Skip to content
Criss Cross ClassesCriss Cross ClassesOur Content is Our Power
Menu
  • Home
  • CBSE
    • Hindi Medium
      • Class 9
      • Class 10
      • Class 11
      • Class 12
    • English Medium
      • Class 9
      • Class 10
      • Class 11
      • Class 12
  • State Board
    • UP Board (UPMSP)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Bihar Board (BSEB)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Chhattisgarh Board (CGBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Haryana Board (HBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Jharkhand Board (JAC)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Uttarakhand Board (UBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Madhya Pradesh Board (MPBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Punjab Board (PSEB)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Rajasthan Board (RBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
  • Contact us
  • About us
Menu

जल संसाधन Notes || Class 10 Social Science Geography Chapter 3 in Hindi ||

Posted on August 17, 2026 by

पाठ – 3

जल संसाधन

In this post we have given the detailed notes of class 10 Social Science (Geography) chapter 3 Water Resources in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 board exams.

इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (भूगोल) के पाठ 3 जल संसाधन के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है।

BoardCBSE Board, JAC Board, RBSE Board, MPBSE Board, UBSE Board
TextbookNCERT — Contemporary India-II (Reprint 2026-27)
ClassClass 10
SubjectSocial Science (Geography)
Chapter no.Chapter 3
Chapter Nameजल संसाधन (Water Resources)
CategoryClass 10 SST Notes in Hindi
MediumHindi
Class 10 Social Science Chapter 3 जल संसाधन Notes in Hindi
Explore the topics
पाठ – 3
जल संसाधन
पाठ 3, जल संसाधन
जल — एक महत्वपूर्ण संसाधन
जल संकट और जल संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता
जल संसाधनों का असमान वितरण
जल की गुणवत्ता में गिरावट
जल संकट के कारण
बढ़ती जनसंख्या
कृषि की बढ़ती माँग
औद्योगीकरण
शहरीकरण
भूमिगत जल का अति-दोहन
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ एवं समेकित जल संसाधन प्रबंधन
बाँध का अर्थ एवं प्रकार
नदी घाटी परियोजनाएँ “बहुउद्देशीय” क्यों कहलाती हैं?
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के उदाहरण
बाँधों के लाभ एवं विवाद
बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ
बाँधों से जुड़े पारिस्थितिक, सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दे
नर्मदा बचाओ आंदोलन
अवसादन एवं जल-धारण क्षमता में कमी
वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting)
परंपरागत वर्षा जल संग्रहण प्रणालियाँ
जल संरक्षण की आधुनिक विधियाँ
मुख्य बिंदु (Key Points to Remember)

पाठ 3, जल संसाधन

जल — एक महत्वपूर्ण संसाधन

जल एक महत्वपूर्ण एवं नवीकरणीय (renewable) प्राकृतिक संसाधन है, जो जीवन, कृषि, उद्योग तथा परिवहन सहित अनेक मानवीय गतिविधियों के लिए आवश्यक है। पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई भाग जल से ढका हुआ है, परन्तु इसका बहुत छोटा भाग ही उपयोग करने योग्य स्वच्छ जल (fresh water) है।

  • विश्व के कुल जल का 97.5% भाग खारा जल (महासागरीय जल) है और केवल 2.5% भाग ही स्वच्छ जल है।
  • इस स्वच्छ जल का लगभग 70% भाग अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड तथा पर्वतीय क्षेत्रों में हिमचादरों (ice sheets) एवं हिमनदों (glaciers) के रूप में जमा है।
  • शेष जल भूमिगत जल, मिट्टी की नमी, वायुमंडल तथा स्वच्छ जल की झीलों एवं नदियों के रूप में उपलब्ध है।
  • भारत के पास विश्व के जल संसाधनों का लगभग 4% भाग है, जबकि यहाँ विश्व की लगभग 16-17% जनसंख्या निवास करती है, जिससे प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता तुलनात्मक रूप से कम है।

