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संघवाद Notes – Class 10 Social Science Political Science Chapter 2 in Hindi

Posted on August 17, 2026 by Anshul Gupta

पाठ – 2

संघवाद

In this post we have given the detailed notes of class 10 Social Science (Political Science) chapter 2 Federalism in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 board exams.

इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) के पाठ 2 संघवाद के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है।

BoardCBSE Board, JAC Board, RBSE Board, MPBSE Board, UBSE Board
TextbookNCERT — Democratic Politics-II (Reprint 2026-27)
ClassClass 10
SubjectSocial Science (Political Science)
Chapter no.Chapter 2
Chapter Nameसंघवाद (Federalism)
CategoryClass 10 SST Notes in Hindi
MediumHindi
Class 10 Social Science Chapter 2 संघवाद Notes in Hindi
Explore the topics
पाठ – 2
संघवाद
पाठ 2, संघवाद
संघवाद क्या है?
संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ
भारत को संघीय देश क्या बनाता है?
भारत में संघवाद का व्यवहार में क्रियान्वयन
भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
भाषा-नीति
केंद्र-राज्य संबंधों का पुनर्गठन
भारत में विकेंद्रीकरण (Decentralisation)
73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन (1992)
पंचायती राज व्यवस्था (ग्रामीण क्षेत्र)
नगरीय स्थानीय शासन (शहरी क्षेत्र)
मुख्य बिंदु (Key Points)

पाठ 2, संघवाद

संघवाद क्या है?

संघवाद (Federalism): संघवाद शासन की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सत्ता केंद्रीय (राष्ट्रीय स्तर की) सरकार और विभिन्न घटक इकाइयों (राज्यों) के बीच बाँटी जाती है। इस प्रकार सरकार के दो या दो से अधिक स्तर (levels/tiers) एक ही नागरिकों पर शासन करते हैं, परंतु प्रत्येक स्तर के पास विधायन (legislation), कराधान (taxation) और प्रशासन (administration) के विशिष्ट विषयों में अपना अलग क्षेत्राधिकार (jurisdiction) होता है।

संघवाद के विपरीत एकात्मक शासन-व्यवस्था (Unitary System) होती है, जिसमें या तो केवल एक ही स्तर की सरकार होती है, या फिर उप-इकाइयाँ केंद्र सरकार के अधीन होती हैं और केंद्र सरकार जब चाहे उन्हें सामान्य निर्देश दे सकती है। दूसरे शब्दों में, एकात्मक व्यवस्था में समस्त सत्ता केंद्र सरकार के पास होती है और वह चाहे तो शक्तियाँ उप-इकाइयों को हस्तांतरित (delegate) कर सकती है, परंतु यह हस्तांतरण संवैधानिक बाध्यता नहीं होती।

संघीय देश (Federal Countries)एकात्मक देश (Unitary Countries)
भारत (India)यूनाइटेड किंगडम (UK)
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)फ्रांस (France)
स्विट्ज़रलैंड (Switzerland)चीन (China)
ब्राज़ील (Brazil)जापान (Japan)
श्रीलंका (Sri Lanka)

संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ

  • सरकार के दो या अधिक स्तर: संघीय व्यवस्था में सरकार के कम से कम दो स्तर होते हैं — एक पूरे देश के लिए और दूसरा प्रांतीय/क्षेत्रीय स्तर पर।
  • अलग-अलग क्षेत्राधिकार: विभिन्न स्तरों की सरकारें एक ही नागरिकों पर शासन करती हैं, परंतु विधायन, कराधान और प्रशासन के विशिष्ट मामलों में प्रत्येक स्तर का अपना क्षेत्राधिकार होता है।
  • संवैधानिक गारंटी: प्रत्येक स्तर के क्षेत्राधिकार संविधान में निर्दिष्ट होते हैं, ताकि प्रत्येक स्तर के अस्तित्व और अधिकार की संवैधानिक गारंटी हो।
  • मूल प्रावधानों में एकतरफा परिवर्तन संभव नहीं: संविधान के मूल प्रावधानों को एक स्तर की सरकार द्वारा अकेले नहीं बदला जा सकता। ऐसे परिवर्तनों के लिए दोनों स्तरों की सहमति आवश्यक होती है।
  • न्यायपालिका की भूमिका: न्यायालयों के पास संविधान की व्याख्या करने तथा सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच शक्तियों से जुड़े विवादों को सुलझाने की शक्ति होती है।
  • राजस्व के स्रोत निर्दिष्ट: प्रत्येक स्तर की सरकार के राजस्व (revenue) के स्रोत स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किए जाते हैं, ताकि वित्तीय स्वायत्तता (financial autonomy) सुनिश्चित हो सके।
  • दोहरे उद्देश्य: संघीय व्यवस्था के दो उद्देश्य होते हैं — देश की एकता (unity) की रक्षा करना और साथ ही विविधता (diversity) को समायोजित करना।

