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Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक Notes in Hindi

आखिरी चट्टान तक (CH- 5) Detailed Summary || Class 9 Hindi गंगा (CH- 5) ||

Posted on August 17, 2026 by

पाठ – 5

आखिरी चट्टान तक

In this post we have given the detailed notes of Class 9 Hindi chapter 5 आखिरी चट्टान तक These notes are useful for the students who are going to appear in Class 9 board exams

इस पोस्ट में कक्षा 9 के हिंदी के पाठ 5 आखिरी चट्टान तक के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं हिंदी विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT — Ganga (2026-27)
ClassClass 9
SubjectHindi (गंगा)
Chapter no.Chapter 5
Chapter Nameआखिरी चट्टान तक
CategoryClass 9 Hindi
MediumHindi
Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
Explore the topics
पाठ – 5
आखिरी चट्टान तक
पाठ 5, आखिरी चट्टान तक
सारांश
सूर्यास्त की खोज में
अंधेरे में लौटने का खतरा
विवेकानंद चट्टान और सूर्योदय

पाठ 5, आखिरी चट्टान तक

-मोहन राकेश

सारांश

‘आखिरी चट्टान तक’ मोहन राकेश द्वारा लिखा गया एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें लेखक ने भारत के दक्षिणतम छोर कन्याकुमारी की अपनी यात्रा के अनुभवों को सजीव ढंग से व्यक्त किया है। लेखक कन्याकुमारी को सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि कहता है। कैप होटल के आगे समुद्र से उभरी काली चट्टानों में से एक पर खड़े होकर वह देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को निहारता रहता है। पीछे कन्याकुमारी के मंदिर की लाल-सफेद लकीरें चमक रही थीं और सामने वह चट्टान थी जिस पर कभी स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी। यह चट्टान अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के संगम-स्थल पर स्थित है, जहाँ ऊँची-ऊँची लहरें चारों ओर की चट्टानों से टकरा रही थीं। इस दृश्य को देखकर लेखक अपनी पूरी चेतना से ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ महसूस करता है और कुछ देर के लिए यह भी भूल जाता है कि वह स्वयं भी एक जीवित दर्शक है। जब होश आता है तो देखता है कि उसकी चट्टान बढ़ते पानी में घिर चुकी है। वह घबराकर पास की सुरक्षित चट्टान पर कूदकर किनारे पर पहुँच जाता है।

सूर्यास्त की खोज में

इसके बाद लेखक सूर्यास्त देखने के लिए पश्चिम दिशा की ओर चल पड़ता है। दूर पीली रेत का एक ऊँचा टीला, जिसे ‘सैंड हिल’ कहा जाता है, दिखाई देता है। वहाँ पहले से बहुत-से यात्री—युवतियाँ, युवक और गांधी टोपी पहने लोग—रंग-बिरंगे रेशमी कपड़ों में सूर्यास्त देखने जमा थे, और गवर्नमेंट गेस्ट हाउस के बैरे उन्हें कॉफी पिला रहे थे। लेकिन लेखक वहाँ अधिक देर नहीं रुक पाता, क्योंकि अरब सागर की ओर एक और ऊँचा टीला था जो सामने के विस्तार को छिपाए हुए था। अकेला रेत पर कदम घसीटते हुए वह एक के बाद एक कई टीले पार करता है और अंततः एक ऐसे टीले पर पहुँचता है जहाँ से पश्चिमी क्षितिज का खुला दृश्य दिखाई देता है। अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर वह ऐसे बैठ जाता है मानो उसने संसार की सबसे ऊँची चोटी पहली बार सर कर ली हो। उसके पीछे नारियलों के झुरमुट और सूखी पहाड़ियों की शृंखला दिखाई देती है। सूर्य धीरे-धीरे पानी में डूबता है—पहले सुनहला रंग, फिर लहू जैसा लाल, फिर बैंजनी और अंत में पूरी तरह काला हो जाता है। पीली रेत पर बने अपने अकेले पैरों के निशान देखकर लेखक के मन में एक हल्की सिहरन और उदासी भी घिर आती है।

अंधेरे में लौटने का खतरा

अंधेरा घिरते ही लेखक को लौटकर जाने की चिंता सताने लगती है। दूर सैंड हिल के धुँधले रंग पहचानना कठिन हो जाता है और अनेक टीलों से रास्ता खोजते हुए रेत में भटक जाने का डर लगता है, इसलिए वह रेत पर फिसलते हुए सीधे नीचे समुद्र तट पर उतर जाता है। तट की रंग-बिरंगी, अनोखी रेत उसे मोहित कर लेती है—ऐसे रंग उसने पहले कभी नहीं देखे थे। कुछ रेत हाथों और पैरों से मसलकर देखता है, पर उसे साथ ले जाने का कोई उपाय न होने से उदास मन से आगे बढ़ जाता है। तभी बढ़ता हुआ समुद्र तट को संकरा करने लगता है। एक लहर उसके पैर भिगो देती है और अचानक खतरे का एहसास होते ही वह जूते हाथ में लेकर तेज़ी से दौड़ने लगता है। एक ऊँची लहर से बचते हुए वह सामने की एक चट्टान से टकरा जाता है, बाँहों पर हल्की खरोंच आती है, फिर भी वह किसी तरह चट्टान पर चढ़ जाता है। वहाँ पहुँचकर पता चलता है कि दूसरी ओर खुला और सुरक्षित तट है, जहाँ बहुत-से लोग टहल रहे थे और ऊपर सड़क तक जाने का रास्ता भी बना था—यह देखकर उसका डर दूर हो जाता है और वह हल्के मन से चट्टान से नीचे कूद जाता है।

विवेकानंद चट्टान और सूर्योदय

रात कैप होटल के लॉन में बीतती है, जहाँ दूर क्षितिज पर किसी जहाज़ की मद्धिम रोशनी दिखाई देती है। अगली सुबह लेखक सात अन्य लोगों के साथ एक छोटी मछुआ नाव में बैठकर, जो रबड़ के तीन तनों को जोड़कर बनाई गई थी, ‘विवेकानंद चट्टान’ तक जाता है। ऊँची-ऊँची लहरों और नुकीली चट्टानों के बीच से गुजरते हुए डर के मारे उसकी टाँगें काँप उठती हैं। वहाँ एक ग्रेजुएट नवयुवक लेखक को बताता है कि कन्याकुमारी की आठ हज़ार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक बेरोज़गार हैं, जिनमें से लगभग सौ ग्रेजुएट हैं; उनका मुख्य काम नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना, आपस में दार्शनिक बहस करना और सीपियों का गूदा खाना है। वह नवयुवक स्वयं वहाँ फोटो-एल्बम बेचकर गुज़ारा करता था और यह भी कहता है कि इस चट्टान से उन्हें इतनी प्रेरणा तो मिलती ही है। इसी बीच काली चट्टानों की ओट से सूर्य उदित होता है, पानी और आकाश तरह-तरह के रंगों से झिलमिला उठते हैं। घाट पर बहुत-से लोग उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए इकट्ठे हैं, दो स्थानीय युवतियाँ शंख और मालाएँ बेचने के साथ-साथ दूरबीन से सूर्योदय का दृश्य भी देख रही हैं। मंदिर में पूजा की घंटियाँ बजती हैं और भक्त प्रणाम करते हुए अंदर जाते हैं। कडल-काक पक्षी वहाँ की बेरोज़गारी और सूर्योदय की सुंदरता दोनों से बेखबर आस-पास तैरते रहते हैं। इसी सहज, जीवंत दृश्य के बीच लेखक का ध्यान वापस अपनी बस के समय पर चला जाता है और यात्रा-वृत्तांत यहीं समाप्त हो जाता है।

इस प्रकार ‘आखिरी चट्टान तक’ केवल कन्याकुमारी के भौगोलिक सौंदर्य का वर्णन मात्र नहीं है, बल्कि इसमें प्रकृति की भव्यता, मानव-जीवन की झलक और लेखक के मन में उठने वाले विस्मय, रोमांच, भय और शांति जैसे भावों का गहरा समन्वय भी मिलता है।

We hope that Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक notes in Hindi helped you. If you have any query about Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक notes in Hindi or about any other notes of Class 9 Hindi Notes, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

Category: Class 9 Hindi

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