जल संकट और जल संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता

प्रायः यह माना जाता है कि जल संकट केवल कम वर्षा या सूखाग्रस्त क्षेत्रों की समस्या है, परन्तु वास्तव में अधिकांश मामलों में जल संकट का संबंध जल की वास्तविक कमी से न होकर उसकी उपलब्धता, गुणवत्ता तथा प्रबंधन से होता है।

जल संसाधनों का असमान वितरण

  • भारत में जल संसाधन स्थान के अनुसार असमान रूप से वितरित हैं — कुछ क्षेत्र (जैसे पूर्वोत्तर राज्य) जल-प्रचुर हैं, जबकि कुछ क्षेत्र (जैसे राजस्थान) जल की कमी वाले हैं।
  • पर्याप्त वर्षा या नदी जल वाले क्षेत्रों में भी मौसमी विविधता, अपर्याप्त भंडारण एवं असमान वितरण के कारण जल की कमी हो सकती है।

जल की गुणवत्ता में गिरावट

  • अवांछित एवं हानिकारक पदार्थों के मिल जाने से जल की गुणवत्ता में गिरावट आई है, जिससे यह उपयोग के लिए हानिकारक हो जाता है।
  • प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं — घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि क्षेत्रों से रासायनिक व उर्वरक अपवाह, तथा नदियों व झीलों में अनुपचारित मल-जल (sewage) का बहाव।
  • जल-प्रचुर क्षेत्र भी जल संकट का सामना कर सकते हैं, यदि वहाँ उपलब्ध जल उपयोग योग्य न हो।

जल संकट के कारण

बढ़ती जनसंख्या

भारत की जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे पीने, खाना बनाने तथा स्वच्छता के लिए जल की माँग बढ़ी है। अधिक जनसंख्या का अर्थ है अधिक खाद्यान्न उत्पादन की आवश्यकता, जिससे जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

कृषि की बढ़ती माँग

  • बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान्न आवश्यकता पूरी करने तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचित क्षेत्र के विस्तार एवं अधिक जल-गहन फसलों की खेती हेतु जल संसाधनों का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है।
  • बहु-फसलीकरण (multiple cropping) तथा गन्ना व धान जैसी अधिक जल माँगने वाली फसलों की खेती से जल संसाधनों पर दबाव और बढ़ गया है।
  • अधिकांश किसान सिंचाई के लिए ट्यूबवेल तथा पंप सेटों के माध्यम से भूमिगत जल का उपयोग करते हैं, जिससे भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।

औद्योगीकरण

  • स्वतंत्रता के बाद बढ़ते उद्योगों ने स्वच्छ जल संसाधनों पर दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है।
  • उद्योगों को ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और अधिकांश जल-विद्युत तथा तापीय ऊर्जा संयंत्रों को भी बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।
  • उद्योग भूमिगत जल का भी अत्यधिक उपयोग करते हैं तथा अपशिष्ट जल के निष्कासन द्वारा जल के सबसे बड़े प्रदूषकों में से एक हैं।

शहरीकरण

  • बढ़ते हुए घने शहरी केंद्रों तथा शहरी जीवन-शैली ने जल संकट की समस्या को और अधिक बढ़ाया है।
  • शहरी जनसंख्या, उद्योग तथा कृषि की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु जल संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण भूजल स्तर में गिरावट आई है।

भूमिगत जल का अति-दोहन

  • शहरों में आवासीय सोसाइटियों तथा कॉलोनियों के पास अपनी जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने स्वयं के भूजल पंपिंग उपकरण होते हैं, जिससे भूजल स्तर गिरता जा रहा है।
  • इसका जल की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और कई स्थानों पर भूजल की गुणवत्ता में भी गिरावट आई है।

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ एवं समेकित जल संसाधन प्रबंधन

बाँध का अर्थ एवं प्रकार

बाँध बहते हुए जल के आर-पार बनाई गई एक रुकावट (barrier) है, जो जल के प्रवाह को रोकती, दिशा देती या धीमा करती है, तथा प्रायः एक जलाशय, झील अथवा संग्रहण क्षेत्र बनाती है। बाँधों को उनकी संरचना, ऊँचाई तथा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

  • ऊँचाई के आधार पर बाँधों को बड़े, मध्यम तथा छोटे बाँधों में वर्गीकृत किया जाता है।
  • परंपरागत रूप से बाँधों का निर्माण नदियों तथा वर्षा जल को संचित करने के लिए किया जाता था, ताकि बाद में कृषि सिंचाई हेतु इसका उपयोग किया जा सके।
  • आज बाँधों का निर्माण केवल सिंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि अनेक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

नदी घाटी परियोजनाएँ “बहुउद्देशीय” क्यों कहलाती हैं?

