पाठ – 2
रैखिक बहुपदों का परिचय
In this post we have given the detailed notes of class 9 Math chapter 2 Introduction to Linear Polynomials in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 board exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के गणित के पाठ 2 रैखिक बहुपदों का परिचय के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं गणित विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT — Ganita Manjari (2026-27) |
| Class | Class 9 |
| Subject | Math |
| Chapter no. | Chapter 2 |
| Chapter Name | रैखिक बहुपदों का परिचय (Introduction to Linear Polynomials) |
| Category | Class 9 Math Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
पाठ 2, रैखिक बहुपदों का परिचय
बीजीय व्यंजक: पद, चर और गुणांक
पिछली कक्षाओं में हमने बीजीय व्यंजकों (algebraic expressions) के बारे में पढ़ा है। इस अध्याय में हम बीजीय व्यंजकों के एक विशेष प्रकार का अध्ययन करेंगे, जिसे रैखिक बहुपद (linear polynomial) कहते हैं। सबसे पहले कुछ उदाहरणों से बीजीय व्यंजक को समझते हैं।
उदाहरण 1 — पेन और पेंसिल का उदाहरण
राजू एक दुकान पर गया जहाँ लाल बक्सों में 4 पेन तथा नीले बक्सों में 5 पेंसिलें रखी थीं। यदि राजू x लाल बक्से और y नीले बक्से खरीदता है और उसे 3 अतिरिक्त पेन मुफ्त मिलते हैं, तो पेन-पेंसिल की कुल संख्या दर्शाने वाला व्यंजक होगा:
4x + 5y + 3
यहाँ 4x, 5y और 3 व्यंजक के पद (terms) हैं; x और y चर (variables) हैं; संख्याएँ 4 और 5 क्रमशः x तथा y के गुणांक (coefficients) हैं; और 3 एक अचर (constant) है।
उदाहरण 2 — बाग की बाड़ का उदाहरण
l मीटर लंबाई और w मीटर चौड़ाई वाले एक आयताकार बाग में तार की बाड़ ₹100 प्रति मीटर (लंबाई में), लकड़ी की बाड़ ₹80 प्रति मीटर (चौड़ाई में) और बीज बोने का खर्च ₹50 प्रति वर्ग मीटर है। तब:
- लंबाई पर तार की बाड़ की लागत = 2l × 100 = ₹200l
- चौड़ाई पर लकड़ी की बाड़ की लागत = 2w × 80 = ₹160w
- बीज बोने की लागत = 50 × l × w = ₹50lw
अतः कुल लागत का व्यंजक = 200l + 160w + 50lw है। ध्यान दीजिए, इस व्यंजक में दो चर (l और w) हैं।
उदाहरण 3 — तार से आयत बनाना
20 सेमी लंबे तार को मोड़कर आयत बनाया जाता है। यदि आयत की लंबाई x सेमी है, तो चौड़ाई (10 – x) सेमी होगी। अतः क्षेत्रफल का व्यंजक होगा:
x(10 – x) = 10x – x2
यह व्यंजक केवल एक चर x में है, जबकि उदाहरण 1 और 2 के व्यंजकों में दो-दो चर (x, y तथा l, w) थे। इस अध्याय में हम केवल एक चर वाले बीजीय व्यंजकों तक ही अपनी चर्चा सीमित रखेंगे।
बहुपद (Polynomial) और उसकी घात
4x, x2 + 1, 2y – 5, 5y3 + y2 + 2y – 1, 3z + 7 जैसे व्यंजक ऐसे बीजीय व्यंजक हैं जिनमें केवल एक चर (x, y या z) होता है। ऐसे व्यंजकों को एकचरीय बहुपद (univariate polynomial) या सीधे बहुपद (polynomial) कहा जाता है।
घात (Degree): किसी बहुपद में चर की सबसे अधिक (उच्चतम) घात को उस बहुपद की घात कहते हैं। उदाहरण के लिए व्यंजक 5y3 + y2 + 2y – 1 में y3 का गुणांक 5, y2 का गुणांक 1, y का गुणांक 2 तथा अचर पद –1 है, और इसकी घात 3 है।