भारत को संघीय देश क्या बनाता है?

भारतीय संविधान ने मूल रूप से दो-स्तरीय शासन-व्यवस्था — संघ सरकार (Union Government) और राज्य सरकारें (State Governments) — की स्थापना की थी। बाद में एक तीसरा स्तर जोड़ा गया — ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतें (Panchayats) और शहरी क्षेत्रों में नगरपालिकाएँ (Municipalities)। इस प्रकार आज भारत में सरकार के तीन स्तर हैं — केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय (पंचायत/नगरपालिका)।

संविधान में विभिन्न स्तरों के बीच विषयों (subjects) के बँटवारे के लिए तीन सूचियाँ दी गई हैं —

सूचीविवरणउदाहरण
संघ सूची (Union List)राष्ट्रीय महत्व के विषय, जिन पर केवल संघ सरकार कानून बना सकती है।रक्षा (Defence), विदेशी मामले (Foreign Affairs), बैंकिंग, संचार (Communication), मुद्रा (Currency)
राज्य सूची (State List)राज्य या क्षेत्रीय महत्व के विषय, जिन पर केवल राज्य सरकार कानून बना सकती है।पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि, सिंचाई
समवर्ती सूची (Concurrent List)ऐसे विषय जिन पर संघ और राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती हैं। विवाद की स्थिति में संघ सरकार का कानून मान्य होता है।शिक्षा (Education), वन (Forest), व्यापार संघ (Trade Unions), विवाह (Marriage), दत्तक ग्रहण (Adoption), उत्तराधिकार (Succession)

जो विषय इन तीनों सूचियों में सम्मिलित नहीं हैं, वे अवशिष्ट विषय (Residuary Subjects) कहलाते हैं और इन पर कानून बनाने की शक्ति केंद्र सरकार के पास होती है — उदाहरण के लिए, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से जुड़े कानून।

भारत में संघवाद का व्यवहार में क्रियान्वयन

भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन

1947 के बाद, राज्यों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण इस प्रकार किया गया कि प्रत्येक राज्य की एक निश्चित भाषा बोलने वाली जनसंख्या हो। इससे राज्यों की सीमाएँ प्रशासनिक इकाइयों के बजाय सांस्कृतिक-भाषायी पहचान पर आधारित हो गईं। इसे भाषायी पुनर्गठन (Linguistic Reorganisation of States) कहा जाता है, और इसने राज्यों को एक स्पष्ट सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान दी, जिससे संघीय व्यवस्था अधिक मज़बूत हुई।

भाषा-नीति

भारतीय संविधान ने किसी एक भाषा को ‘राष्ट्रभाषा’ का दर्जा नहीं दिया। हिन्दी को राजभाषा (Official Language) घोषित किया गया, लेकिन साथ ही अन्य भाषाओं के संरक्षण के लिए सुरक्षा उपाय (safeguards) दिए गए — जैसे राज्यों को अपनी राजभाषा चुनने की स्वतंत्रता, तथा केंद्र सरकार व गैर-हिन्दी भाषी राज्यों के बीच संवाद के लिए अंग्रेज़ी का निरंतर उपयोग। आज भारतीय संविधान में 22 भाषाओं को अनुसूचित भाषा (Scheduled Languages) के रूप में मान्यता प्राप्त है।

केंद्र-राज्य संबंधों का पुनर्गठन

1990 के दशक के बाद केंद्र में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलना कम होता गया, जिससे गठबंधन सरकारों (Coalition Governments) का युग आरंभ हुआ। इस दौर में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी और केंद्र सरकार को राज्यों की माँगों को अधिक गंभीरता से सुनना पड़ा। इस प्रक्रिया ने भारत में सत्ता की साझेदारी (power sharing) को और अधिक वास्तविक तथा प्रभावी बना दिया।

भारत में विकेंद्रीकरण (Decentralisation)

विकेंद्रीकरण (Decentralisation): जब केंद्र और राज्य सरकारों की शक्तियाँ स्थानीय सरकारों को हस्तांतरित की जाती हैं, तो इसे विकेंद्रीकरण कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि लोगों की समस्याओं और चिंताओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही किया जा सके, जहाँ की जानकारी स्थानीय लोगों को केंद्र या राज्य सरकार की तुलना में बेहतर होती है।

73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन (1992)

भारत में सत्ता के प्रभावी विकेंद्रीकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम था। इन संशोधनों के माध्यम से —

  • ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए नियमित चुनाव कराना अनिवार्य किया गया।
  • महिलाओं के लिए स्थानीय निकायों के चुनावों में एक-तिहाई (1/3) सीटें आरक्षित की गईं।
  • अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित की गईं।
  • प्रत्येक राज्य में एक स्वतंत्र संस्था — राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission) — की स्थापना की गई, जो स्थानीय निकायों के चुनाव संचालित करती है।
  • राज्य सरकारों को अपने राजस्व और शक्तियों का एक हिस्सा स्थानीय निकायों के साथ साझा करना अनिवार्य किया गया। इसके लिए प्रत्येक राज्य में राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) की सिफारिशों पर कार्य होता है।

पंचायती राज व्यवस्था (ग्रामीण क्षेत्र)

स्तरविवरण
ग्राम सभा (Gram Sabha)गाँव के सभी मतदाताओं की सभा; ग्राम पंचायत के कार्यों की निगरानी करती है।
ग्राम पंचायत (Gram Panchayat)गाँव स्तर की स्थानीय सरकार; निर्वाचित प्रधान/सरपंच और पंचों से मिलकर बनती है।
पंचायत समिति / ब्लॉक समिति (Panchayat Samiti)कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर बनने वाली मध्यवर्ती (मध्य-स्तरीय) संस्था।
ज़िला परिषद (Zila Parishad)ज़िले की सभी पंचायत समितियों को मिलाकर बनी शीर्ष संस्था; इसके सदस्यों में ज़िले के लोकसभा व विधानसभा सदस्य भी शामिल होते हैं।

नगरीय स्थानीय शासन (शहरी क्षेत्र)

शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन नगरपालिकाओं (Municipalities) और बड़े शहरों में नगर निगमों (Municipal Corporations) के माध्यम से चलाया जाता है। इनके प्रमुख पदाधिकारी निर्वाचित जनप्रतिनिधि होते हैं और इनमें भी महिलाओं, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण लागू होता है।

मुख्य बिंदु (Key Points)

  • संघवाद सरकार के दो या अधिक स्तरों के बीच सत्ता के बँटवारे की व्यवस्था है।
  • भारत, USA, स्विट्ज़रलैंड और ब्राज़ील संघीय देश हैं; UK, फ्रांस, चीन, जापान और श्रीलंका एकात्मक देश हैं।
  • प्रत्येक स्तर का क्षेत्राधिकार संविधान द्वारा गारंटीकृत होता है और न्यायपालिका विवादों का निपटारा करती है।
  • भारत में तीन स्तर हैं — केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय (पंचायत/नगरपालिका)।
  • संविधान में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची — तीन सूचियाँ हैं; अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास हैं।
  • 1947 के बाद राज्यों का पुनर्गठन भाषायी आधार पर हुआ; हिन्दी राजभाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं।
  • 1990 के बाद गठबंधन सरकारों के युग ने केंद्र-राज्य संबंधों को अधिक साझेदारी-आधारित बनाया।
  • 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992) ने पंचायती राज व नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया, महिलाओं व SC/ST को आरक्षण दिया, तथा राज्य चुनाव आयोग व राज्य वित्त आयोग की स्थापना की।
  • पंचायती राज संरचना: ग्राम सभा → ग्राम पंचायत → पंचायत समिति → ज़िला परिषद।

We hope that class 10 Social Science Chapter 2 संघवाद (Federalism) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 10 Social Science Chapter 2 संघवाद Notes in Hindi or about any other Notes of class 10 Social Science in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

Category: Class 10 SST Notes in Hindi

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