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को इसलिए ऐसा कहा जाता है क्योंकि इनकी योजना एवं निर्माण एक साथ कई उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है।

  • सिंचाई — खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने हेतु कृषि के लिए जल उपलब्ध कराना।
  • विद्युत उत्पादन — जल-विद्युत ऊर्जा का उत्पादन।
  • जल आपूर्ति — घरेलू तथा औद्योगिक उपयोग के लिए।
  • बाढ़ नियंत्रण — नदी जल के प्रवाह को नियमित कर बाढ़ से होने वाली क्षति को कम करना।
  • मनोरंजन — जलाशयों का पर्यटन एवं मनोरंजन गतिविधियों के लिए उपयोग।
  • अंतर्देशीय जल परिवहन — जलाशयों का उपयोग अंतर्देशीय नौवहन के विकास के लिए किया जाता है।
  • मत्स्य पालन — जलाशय मछलियों के प्रजनन में भी सहायक होते हैं।

इसीलिए नदी घाटी परियोजनाओं को “बहुउद्देशीय परियोजनाएँ” भी कहा जाता है, क्योंकि ये एक साथ अनेक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाई जाती हैं। जवाहरलाल नेहरू ने बाँधों को “आधुनिक भारत के मंदिर” कहा था, क्योंकि उनका मानना था कि ये कृषि व ग्राम अर्थव्यवस्था के विकास को तीव्र औद्योगीकरण तथा शहरी अर्थव्यवस्था के विकास के साथ जोड़ेंगे।

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के उदाहरण

  • भाखड़ा नांगल परियोजना — हिमाचल प्रदेश/पंजाब में सतलुज नदी पर निर्मित; भारत के सबसे ऊँचे बाँधों में से एक, जो पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान को सिंचाई, बिजली एवं पेयजल उपलब्ध कराती है।
  • हीराकुड परियोजना — ओडिशा में महानदी पर निर्मित; विश्व के सबसे लंबे बाँधों में से एक, जिसका उपयोग सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण एवं विद्युत उत्पादन के लिए होता है।
  • दामोदर घाटी परियोजना — झारखंड-पश्चिम बंगाल में दामोदर नदी पर निर्मित, अमेरिका की टेनेसी घाटी प्राधिकरण (TVA) के आधार पर बनाई गई; यह सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण तथा विद्युत उत्पादन प्रदान करती है।
  • नागार्जुन सागर बाँध — आंध्र प्रदेश/तेलंगाना में कृष्णा नदी पर निर्मित; विश्व के सबसे बड़े चिनाई (masonry) बाँधों में से एक, जिसका उपयोग सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन के लिए होता है।
  • टिहरी बाँध — उत्तराखंड में भागीरथी नदी पर निर्मित; भारत के सबसे ऊँचे बाँधों में से एक, जो सिंचाई, विद्युत उत्पादन तथा जल आपूर्ति के लिए उपयोग होता है।
  • सरदार सरोवर बाँध — नर्मदा नदी पर निर्मित, जो गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा राजस्थान में फैला है; सिंचाई, विद्युत उत्पादन तथा पेयजल आपूर्ति के लिए उपयोग होता है, और यह भारत की सबसे विवादास्पद बाँध परियोजनाओं में से एक भी है।

बाँधों के लाभ एवं विवाद

बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ

  • ये कृषि क्षेत्रों की सिंचाई में सहायक होती हैं, जिससे खाद्यान्न उत्पादन बढ़ता है।
  • उद्योगों तथा घरों के लिए जल-विद्युत उत्पन्न करती हैं।
  • घरेलू तथा औद्योगिक जल आपूर्ति उपलब्ध कराती हैं।
  • जल के प्रवाह को नियमित कर बाढ़ नियंत्रण में सहायक होती हैं।
  • मत्स्य प्रजनन, मनोरंजन तथा अंतर्देशीय नौवहन को बढ़ावा देती हैं।

बाँधों से जुड़े पारिस्थितिक, सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दे

पिछले कुछ दशकों में बहुउद्देशीय परियोजनाओं तथा बड़े बाँधों की कई कारणों से कड़ी आलोचना एवं विरोध हुआ है।

  • नदी प्रवाह में परिवर्तन — बाँध नदियों को खंडित करते हैं, जिससे जल के प्राकृतिक प्रवाह में परिवर्तन होता है, निचले क्षेत्रों (downstream) में अवसाद (sediment) का प्रवाह कम हो जाता है तथा जलाशय में अत्यधिक अवसादन होता है, जिससे नदी तल पथरीला हो जाता है और निचले क्षेत्रों में आवास (habitat) की गुणवत्ता घट जाती है।
  • जलीय जीवन पर प्रभाव — बाँध के नीचे जल के प्रवाह में कमी से प्राकृतिक जलीय वनस्पति व जीव-जंतु प्रभावित होते हैं तथा जलीय जीवों के प्रवास, विशेषकर प्रजनन (spawning) के समय, में बाधा उत्पन्न होती है।
  • जलमग्नता एवं वनोन्मूलन — बड़े बाँधों के निर्माण से विशाल वन एवं कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है, जिससे वनस्पति व जैव विविधता की हानि होती है।
  • विस्थापन — बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए भी बनाए जाते हैं, परंतु अधिक संख्या में बाँधों के निर्माण से जलाशयों में अवसादन के कारण बाढ़ की स्थिति और भी बिगड़ी है; इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इनसे प्रायः स्थानीय समुदाय, जिनकी आजीविका इन पारिस्थितिकी तंत्रों पर निर्भर होती है, बिना पर्याप्त मुआवजे या पुनर्वास के विस्थापित हो जाते हैं।
  • पुनर्वास की समस्याएँ — बाँध निर्माण से विस्थापित स्थानीय लोग, विशेषकर आदिवासी समुदाय, प्रायः पूर्ण मुआवजा या उचित पुनर्वास प्राप्त नहीं कर पाते, तथा अपनी भूमि, वन एवं परंपरागत आजीविका से वंचित हो जाते हैं।
  • भूकंपीय गतिविधि — जलाशयों में संचित जल के भारी दबाव के कारण कुछ मामलों में आस-पास के क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधि (reservoir-induced seismicity) में वृद्धि देखी गई है।
  • अंतर-राज्यीय जल विवाद — समेकित जल संसाधन प्रबंधन के उद्देश्य से बनाई गई बहुउद्देशीय परियोजनाएँ प्रायः जल-बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद उत्पन्न करती हैं।
  • आर्थिक व्यवहार्यता — कई बहुउद्देशीय परियोजनाओं की इसलिए भी आलोचना हुई है क्योंकि निर्माण में भारी निवेश तथा पर्याप्त प्रतिकारी वनरोपण (compensatory afforestation) के बिना वनों की हानि के कारण लागत प्रायः लाभ से अधिक हो जाती है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन

नर्मदा नदी पर बना सरदार सरोवर बाँध देश की सबसे अधिक विवादित बाँध परियोजनाओं में से एक रहा है। नर्मदा बचाओ आंदोलन आदिवासी लोगों, किसानों, पर्यावरणविदों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का एक सामाजिक आंदोलन है, जिसने इस बाँध का विरोध किया — स्थानीय समुदायों के भारी विस्थापन तथा वनों व कृषि भूमि के बड़े पैमाने पर जलमग्न होने के विरुद्ध आवाज़ उठाई, तथा प्रभावित लोगों के उचित पुनर्वास की माँग की।

अवसादन एवं जल-धारण क्षमता में कमी

  • जो अवसाद अन्यथा नदी के प्रवाह के साथ बहकर निचले क्षेत्रों (flood plains) की मिट्टी को उपजाऊ बनाता, वह जलाशय में ही जमा हो जाता है, जिससे समय के साथ जलाशय की जल-धारण क्षमता कम होती जाती है।
  • इससे जलाशय की भंडारण क्षमता तथा सिंचाई व विद्युत उत्पादन हेतु दीर्घकालिक उपयोगिता कम हो जाती है।
  • निचले क्षेत्रों में अवसाद प्रवाह की कमी से नदी के किनारों का कटाव भी बढ़ जाता है, क्योंकि नदी अपने ही किनारों व तल को काटकर इसकी भरपाई करने का प्रयास करती है।

वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting)

वर्षा जल संग्रहण भविष्य में उपयोग के लिए वर्षा जल को एकत्रित तथा संचित करने की एक परंपरागत एवं प्रभावी तकनीक है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ वर्षा कम या अनियमित होती है। यह भूजल पुनर्भरण (recharge) में भी सहायक है तथा बड़े बाँधों की तुलना में एक विकेंद्रीकृत एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है।

परंपरागत वर्षा जल संग्रहण प्रणालियाँ

  • पश्चिमी हिमालय के गुल एवं कुल — पहाड़ी ढलानों पर बनाई गई जल-वाहिकाएँ (diversion channels), जो हिमनद व धारा के जल को कृषि क्षेत्रों तक ले जाती हैं; यह हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी प्रयोग की जाने वाली परंपरागत विधि है।
  • राजस्थान में छत वर्षा जल संग्रहण — राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों, विशेषकर बीकानेर, फलौदी तथा बाड़मेर में, लगभग हर घर में परंपरागत रूप से घर या आँगन के पास भूमिगत कक्ष बनाए जाते हैं, जिनमें छत से एकत्रित वर्षा जल संचित किया जाता है।
  • शिलांग में छत वर्षा जल संग्रहण — मेघालय, विश्व के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में से एक होने के बावजूद, पेयजल की गंभीर कमी का सामना करता है; शिलांग शहर के लगभग हर घर में जल आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु छत वर्षा जल संग्रहण किया जाता है।
  • राजस्थान में टांके (Tankas) — वर्षा जल संग्रहण हेतु बनाए गए भूमिगत टैंक, जो परंपरागत रूप से बीकानेर, फलौदी तथा बाड़मेर के घरों में पाए जाते हैं; इनका उपयोग विशेषकर गर्मियों में पेयजल के लिए किया जाता है।
  • शुष्क क्षेत्रों में खादीन एवं जोहड़ — पश्चिमी राजस्थान में “खादीन” प्रणाली तथा राजस्थान के अन्य भागों में “जोहड़” शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि एवं पेयजल हेतु वर्षा जल संग्रहित करने की परंपरागत तकनीकें हैं।
  • मेघालय में बाँस टपक सिंचाई (Bamboo Drip Irrigation) — लगभग 200 वर्ष पुरानी एक अत्यंत कुशल प्रणाली, जिसमें बाँस की नलियों के माध्यम से धारा व स्रोत के जल को लंबी दूरी तक ले जाया जाता है और फिर इसे पौधों की जड़ों पर टपकाया जाता है; इसका उपयोग मुख्यतः काली मिर्च तथा पान की खेती की सिंचाई के लिए किया जाता है।

जल संरक्षण की आधुनिक विधियाँ

  • शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन तथा भूजल पुनर्भरण हेतु छत वर्षा जल संग्रहण संरचनाएँ बनाई जा रही हैं, विशेषकर तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहाँ इसे अनिवार्य कर दिया गया है।
  • वाटरशेड विकास एवं प्रबंधन कार्यक्रम भूजल के संरक्षण एवं पुनर्भरण में सहायक हैं।
  • बूँद-बूँद (drip) एवं फव्वारा (sprinkler) सिंचाई विधियाँ कृषि में जल के कुशल उपयोग में सहायक हैं तथा जल की बर्बादी को कम करती हैं।
  • उपचार के पश्चात अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण एवं गैर-पेयजल उपयोगों हेतु पुनः उपयोग स्वच्छ जल स्रोतों पर माँग को कम करने में सहायक है।
  • जिम्मेदार जल उपयोग एवं संरक्षण की प्रथाओं को बढ़ावा देने हेतु जन-जागरूकता अभियान तथा सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Points to Remember)

  • जल एक नवीकरणीय संसाधन है, परंतु इसकी उपलब्धता, गुणवत्ता तथा असमान वितरण के कारण कई क्षेत्रों में यह दुर्लभ है।
  • भारत के पास विश्व के जल संसाधनों का लगभग 4% भाग है, जबकि यहाँ विश्व की लगभग 16-17% जनसंख्या निवास करती है।
  • जल संकट के प्रमुख कारण हैं — जनसंख्या वृद्धि, कृषि की बढ़ती माँग, औद्योगीकरण, शहरीकरण तथा भूमिगत जल का अति-दोहन।
  • बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ सिंचाई, विद्युत उत्पादन, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, अंतर्देशीय नौवहन तथा मत्स्य पालन — सभी उद्देश्यों की एक साथ पूर्ति करती हैं।
  • प्रमुख उदाहरणों में भाखड़ा नांगल, हीराकुड, दामोदर घाटी, नागार्जुन सागर, टिहरी तथा सरदार सरोवर परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • बड़े बाँधों ने पारिस्थितिक, सामाजिक एवं आर्थिक चिंताएँ उत्पन्न की हैं — जलमग्नता, विस्थापन, अवसादन, भूकंपीय गतिविधि तथा अंतर-राज्यीय जल विवाद।
  • नर्मदा बचाओ आंदोलन ने विस्थापन एवं पुनर्वास के मुद्दों पर सरदार सरोवर बाँध का विरोध किया।
  • परंपरागत वर्षा जल संग्रहण विधियों में गुल/कुल, टांके, खादीन/जोहड़ तथा बाँस टपक सिंचाई शामिल हैं।
  • जल संरक्षण की आधुनिक विधियों में छत वर्षा जल संग्रहण, वाटरशेड प्रबंधन, बूँद/फव्वारा सिंचाई तथा अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण शामिल हैं।

We hope that class 10 Social Science Chapter 3 जल संसाधन (Water Resources) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 10 Social Science Chapter 3 जल संसाधन Notes in Hindi or about any other Notes of class 10 Social Science in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

Category: Class 10 SST Notes in Hindi

Post navigation

← वन एवं वन्य जीव संसाधन Notes || Class 10 Social Science Geography Chapter 2 in Hindi ||
औद्योगीकरण का युग Notes || Class 10 Social Science History Chapter 4 in Hindi || →

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Download our App Now - Criss Cross Classes

Free WhatsApp Group

Free Telegram Group

Our Application

Ask Your Doubts

MORE NOTES

  • Class 10 Hindi (42)
  • Class 10 Math Notes in Hindi (15)
  • Class 10 Science Notes in Hindi (16)
  • Class 10 SST Notes in Hindi (22)
  • Class 11 Economics Notes in Hindi (14)
  • Class 11 Geography Notes in Hindi (23)
  • Class 11 Hindi (23)
  • Class 11 History Notes in Hindi (11)
  • Class 11 Physical Education Notes in Hindi (10)
  • Class 11 Political Science Notes in Hindi (20)
  • Class 11 Sociology Notes in Hindi (10)
  • Class 12 Economics Notes in Hindi (20)
  • Class 12 Geography Notes in Hindi (23)
  • Class 12 Hindi (51)
  • Class 12 History Notes in Hindi (16)
  • Class 12 Home Science Notes in Hindi (16)
  • Class 12 Notes (21)
  • Class 12 Physical Education Notes in Hindi (10)
  • Class 12 Political Science Notes in Hindi (19)
  • Class 12 Sociology Notes in Hindi (16)
  • Class 9 Hindi (53)
  • Class 9 Math Notes in Hindi (23)
  • Class 9 Science Notes in Hindi (28)
  • Class 9 Social Science Notes in Hindi (29)
  • Physical Education CUET (8)
  • Uncategorized (1)
© 2026 Criss Cross Classes | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme