः ∠CAD = ∠CBD = 120°। इसलिए प्रत्येक चाप उस वृत्त की परिधि का 120°/360° = 1/3 भाग है। अतः दोनों लाल चापों की कुल लंबाई = 2 × (1/3) × 2πr = 8πr/3।

उदाहरण 2 — कौन-सा पथ लंबा है? (अर्द्धवृत्तों की पहेली):

P और Q को जोड़ने वाला पहला पथ त्रिज्या a′ के अर्द्धवृत्त a से बना है और इसकी लंबाई πa′ है। दूसरा पथ तीन छोटे अर्द्धवृत्तों b, c, d (त्रिज्याएँ b′, c′, d′) से मिलकर बना है, जिसकी लंबाई π(b′ + c′ + d′) है। चूँकि PQ = 2a′ = 2b′ + 2c′ + 2d′, इसलिए a′ = b′ + c′ + d′। परिणामस्वरूप दोनों पथों की लंबाई बिल्कुल समान होती है — यह एक रोचक और आश्चर्यजनक परिणाम है, जो दर्शाता है कि अर्द्धवृत्तों की संख्या बढ़ने पर भी पथ की लंबाई नहीं बदलती।

क्षेत्रफल — आयत और समांतर चतुर्भुज

क्षेत्रफल (Area) किसी द्वि-विमीय क्षेत्र द्वारा घेरे गए ‘स्थान के माप’ को कहते हैं। इसकी इकाई 1 × 1 का वर्ग है, जिसका क्षेत्रफल 1 वर्ग इकाई (sq. unit) माना जाता है।

सूत्र (Formula): a इकाई और b इकाई भुजाओं वाले आयत का क्षेत्रफल = ab वर्ग इकाई। (वर्ग के लिए यह a² वर्ग इकाई बन जाता है, जब a = b हो।)

समांतर चतुर्भुज ABCD को समान आधार b और समान ऊँचाई h वाले एक आयत में रूपांतरित किया जा सकता है (एक भुजा के त्रिभुजाकार भाग को काटकर दूसरी ओर जोड़कर)। दोनों आकृतियों का क्षेत्रफल समान रहता है।

सूत्र (Formula): समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई = bh, जहाँ b = आधार और h = आधार से सम्मुख भुजा तक की लंबवत ऊँचाई। ध्यान दीजिए कि आयत के विपरीत, केवल भुजाओं की लंबाई जानकर समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात नहीं किया जा सकता — कोण भी आवश्यक है, क्योंकि भुजाओं की लंबाई स्थिर रखते हुए भी कोण बदलकर क्षेत्रफल घटाया-बढ़ाया जा सकता है।

त्रिभुज का क्षेत्रफल

त्रिभुज की दो सर्वांगसम प्रतियों को जोड़कर एक समांतर चतुर्भुज बनाया जा सकता है, जिसका आधार और ऊँचाई मूल त्रिभुज के समान होते हैं। चूँकि समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल bh है, त्रिभुज का क्षेत्रफल उसका आधा होगा।

सूत्र (Formula): त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई = ½bh, जहाँ b = आधार और h = आधार पर लंबवत ऊँचाई।

माध्यिका (Median) का गुण:

त्रिभुज ABC में AD माध्यिका है, अर्थात D भुजा BC का मध्यबिंदु है। चूँकि ΔABD और ΔACD का आधार समान (BD = DC) और ऊँचाई भी समान है, इसलिए क्षेत्रफल के सूत्र से दोनों त्रिभुजों का क्षेत्रफल बराबर होता है, भले ही वे सर्वांगसम न हों।

प्रमेय (Theorem): किसी त्रिभुज की माध्यिका उसे दो बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभाजित करती है।

हीरोन का सूत्र (Heron’s Formula)

जब त्रिभुज की ऊँचाई ज्ञात नहीं हो, केवल तीनों भुजाएँ ज्ञात हों, तब यूनानी गणितज्ञ हीरोन का सूत्र काम आता है।

सूत्र (Formula): यदि ΔABC की भुजाएँ BC = a, CA = b, AB = c हों, तो पहले अर्द्ध-परिमाप (semi-perimeter) ज्ञात करते हैं —

s = ½(a + b + c)

तत्पश्चात त्रिभुज का क्षेत्रफल:

क्षेत्रफल (ΔABC) = √[s(s − a)(s − b)(s − c)]

उदाहरण 3 — समबाहु त्रिभुज (भुजा a इकाई):

s = 3a/2. हीरोन के सूत्र से क्षेत्रफल = √[(3a/2)(a/2)(a/2)(a/2)] = (√3/4)a² वर्ग इकाई। यह उसी परिणाम की पुष्टि करता है जो ½ × आधार × ऊँचाई से मिलता है, जहाँ बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय से ऊँचाई h = (√3/2)a निकलती है।