बहुपदों के प्रकार (घात के आधार पर)
| बहुपद | घात | प्रकार |
| 5y3 + y2 + 2y – 1 | 3 | त्रिघाती बहुपद (Cubic polynomial) |
| x2 + 5x + 1 | 2 | द्विघाती बहुपद (Quadratic polynomial) |
| 3z + 7 | 1 | रैखिक बहुपद (Linear polynomial) |
| अचर 8 (अर्थात 8x0) | 0 | अचर बहुपद (Constant polynomial) |
इस प्रकार, जिस बहुपद की घात 1 होती है, उसे रैखिक बहुपद कहते हैं। इस अध्याय में हम रैखिक बहुपदों का ही विस्तार से अध्ययन करेंगे।
रैखिक बहुपद (Linear Polynomial)
उदाहरण 4 — वर्ग का परिमाप
भुजा x वाले वर्ग का परिमाप 4x होता है, जो चर x का एक रैखिक बहुपद है।
उदाहरण 5 — शतरंज क्लब का शुल्क
एक शतरंज क्लब ₹200 प्रवेश शुल्क तथा खेले गए प्रत्येक मैच के लिए ₹50 अतिरिक्त लेता है। यदि m मैच खेले जाएँ तो कुल शुल्क = ₹(200 + 50m) होगा। यह चर m का रैखिक बहुपद है। यहाँ प्रत्येक अतिरिक्त मैच पर राशि में स्थिर (अचर) मान ₹50 की वृद्धि होती है — यही रैखिक बहुपदों की एक विशेष पहचान है: क्रमिक मानों के बीच का अंतर अचर होता है। ऐसे प्रतिरूपों को रैखिक प्रतिरूप (linear pattern) कहा जाता है।
रैखिक समीकरण (Linear Equation)
जब किसी रैखिक बहुपद को एक अचर के बराबर रखा (समीकृत किया) जाता है, तो हमें रैखिक समीकरण प्राप्त होता है।
उदाहरण 6: दो संख्याओं का योग 64 है और एक संख्या दूसरी से 10 अधिक है। दोनों संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल: मान लीजिए छोटी संख्या x है, तब बड़ी संख्या x + 10 होगी। चूँकि योग 64 है:
x + (x + 10) = 64 ⟹ 2x + 10 = 64
यहाँ 2x + 10 एक रैखिक बहुपद है। इसे 64 के बराबर रखने पर 2x = 54, अर्थात x = 27 प्राप्त होता है। अतः दोनों संख्याएँ 27 और 37 हैं।
बहुपद: आगत-निर्गत (इनपुट-आउटपुट) प्रक्रिया के रूप में
बहुपदों को आगत-निर्गत (input-output) मशीन के रूप में भी समझा जा सकता है। रैखिक बहुपद 2x + 3 में हर x के लिए एक संगत मान प्राप्त होता है:
- यदि x = 4, तो 2 × 4 + 3 = 11
- यदि x = –6, तो 2 × (–6) + 3 = –9
इस प्रक्रिया को फलन (function) कहा जाता है, जहाँ व्यंजक 2x + 3, चर x का एक फलन है। ध्यान दीजिए कि 2x + 3 एक रैखिक फलन है जबकि 10x – x2 (उदाहरण 3 का क्षेत्रफल व्यंजक) एक द्विघाती फलन है, क्योंकि इसमें x की उच्चतम घात 2 है।
रैखिक प्रतिरूपों का अन्वेषण
वर्गाकार टाइलों के एक बढ़ते हुए प्रतिरूप पर विचार करें, जिसमें हर चरण में पिछले चरण की तुलना में 2 टाइलें अधिक जोड़ी जाती हैं:
| चरण | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| टाइलों की संख्या | 1 | 3 | 5 | 7 | 9 | 11 | 13 |
हर चरण में टाइलों की संख्या, चरण संख्या के दोगुने से एक कम है — अर्थात nवें चरण में टाइलों की संख्या 2n – 1 से दी जाती है। बहुपद 2n – 1 की घात 1 है, इसलिए यह एक रैखिक बहुपद है। इस अनुक्रम (1, 3, 5, 7, 9…) में क्रमागत पदों के बीच का अंतर अचर मान 2 है — अतः चरण-संख्या और टाइलों की संख्या के बीच का संबंध एक रैखिक संबंध है।
उदाहरण 7 — बेला की जेब खर्च
बेला के पास ₹100 हैं और वह प्रतिदिन ₹5 खर्च करती है। nवें दिन शेष राशि = ₹(100 – 5n)। 12वें दिन शेष राशि = 100 – 12 × 5 = ₹40।
उदाहरण 8 — ऑटो-रिक्शा का किराया
ऑटो का किराया ₹25 से शुरू होता है और प्रारंभिक 2 किमी तक वही रहता है; उसके बाद ₹15 प्रति किमी बढ़ता है। n किमी (जब n ≥ 2) के लिए कुल किराया:
₹25 + 15 × (n – 2) = 15n – 5
अतः 10 किमी के लिए किराया = 25 + 15 × 8 = ₹145।
रैखिक प्रतिरूप (Linear Pattern): संख्याओं का वह अनुक्रम जिसमें दो क्रमागत पदों के बीच का अंतर अचर (constant) होता है, रैखिक प्रतिरूप कहलाता है।
रैखिक वृद्धि और रैखिक ह्रास
रैखिक व्यंजक ऐसी परिस्थितियों को दर्शाने में सहायक होते हैं जहाँ किसी राशि में समान अंतरालों पर स्थिर मात्रा में वृद्धि या कमी होती है।
उदाहरण 9 — यात्रा का व्यय (रैखिक वृद्धि)
किसी यात्रा का व्यय रैखिक फलन C(d) = 100 + 60d से दिया जाता है, जहाँ C कुल व्यय (₹) और d दूरी (किमी) है।
| दूरी d (किमी) | 0 | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| व्यय C (₹) | 100 | 160 | 220 | 280 | 340 | 400 |
यहाँ d में 1 किमी की वृद्धि होने पर व्यय C में सदैव ₹60 की स्थिर वृद्धि होती है — यही रैखिक वृद्धि (linear growth) का उदाहरण है।
उदाहरण 10 — टंकी में पानी की ऊँचाई (रैखिक ह्रास)
ग्रीष्म ऋतु के आरंभ में बेलनाकार टंकी में पानी की ऊँचाई 3 मी है। t महीनों बाद ऊँचाई h(t) = 3 – 0.5t से दी जाती है।
| महीना t | 0 | 1 | 2 | 3 | 4 |
| ऊँचाई h (मी.) | 3 | 2.5 | 2 | 1.5 | 1 |
यहाँ t में 1 महीने की वृद्धि होने पर h में स्थिर मात्रा 0.5 की कमी होती है — यही रैखिक ह्रास (linear decay) का उदाहरण है।
रैखिक वृद्धि: जब कोई राशि समान अंतरालों पर स्थिर मात्रा में बढ़ती है।
रैखिक ह्रास: जब कोई राशि समान अंतरालों पर स्थिर मात्रा में घटती है।
रैखिक संबंध (Linear Relationship)
दो चरों x और y के बीच के रैखिक संबंध को y = ax + b के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। पहले देखी गई वर्गाकार टाइलों के प्रतिरूप में, यदि x चरण-संख्या और y टाइलों की संख्या हो, तो संबंध होगा: y = 2x – 1।
उदाहरण 11 — a और b के मान ज्ञात करना
एक टेलीकॉम कंपनी एक निश्चित मासिक शुल्क तथा प्रति GB डेटा पर अतिरिक्त शुल्क लेती है। 10 GB पर बिल ₹350 और 20 GB पर बिल ₹550 है। यदि y = ax + b हो, तो a और b ज्ञात कीजिए।
हल: x = 10 पर y = 350, और x = 20 पर y = 550। इन्हें y = ax + b में रखने पर:
350 = 10a + b … (i)
550 = 20a + b … (ii)
समीकरण (i) से b = 350 – 10a। इसे (ii) में रखने पर:
550 = 20a + (350 – 10a) ⟹ 550 = 10a + 350 ⟹ 10a = 200 ⟹ a = 20
अतः b = 350 – 10(20) = 350 – 200 = b = 150
अतः रैखिक संबंध है: y = 20x + 150, जहाँ y बिल राशि (₹) और x उपयोग किए गए GB डेटा की मात्रा है। (यहाँ 20 प्रति GB शुल्क तथा 150 निश्चित मासिक शुल्क को दर्शाता है।)
रैखिक संबंधों का दृश्यांकन (आलेख/ग्राफ)
किसी रैखिक समीकरण y = ax + b को आलेख पत्रक पर एक सरल रेखा के रूप में दर्शाया जा सकता है। रेखा खींचने के लिए केवल दो बिंदु पर्याप्त हैं।
उदाहरण: y = 2x + 1 के लिए — जब x = 0, y = 1, अतः बिंदु A(0, 1); जब x = 3, y = 7, अतः बिंदु B(3, 7)। इन दोनों बिंदुओं को मिलाकर तथा रेखा को दोनों दिशाओं में बढ़ाकर हमें रेखा y = 2x + 1 प्राप्त होती है। यदि कोई बिंदु किसी रेखा पर स्थित है, तो उसके निर्देशांक अवश्य ही उस रेखा के समीकरण को संतुष्ट करेंगे — जैसे बिंदु (7, 15), x = 7 व y = 15 को समीकरण में रखने पर संतुष्ट होता है, इसलिए यह रेखा y = 2x + 1 पर स्थित है।
उदाहरण 12 और 13 — बिंदुओं से समीकरण का अनुमान
बिंदु (–1, –3), (0, 0), (1, 3), (3, 9), (4, 12) एक सरल रेखा पर स्थित हैं। प्रत्येक बिंदु में y-निर्देशांक, x-निर्देशांक का तीन गुना है, इसलिए इस रेखा का समीकरण y = 3x है।
इसी प्रकार बिंदु (–3, 6), (–2, 4), (0, 0), (1, –2), (2, –4), (3, –6) भी एक सरल रेखा पर स्थित हैं, जिसका समीकरण y = –2x है (यहाँ y सदैव x का –2 गुना है)।
ढलान (Slope) की अवधारणा
y = ax के रूप की सभी रेखाएँ सदैव मूलबिंदु (0, 0) से होकर गुजरती हैं। रेखा y = x से इसकी तुलना करने पर:
- जब a > 1 हो, रेखा y = x से अधिक तीव्र ढलान (steeper) वाली होती है।
- जब a < 1 हो, रेखा y = x से कम ढलान वाली होती है।
यहाँ a को रेखा y = ax का ढलान (slope) कहा जाता है। ढलान वास्तव में क्रमागत पदों के बीच के अचर अंतर को दर्शाता है — जैसे y = 2x – 1 (टाइलों के प्रतिरूप का समीकरण) का ढलान 2 है, और अनुक्रम 1, 3, 5, 7… में क्रमागत पदों का अंतर भी 2 ही है।
y = –ax (जहाँ a > 0) के रूप की रेखाएँ भी मूलबिंदु से गुजरती हैं, परंतु इनका ढलान ऋणात्मक होता है, अतः ये रेखाएँ नीचे की ओर झुकी होती हैं।
महत्वपूर्ण निष्कर्ष:
- रैखिक वृद्धि को धनात्मक ढलान वाली सरल रेखा से दर्शाया जाता है।
- रैखिक ह्रास को ऋणात्मक ढलान वाली सरल रेखा से दर्शाया जाता है।
y-अंतःखंड (y-intercept)
उदाहरण 16: रेखाओं y = x + 3, y = 2x + 5 और y = 3x – 2 के आलेखों में देखा गया कि:
- y = 2x + 5, y-अक्ष को बिंदु A(0, 5) पर काटती है
- y = x + 3, y-अक्ष को बिंदु B(0, 3) पर काटती है
- y = 3x – 2, y-अक्ष को बिंदु C(0, –2) पर काटती है
इससे पता चलता है कि y = ax + b के रूप की कोई भी सरल रेखा सदैव y-अक्ष को बिंदु (0, b) पर काटती है। लंबाई b को उस रेखा का y-अंतःखंड (y-intercept) कहते हैं। जैसे y = x + 3 का y-अंतःखंड 3 है (रेखा मूलबिंदु से धनात्मक दिशा में 3 इकाई पर y-अक्ष को काटती है), जबकि y = 3x – 2 का y-अंतःखंड –2 है (रेखा मूलबिंदु से ऋणात्मक दिशा में 2 इकाई पर y-अक्ष को काटती है)।
y = ax + b में a तथा b की भूमिका — मुख्य निष्कर्ष
| स्थिति | निष्कर्ष |
| y = ax + b में a | रेखा का ढलान (slope) दर्शाता है |
| y = ax + b में b | रेखा का y-अंतःखंड (y-intercept) दर्शाता है |
| b स्थिर रखकर a बदलने पर | ढलान बदलता है, y-अंतःखंड स्थिर रहता है |
| a स्थिर रखकर b बदलने पर | रेखा अपने स्थान से खिसकती है परंतु मूल रेखा के समांतर (parallel) रहती है |
अतः जिन रेखाओं का ढलान समान हो परंतु y-अंतःखंड भिन्न-भिन्न हों, वे परस्पर समांतर रेखाएँ (parallel lines) होती हैं। जब b = 0 होता है, तब समीकरण y = ax बन जाता है और रेखा मूलबिंदु से होकर गुजरती है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (एक नज़र में)
बीजीय व्यंजक (Algebraic expression): संख्याओं, चरों और संक्रिया चिह्नों को मिलाकर बना व्यंजक।
पद (Term): व्यंजक के वे भाग जो + या – चिह्न से अलग किए जाते हैं।
चर (Variable): वह अक्षर-संख्या जिसका मान बदलता रहता है (जैसे x, y, z)।
गुणांक (Coefficient): चर के साथ गुणा की गई संख्या।
अचर पद (Constant term): बिना चर वाला स्थिर पद।
एकचरीय बहुपद (Univariate polynomial): केवल एक चर वाला बीजीय व्यंजक।
घात (Degree): बहुपद में चर की उच्चतम घात।
रैखिक बहुपद (Linear polynomial): घात 1 वाला बहुपद (जैसे 3z + 7)।
द्विघाती बहुपद (Quadratic polynomial): घात 2 वाला बहुपद।
त्रिघाती बहुपद (Cubic polynomial): घात 3 वाला बहुपद।
अचर बहुपद (Constant polynomial): घात 0 वाला बहुपद (केवल एक अचर संख्या)।
रैखिक समीकरण (Linear equation): जब रैखिक बहुपद को किसी अचर के बराबर रखा जाता है।
फलन (Function): वह प्रक्रिया जिसमें प्रत्येक आगत (input) मान के लिए एक निश्चित निर्गत (output) मान प्राप्त होता है।
रैखिक प्रतिरूप (Linear pattern): संख्याओं का ऐसा अनुक्रम जिसमें क्रमागत पदों के बीच अंतर अचर हो।
रैखिक वृद्धि (Linear growth): समान अंतरालों पर राशि में स्थिर वृद्धि।
रैखिक ह्रास (Linear decay): समान अंतरालों पर राशि में स्थिर कमी।
रैखिक संबंध (Linear relationship): दो चरों x, y के बीच y = ax + b के रूप का संबंध।
ढलान (Slope): y = ax + b में a — रेखा की तीव्रता (झुकाव) दर्शाता है।
y-अंतःखंड (y-intercept): y = ax + b में b — जिस बिंदु (0, b) पर रेखा y-अक्ष को काटती है।
समांतर रेखाएँ (Parallel lines): समान ढलान परंतु भिन्न y-अंतःखंड वाली रेखाएँ।
पाठ का सारांश
- बीजीय व्यंजक में संख्याएँ, चर और संक्रिया चिह्न होते हैं। जैसे 2x2 + 5xy – 3y2 में 2x2, 5xy, –3y2 पद हैं तथा 2, 5, –3 गुणांक हैं।
- एकचरीय बहुपदों में चर की उच्चतम घात ही उनकी घात कहलाती है। जैसे x2 + 5x + 3 की घात 2, जबकि 3y3 – 4y2 + 5 की घात 3 है।
- घात 1 वाला बहुपद रैखिक बहुपद कहलाता है — जैसे 2x + 3 तथा 5 – 4y।
- रैखिक वृद्धि में राशि समान अंतरालों पर स्थिर मात्रा में बढ़ती है; रैखिक ह्रास में राशि समान अंतरालों पर स्थिर मात्रा में घटती है।
- रैखिक प्रतिरूप वह अनुक्रम है जिसमें क्रमागत पदों के बीच अंतर अचर होता है।
- दो चरों x, y के बीच रैखिक संबंध सरल रेखा y = ax + b से दर्शाया जाता है। यहाँ a रेखा का ढलान है और b, y-अंतःखंड है (मूलबिंदु से उस बिंदु की दूरी जहाँ रेखा y-अक्ष को काटती है)। जब b = 0, तब रेखा y = ax बनती है और मूलबिंदु से होकर गुजरती है।
- रैखिक वृद्धि धनात्मक ढलान वाली रेखा से तथा रैखिक ह्रास ऋणात्मक ढलान वाली रेखा से दर्शाई जाती है।
- समांतर रेखाएँ y = ax + b के रूप की होती हैं, जिनमें ढलान a स्थिर रहता है जबकि y-अंतःखंड b बदलता रहता है।
We hope that class 9 Math Chapter 2 रैखिक बहुपदों का परिचय (Introduction to Linear Polynomials) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 9 Math Chapter 2 रैखिक बहुपदों का परिचय (Introduction to Linear Polynomials) Notes in Hindi or about any other Notes of class 9 Math in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