उदाहरण 4 — समद्विबाहु त्रिभुज (समान भुजाएँ a इकाई, आधार 2b इकाई):

s = a + b. हीरोन के सूत्र से क्षेत्रफल = √[(a+b)(a+b−a)(a+b−a)(a+b−2b)] = b√(a² − b²) वर्ग इकाई। यही परिणाम ½ × आधार × ऊँचाई से भी प्राप्त होता है, जहाँ h = √(a² − b²)।

उदाहरण 5 — त्रिभुज की भुजाएँ 3, 4, 5 इकाई:

s = ½(3+4+5) = 6 इकाई। हीरोन के सूत्र से क्षेत्रफल = √[6 × 3 × 2 × 1] = √36 = 6 वर्ग इकाई। चूँकि 3² + 4² = 5², बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय के विलोम से यह समकोण त्रिभुज है (आधार = 3, ऊँचाई = 4), अतः क्षेत्रफल = ½ × 3 × 4 = 6 वर्ग इकाई — दोनों विधियों से समान परिणाम प्राप्त होता है।

परिवृत्त और अंतर्वृत्त की त्रिज्या से क्षेत्रफल:

किसी भी त्रिभुज ABC के तीनों शीर्षों से गुजरने वाला एक ही वृत्त होता है, जिसे परिवृत्त (circumcircle) कहते हैं, और उसकी त्रिज्या R होती है। इसी तरह त्रिभुज की तीनों भुजाओं को स्पर्श करने वाला एक वृत्त होता है, जिसे अंतर्वृत्त (incircle) कहते हैं, और उसकी त्रिज्या r होती है।

सूत्र (Formula): यदि भुजाएँ a, b, c हों, तो —

ΔABC का क्षेत्रफल = abc / 4R     तथा     ΔABC का क्षेत्रफल = r(a + b + c) / 2

जहाँ R = परिवृत्त की त्रिज्या और r = अंतर्वृत्त की त्रिज्या।

ब्रह्मगुप्त का सूत्र (चक्रीय चतुर्भुज का क्षेत्रफल)

केवल भुजाओं की लंबाई जानकर किसी सामान्य चतुर्भुज (4-gon) का क्षेत्रफल ज्ञात नहीं किया जा सकता — भुजाएँ 3, 3, 3, 3 वाले अलग-अलग समचतुर्भुजों के क्षेत्रफल अलग-अलग (जैसे 9, 8.01, 5.41) हो सकते हैं। परंतु यदि चतुर्भुज चक्रीय (cyclic) हो — अर्थात उसके चारों शीर्ष एक ही वृत्त पर स्थित हों — तो भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त (628 ई.) का सूत्र लागू होता है।

सूत्र (Formula): यदि चक्रीय चतुर्भुज की भुजाएँ a, b, c, d हों और अर्द्ध-परिमाप s = ½(a + b + c + d) हो, तो —

क्षेत्रफल = √[(s − a)(s − b)(s − c)(s − d)]

उदाहरण 6 — आयत के लिए सत्यापन:

सभी आयत चक्रीय होते हैं। भुजाएँ a, b होने पर s = a + b, अतः क्षेत्रफल = √[b × a × b × a] = ab — जो कि सही है।

उदाहरण 7 — समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज के लिए सत्यापन:

समांतर भुजाएँ 2a और 2b तथा दोनों तिर्यक भुजाएँ c हों, तो s = a + b + c। सूत्र सरल होकर (a + b)√[c² − (b − a)²] बनता है, और चूँकि h = √[c² − (b−a)²] (लंबवत ऊँचाई), यह ठीक (a + b)h के बराबर है — यही समलंब चतुर्भुज के क्षेत्रफल का परिचित सूत्र है।

सूत्र (Formula) — समलंब चतुर्भुज (Trapezium): यदि समांतर भुजाएँ a और b तथा उनके बीच की लंबवत दूरी (ऊँचाई) h हो, तो समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल = ½(a + b)h। समलंब चतुर्भुज को दो त्रिभुजों में विभाजित करके, या इसकी दो सर्वांगसम प्रतियाँ जोड़कर एक समांतर चतुर्भुज बनाकर भी यह सूत्र सिद्ध किया जा सकता है।

ब्रह्मगुप्त का सूत्र हीरोन के सूत्र का व्यापकीकरण है:

यदि किसी चतुर्भुज ABCD की चौथी भुजा d = 0 मान ली जाए (अर्थात शीर्ष A और D मिल जाएँ), तो चतुर्भुज एक त्रिभुज में बदल जाता है, जिसकी भुजाएँ a, b, c होंगी। चूँकि कोई भी त्रिभुज चक्रीय होता है, ब्रह्मगुप्त का सूत्र इस पर भी लागू होगा — s = ½(a+b+c) रहेगा, और सूत्र √[(s−a)(s−b)(s−c)(s−0)] = √[s(s−a)(s−b)(s−c)] बन जाएगा, जो ठीक हीरोन का सूत्र है। अतः हीरोन का सूत्र, ब्रह्मगुप्त के सूत्र की एक विशेष स्थिति (special case) है।

आयत को वर्ग बनाना — बौधायन की रचना

प्राचीन काल में किसी आकृति को ‘वर्ग बनाना’ का अर्थ था उसी क्षेत्रफल वाला एक वर्ग बनाना। भारतीय गणितज्ञ बौधायन ने अपने शुल्बसूत्र (800 ई.पू.) में एक आयत (भुजाएँ a और b, जहाँ a > b) को वर्गाकार बनाने की एक ज्यामितीय विधि दी थी। इस रचना का सार यह बीजगणितीय सर्वसमिका है —

[(a + b)/2]² − [(a − b)/2]² = ab

अर्थात एक ऐसा वर्ग बनाया जा सकता है, जिसकी भुजा की लंबाई का वर्ग ठीक ab के बराबर हो, अर्थात आयत ABCD और नवनिर्मित वर्ग HPQS का क्षेत्रफल समान होता है।

वृत्त का क्षेत्रफल

प्राचीन सभ्यताओं ने पाया कि किसी भी आकृति के लिए परिमाप के वर्ग (P²) और क्षेत्रफल (A) का अनुपात, आकृति के आकार (size) पर नहीं बल्कि केवल उसकी आकृति (shape) पर निर्भर करता है — जैसे वर्ग के लिए P² : A सदैव 16 : 1 और समबाहु त्रिभुज के लिए सदैव 36 : √3 रहता है। इसी तर्क से यह अनुमान लगाया गया कि वृत्त के लिए भी C² : A कोई निश्चित अचर होना चाहिए।

  • बेबीलोनियों (1500 ई.पू. से पूर्व) ने पाया C² : A ≈ 12 : 1, अर्थात A ≈ C²/12।
  • प्राचीन मिस्रवासियों (लगभग 1500 ई.पू.) ने अधिक सटीक सूत्र A ≈ (8d/9)² दिया, जो A ≈ (256/81)r² के तुल्य है। यही सूत्र बौधायन शुल्बसूत्र में भी मिलता है।
  • अंततः आर्किमिडीज़ (250 ई.पू.) ने सिद्ध किया कि यह अचर ठीक π ही है।

आर्किमिडीज़ के अनुसार वृत्त का क्षेत्रफल, त्रिज्या और परिधि को भुजा मानने वाले एक समकोण त्रिभुज के क्षेत्रफल के बराबर है:

वृत्त का क्षेत्रफल = ½ × परिधि × त्रिज्या = ½ × 2πr × r = πr²

सूत्र (Formula): त्रिज्या r वाले वृत्त का क्षेत्रफल A = πr²।

नीलकंठ सोमयाजी (लगभग 1500 ई.) ने इसकी एक सुंदर दृश्य व्याख्या दी — वृत्त को पतली-पतली त्रिज्यखंड जैसी ‘फाँकों’ में काटकर पुनर्व्यवस्थित करने पर एक समांतर चतुर्भुज जैसी आकृति बनती है, जिसका आधार = आधी परिधि = πr और ऊँचाई = त्रिज्या r होती है, इसलिए क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई = πr × r = πr² सिद्ध होता है।

वृत्त के त्रिज्यखंड (Sector) का क्षेत्रफल:

त्रिज्यखंड वह क्षेत्र है जो किसी चाप और उसके दोनों सिरों को केंद्र से जोड़ने वाली त्रिज्याओं से घिरा होता है। समरूपता के आधार पर अर्द्धवृत्ताकार चक्रिका (semicircular disc) का क्षेत्रफल वृत्त के क्षेत्रफल का आधा (½πr²) और चतुर्थांश वृत्ताकार चक्रिका (quarter circular disc) का क्षेत्रफल वृत्त के क्षेत्रफल का चौथाई (¼πr²) होता है। इनसे व्यापक सूत्र प्राप्त होता है।

सूत्र (Formula): यदि चाप AB वृत्त के केंद्र O पर θ° का कोण अंतरित करती है, तो त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल:

त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = πr² × (θ°/360°)

चाप और उसकी जीवा (chord) से घिरे क्षेत्र को खंड (segment) कहा जाता है — त्रिज्यखंड में से संगत त्रिभुज का क्षेत्रफल घटाकर खंड का क्षेत्रफल निकाला जा सकता है।

विशेष स्थिति और व्यापकीकरण

गणित में जब कोई सामान्य (व्यापक) परिणाम किसी अतिरिक्त शर्त के साथ सरल हो जाता है, तो उसे ‘विशेष स्थिति’ (special case) कहते हैं, और मूल परिणाम को उसका ‘व्यापकीकरण’ (generalisation) कहा जाता है। जैसे — वर्ग, आयत की एक विशेष स्थिति है (b = a रखने पर); समद्विबाहु समकोण त्रिभुज, समकोण त्रिभुज की एक विशेष स्थिति है (a = b रखने पर a² + b² = c² से c = a√2 प्राप्त होता है); और जैसा ऊपर देखा, हीरोन का सूत्र ब्रह्मगुप्त के सूत्र की एक विशेष स्थिति है।

त्वरित पुनरावृत्ति — सभी सूत्रों की तालिका

आकृति / राशिसूत्रचर राशियाँ
वर्ग का परिमाप4aa = भुजा
समबाहु त्रिभुज का परिमाप3aa = भुजा
आयत का परिमाप2(a + b)a = लंबाई, b = चौड़ाई
वृत्त की परिधि2πr (या πd)r = त्रिज्या, d = व्यास
वृत्त की चाप की लंबाई2πr × (θ°/360°)r = त्रिज्या, θ° = केंद्र पर कोण
आयत का क्षेत्रफलa × ba = लंबाई, b = चौड़ाई
वर्ग का क्षेत्रफलa²a = भुजा
समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफलb × hb = आधार, h = ऊँचाई
त्रिभुज का क्षेत्रफल½ × b × hb = आधार, h = ऊँचाई
हीरोन का सूत्र√[s(s−a)(s−b)(s−c)]a, b, c = भुजाएँ; s = ½(a+b+c)
त्रिभुज का क्षेत्रफल (परिवृत्त त्रिज्या से)abc / 4Ra, b, c = भुजाएँ; R = परिवृत्त त्रिज्या
त्रिभुज का क्षेत्रफल (अंतर्वृत्त त्रिज्या से)r(a+b+c) / 2r = अंतर्वृत्त त्रिज्या
समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल½ × (a + b) × ha, b = समांतर भुजाएँ, h = ऊँचाई
ब्रह्मगुप्त का सूत्र (चक्रीय चतुर्भुज)√[(s−a)(s−b)(s−c)(s−d)]a,b,c,d = भुजाएँ; s = ½(a+b+c+d)
वृत्त का क्षेत्रफलπ × r²r = त्रिज्या
वृत्त के त्रिज्यखंड का क्षेत्रफलπ × r² × (θ°/360°)r = त्रिज्या, θ° = केंद्र पर कोण

We hope that class 9 Math Chapter 6 समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल (Measuring Space: Perimeter and Area) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 9 Math Chapter 6 समष्टि मापन — परिमाप और क्षेत्रफल (Measuring Space: Perimeter and Area) Notes in Hindi or about any other Notes of class 9 Math in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

Category: Class 9 Math Notes in Hindi

Post navigation

← मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे Notes || Class 9 Math Chapter 5 in Hindi ||
संभावनाओं का गणित — प्रायिकता का परिचय Notes || Class 9 Math Chapter 7 in Hindi || →

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Download our App Now - Criss Cross Classes

Free WhatsApp Group

Free Telegram Group

Our Application

Ask Your Doubts

MORE NOTES

  • Class 10 Hindi (42)
  • Class 10 Math Notes in Hindi (15)
  • Class 10 Science Notes in Hindi (16)
  • Class 10 SST Notes in Hindi (22)
  • Class 11 Economics Notes in Hindi (14)
  • Class 11 Geography Notes in Hindi (23)
  • Class 11 Hindi (23)
  • Class 11 History Notes in Hindi (11)
  • Class 11 Physical Education Notes in Hindi (10)
  • Class 11 Political Science Notes in Hindi (20)
  • Class 11 Sociology Notes in Hindi (10)
  • Class 12 Economics Notes in Hindi (20)
  • Class 12 Geography Notes in Hindi (23)
  • Class 12 Hindi (51)
  • Class 12 History Notes in Hindi (16)
  • Class 12 Home Science Notes in Hindi (16)
  • Class 12 Notes (21)
  • Class 12 Physical Education Notes in Hindi (10)
  • Class 12 Political Science Notes in Hindi (19)
  • Class 12 Sociology Notes in Hindi (16)
  • Class 9 Hindi (53)
  • Class 9 Math Notes in Hindi (23)
  • Class 9 Science Notes in Hindi (28)
  • Class 9 Social Science Notes in Hindi (29)
  • Physical Education CUET (8)
  • Uncategorized (1)
© 2026 Criss Cross Classes | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme