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Class 9 Math Chapter 4 बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण Notes in Hindi

बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण Notes || Class 9 Math Chapter 4 in Hindi ||

Posted on August 17, 2026 by

पाठ – 4

बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण

In this post we have given the detailed notes of class 9 Math chapter 4 Exploring Algebraic Identities in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 board exams.

इस पोस्ट में कक्षा 9 के गणित के पाठ 4 बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं गणित विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT — Ganita Manjari (2026-27)
ClassClass 9
SubjectMath
Chapter no.Chapter 4
Chapter Nameबीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण (Exploring Algebraic Identities)
CategoryClass 9 Math Notes in Hindi
MediumHindi
Class 9 Math Chapter 4 बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण (Exploring Algebraic Identities) Notes in Hindi
Explore the topics
पाठ – 4
बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण
पाठ 4, बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण
भूमिका और सर्वसमिका का अर्थ
एक रोचक प्रतिरूप (Pattern):
समीकरण और सर्वसमिका में अंतर:
(a + b)² और (a − b)² सर्वसमिकाएँ
(a + b)² = a² + 2ab + b² — दृश्यांकन और प्रमाण:
उदाहरण 3 — बीजीय व्यंजक का विस्तार:
उदाहरण 4 — अंकीय गणना:
(a − b)² = a² − 2ab + b² — दृश्यांकन और प्रमाण:
उदाहरण 8 — अंकीय गणना:
(a + b)² और (a − b)² द्वारा गुणनखंडन:
(a + b + c)² सर्वसमिका
उदाहरण 9 — अंकीय गणना:
a² − b² सर्वसमिका (श्रीधराचार्य विधि)
(x + a)(x + b) सर्वसमिका और बीजीय टाइलें
बिना टाइलों के गुणनखंडन — उदाहरण 10, 11, 12:
घनों की सर्वसमिकाएँ — (a + b)³ और (a − b)³
उदाहरण 13:
उदाहरण 14:
घनों का योग/अंतर — x³ ± y³ और x³ + y³ + z³ − 3xyz
उदाहरण 15 — व्यावहारिक अनुप्रयोग:
परिमेय व्यंजकों का सरलीकरण
उदाहरण 16:
सर्वसमिकाओं के व्यावहारिक अनुप्रयोग
उदाहरण 17 — सायरा का आयत:
उदाहरण 18 — आयताकार ताल:
त्वरित पुनरावृत्ति — सभी सर्वसमिकाएँ एक नज़र में
मुख्य बिंदु (Chapter Summary):

पाठ 4, बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण

भूमिका और सर्वसमिका का अर्थ

पिछली कक्षाओं में हमने रैखिक बहुपदों (linear polynomials) और रैखिक समीकरणों का अध्ययन किया था। इस पाठ में हम एक कदम आगे बढ़ते हुए बीजीय सर्वसमिकाओं (algebraic identities) का अन्वेषण करेंगे। ये गणित के ऐसे विशेष नियम हैं जो जटिल गणनाओं को सरल बनाते हैं और बीजीय व्यंजकों को कुशलतापूर्वक हल करने में सहायक होते हैं।

एक रोचक प्रतिरूप (Pattern):

किन्हीं भी तीन क्रमागत वर्ग संख्याओं में सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या को जोड़कर उसमें से मध्य संख्या का दोगुना घटाने पर सदैव 2 प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए 1, 4, 9 लीजिए — (1 + 9) − (2 × 4) = 10 − 8 = 2। इसी तरह 25, 36, 49 के लिए (25 + 49) − (2 × 36) = 74 − 72 = 2 प्राप्त होता है।

इसका बीजगणितीय प्रमाण: तीन क्रमागत संख्याएँ (n − 1), n और (n + 1) लीजिए। इनके वर्गों का योग है (n − 1)2 + (n + 1)2 = n2 − 2n + 1 + n2 + 2n + 1 = 2n2 + 2। इसमें से 2n2 घटाने पर सदैव 2 ही प्राप्त होता है। यही सर्वसमिकाओं की शक्ति है — वे किसी प्रतिरूप को हर स्थिति के लिए सिद्ध कर देती हैं।

समीकरण और सर्वसमिका में अंतर:

  • एक समीकरण (equation) केवल कुछ विशेष मानों के लिए सत्य होता है। जैसे x2 − 1 = 24 केवल x = 5 या x = −5 के लिए सत्य है।
  • एक सर्वसमिका (identity) चर के सभी मानों के लिए सत्य होती है। जैसे (x + y)2 = x2 + 2xy + y2, x और y के प्रत्येक मान के लिए सत्य है।

(a + b)² और (a − b)² सर्वसमिकाएँ

(a + b)² = a² + 2ab + b² — दृश्यांकन और प्रमाण:

सर्वसमिका: (a + b)2 = a2 + 2ab + b2

इसे ज्यामितीय रूप से समझने के लिए (a + b) भुजा वाला एक वर्ग बनाइए और उसे चार भागों में बाँटिए — एक a भुजा वाला वर्ग (क्षेत्रफल a2), एक b भुजा वाला वर्ग (क्षेत्रफल b2) और a व b भुजाओं वाले दो आयत (प्रत्येक का क्षेत्रफल ab)। इन चारों भागों का कुल क्षेत्रफल बड़े वर्ग के क्षेत्रफल (a + b)2 के बराबर होता है, अतः (a + b)2 = a2 + 2ab + b2।

वितरण गुणधर्म (distributive property) से भी इसे सिद्ध किया जा सकता है: (a + b)2 = (a + b)(a + b) = a(a + b) + b(a + b) = a2 + ab + ba + b2 = a2 + 2ab + b2।

यह सर्वसमिका ऋणात्मक और परिमेय (rational) संख्याओं के लिए भी सत्य रहती है — जैसे a = −2, b = −3 लेने पर (a + b)2 = 25 और a2 + 2ab + b2 = 4 + 12 + 9 = 25, दोनों बराबर आते हैं।

उदाहरण 3 — बीजीय व्यंजक का विस्तार:

(5x + 2y)2 का विस्तार कीजिए। यहाँ a = 5x, b = 2y।
(5x + 2y)2 = (5x)2 + 2(5x)(2y) + (2y)2 = 25x2 + 20xy + 4y2

उदाहरण 4 — अंकीय गणना:

432 ज्ञात कीजिए। इसे (40 + 3)2 लिखिए।
(40 + 3)2 = 402 + 2 × 40 × 3 + 32 = 1600 + 240 + 9 = 1849

(a − b)² = a² − 2ab + b² — दृश्यांकन और प्रमाण:

सर्वसमिका: (a − b)2 = a2 − 2ab + b2

यह पहली सर्वसमिका में b के स्थान पर −b रखने से प्राप्त होती है। दृश्यांकन के लिए a भुजा वाला एक वर्ग लीजिए और उसकी भुजा को (a − b) व b भागों में बाँटिए। बड़े वर्ग (a2) में से दो आयतों (ab तथा b(a − b)) को घटाने पर छोटा वर्ग (a − b)2 शेष बचता है।
(a − b)2 = a2 − ab − b(a − b) = a2 − ab − ba + b2 = a2 − 2ab + b2

उदाहरण 8 — अंकीय गणना:

292 ज्ञात कीजिए। इसे (30 − 1)2 लिखिए।
(30 − 1)2 = 302 − 2 × 30 × 1 + 12 = 900 − 60 + 1 = 841

(a + b)² और (a − b)² द्वारा गुणनखंडन:

  • उदाहरण 5: x2 + 4x + 4 = x2 + 2(x)(2) + 22 = (x + 2)2, अतः (x + 2) एक गुणनखंड है।
  • उदाहरण 6: 36x2 + 12x + 1 = (6x)2 + 2(6x)(1) + 12 = (6x + 1)2
  • उदाहरण 7: 50p2 + 60pq + 18q2 में पहले 2 को सार्व गुणनखंड निकालिए — 2(25p2 + 30pq + 9q2) = 2[(5p)2 + 2(5p)(3q) + (3q)2] = 2(5p + 3q)2

(a + b + c)² सर्वसमिका

सर्वसमिका: (a + b + c)2 = a2 + b2 + c2 + 2ab + 2bc + 2ca

इसे प्राप्त करने के लिए b + c = d मान लीजिए। तब (a + d)2 = a2 + 2ad + d2 का उपयोग करने पर a2 + 2a(b + c) + (b + c)2 प्राप्त होता है, जिसे सरल करने पर (a + b + c)2 = a2 + b2 + c2 + 2ab + 2bc + 2ca मिलता है। ज्यामितीय रूप से इसे (a + b + c) भुजा वाले वर्ग को नौ भागों (तीन वर्ग a2, b2, c2 तथा छह आयत जिनके क्षेत्रफल ab, bc, ca दो-दो बार) में बाँटकर दर्शाया जाता है।

उदाहरण 9 — अंकीय गणना:

1192 ज्ञात कीजिए। इसे (100 + 10 + 9)2 लिखिए।
= 1002 + 102 + 92 + 2(100)(10) + 2(100)(9) + 2(10)(9) = 10000 + 100 + 81 + 2000 + 1800 + 180 = 14161

अब तक हमने जिन तीन सर्वसमिकाओं को सत्यापित किया है वे हैं — (a + b)2 = a2 + 2ab + b2, (a − b)2 = a2 − 2ab + b2 और (a + b + c)2 = a2 + b2 + c2 + 2ab + 2bc + 2ca।

a² − b² सर्वसमिका (श्रीधराचार्य विधि)

सर्वसमिका: a2 − b2 = (a + b) (a − b)

इसे इस रूप में लिखना अधिक उपयोगी होता है — a2 = (a + b) (a − b) + b2। पाठ्यपुस्तक के अनुसार 750 ई. में गणितज्ञ श्रीधराचार्य ने संख्याओं के वर्गों की शीघ्र गणना के लिए इसी सर्वसमिका का प्रस्ताव दिया था। उदाहरणस्वरूप —
552 = (55 + 5)(55 − 5) + 52 = 60 × 50 + 25 = 3000 + 25 = 3025

(x + a)(x + b) सर्वसमिका और बीजीय टाइलें

सर्वसमिका: (x + a) (x + b) = x2 + (a + b)x + ab

पाठ्यपुस्तक में इसे बीजीय टाइलों (algebra tiles) की सहायता से दर्शाया गया है। मान लीजिए एक आयत की भुजाएँ (x + 3) और (x + 4) इकाई हैं। वितरण गुणधर्म से (x + 3)(x + 4) = x2 + 3x + 4x + 12 = x2 + 7x + 12। इसे टाइलों में एक x2-टाइल, 7 x-टाइलें (3 दायीं ओर + 4 नीचे) और 12 इकाई टाइलों (3×4 सरणी) के रूप में व्यवस्थित करके देखा जा सकता है।

इस प्रतिरूप को व्यापक करने पर सामान्य सर्वसमिका (ax + b)(cx + d) = acx2 + (ad + bc)x + bd भी प्राप्त होती है।

बिना टाइलों के गुणनखंडन — उदाहरण 10, 11, 12:

  • उदाहरण 10: x2 + 7x + 12 = x2 + (a + b)x + ab की तुलना करने पर a + b = 7 और ab = 12, अतः a = 3, b = 4। इसलिए x2 + 7x + 12 = (x + 3)(x + 4)।
  • उदाहरण 11: x2 + 11x + 30 में a + b = 11 और ab = 30 चाहिए, इसलिए a = 5, b = 6। अतः 11x को 5x + 6x लिखकर x2 + 11x + 30 = (x + 5)(x + 6) प्राप्त होता है।
  • उदाहरण 12: x2 − 5x + 6 में a + b = −5 और ab = 6 चाहिए, अतः a = −2, b = −3। इस तरह x2 − 5x + 6 = (x − 2)(x − 3)।

घनों की सर्वसमिकाएँ — (a + b)³ और (a − b)³

सर्वसमिका: (a + b)3 = a3 + 3a2b + 3ab2 + b3

वितरण गुणधर्म से (a + b)3 = (a + b)(a2 + 2ab + b2) = a3 + 3a2b + 3ab2 + b3 प्राप्त होता है। ज्यामितीय रूप से इसे (a + b) भुजा वाले घन को दो छोटे घनों (आयतन a3 तथा b3) और छह घनाभों में बाँटकर दर्शाया जाता है — तीन घनाभों की विमाएँ a × a × b (कुल आयतन 3a2b) और तीन घनाभों की विमाएँ a × b × b (कुल आयतन 3ab2) होती हैं।

b के स्थान पर −b रखने पर (a − b)3 = a3 − 3a2b + 3ab2 − b3 प्राप्त होता है, जिसमें पद एकांतर क्रम में धनात्मक और ऋणात्मक आते हैं।

उदाहरण 13:

p3 + 6p2q + 12pq2 + 8q3 आयतन वाले घन की भुजा ज्ञात कीजिए। इसे (p)3 + 3(p)2(2q) + 3(p)(2q)2 + (2q)3 = (p + 2q)3 लिख सकते हैं, अतः a = p, b = 2q और भुजा = p + 2q इकाई।

उदाहरण 14:

8n3 − 60n2m + 150nm2 − 125m3 को (a − b)3 रूप में लिखिए। इसे (2n)3 − 3(2n)2(5m) + 3(2n)(5m)2 − (5m)3 = (2n − 5m)3 लिखा जा सकता है, अतः a = 2n, b = 5m।

घनों का योग/अंतर — x³ ± y³ और x³ + y³ + z³ − 3xyz

वितरण गुणधर्म से दो नई सर्वसमिकाएँ प्राप्त होती हैं —

सर्वसमिका: (x − y)(x2 + xy + y2) = x3 − y3

सर्वसमिका: (x + y)(x2 − xy + y2) = x3 + y3

ध्यान दीजिए कि जैसे (x − y), x2 − y2 और x3 − y3 का सार्व गुणनखंड है, वैसे ही x4 − y4 = (x2 − y2)(x2 + y2) होने के कारण (x − y) इसका भी एक गुणनखंड है।

तीन चरों के लिए, (x + y + z) और (x2 + y2 + z2 − xy − xz − yz) का गुणनफल करने पर एक और महत्वपूर्ण सर्वसमिका मिलती है —

सर्वसमिका: x3 + y3 + z3 − 3xyz = (x + y + z)(x2 + y2 + z2 − xy − xz − yz)

उदाहरण 15 — व्यावहारिक अनुप्रयोग:

तीन संख्याओं का योगफल 10 है, उनका गुणनफल 25 है और उनके वर्गों का योगफल 38 है। इन संख्याओं के घनों का योगफल ज्ञात कीजिए।

माना संख्याएँ x, y, z हैं, अतः x + y + z = 10, xyz = 25, x2 + y2 + z2 = 38। सर्वसमिका में मान रखने पर —
(10)(38 − xy − xz − yz) = x3 + y3 + z3 − 3(25)
x3 + y3 + z3 = 455 − 10(xy + xz + yz)

(xy + xz + yz) ज्ञात करने के लिए (x + y + z)2 = x2 + y2 + z2 + 2(xy + xz + yz) का उपयोग कीजिए — 100 = 38 + 2(xy + xz + yz), अतः xy + xz + yz = 31। इसे ऊपर रखने पर —
x3 + y3 + z3 = 455 − 10(31) = 455 − 310 = 145

परिमेय व्यंजकों का सरलीकरण

बीजीय सर्वसमिकाओं का उपयोग परिमेय व्यंजकों (rational expressions) के अंश और हर का गुणनखंड करके उन्हें सरल बनाने में भी किया जाता है।

उदाहरण 16:

व्यंजक (x2 − 7x + 12) ÷ (5x2 + 5x − 100) को सरल कीजिए, जहाँ 5x2 + 5x − 100 ≠ 0।

अंश: x2 − 7x + 12 में a + b = −7, ab = 12, अतः a = −3, b = −4। इसलिए x2 − 7x + 12 = (x − 3)(x − 4)।
हर: 5x2 + 5x − 100 = 5(x2 + x − 20)। यहाँ a + b = 1, ab = −20, अतः a = 5, b = −4। इसलिए 5x2 + 5x − 100 = 5(x − 4)(x + 5)।

व्यंजक बनता है — (x − 4)(x − 3) ÷ [5(x − 4)(x + 5)]। चूँकि 5x2 + 5x − 100 ≠ 0 है इसलिए (x − 4) ≠ 0, अतः इसे काटा जा सकता है।
सरलीकृत रूप = (x − 3) ÷ [5(x + 5)]

सर्वसमिकाओं के व्यावहारिक अनुप्रयोग

उदाहरण 17 — सायरा का आयत:

सायरा ने x इकाई भुजा वाला एक वर्ग, x इकाई लंबाई तथा 1 इकाई चौड़ाई वाली 8 आयताकार पट्टियाँ और 1 इकाई भुजा वाले 15 वर्ग जोड़कर एक बड़ा आयत बनाया। कुल क्षेत्रफल = x2 + 8x + 15 वर्ग इकाई।

इसका गुणनखंड करने पर a + b = 8, ab = 15 चाहिए, अतः a = 3, b = 5। इसलिए आयत की लंबाई = x + 5 इकाई और चौड़ाई = x + 3 इकाई।

उदाहरण 18 — आयताकार ताल:

एक आयताकार ताल की चौड़ाई उसकी लंबाई से 4 मीटर कम है और उसका क्षेत्रफल 96 वर्ग मीटर है। लंबाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए।

माना लंबाई x मीटर है, तो चौड़ाई (x − 4) मीटर। अतः x(x − 4) = 96, यानी x2 − 4x − 96 = 0।
−96 के ऐसे गुणनखंड चाहिए जिनका योग −4 हो: (−12) × 8 = −96 और (−12) + 8 = −4।
x2 − 12x + 8x − 96 = x(x − 12) + 8(x − 12) = (x − 12)(x + 8) = 0
अतः x = 12 या x = −8। चूँकि लंबाई ऋणात्मक नहीं हो सकती, x = 12 मीटर। चौड़ाई = 12 − 4 = 8 मीटर।

त्वरित पुनरावृत्ति — सभी सर्वसमिकाएँ एक नज़र में

क्र.सं.सर्वसमिका
1(x + y)2 = x2 + 2xy + y2
2(x − y)2 = x2 − 2xy + y2
3(x + y + z)2 = x2 + y2 + z2 + 2xy + 2yz + 2zx
4(x + y)(x − y) = x2 − y2
5(x + a)(x + b) = x2 + (a + b)x + ab
6(ax + b)(cx + d) = acx2 + (ad + bc)x + bd
7x3 − y3 = (x − y)(x2 + xy + y2)
8x3 + y3 = (x + y)(x2 − xy + y2)
9(x + y)3 = x3 + 3x2y + 3xy2 + y3
10(x − y)3 = x3 − 3x2y + 3xy2 − y3
11x3 + y3 + z3 − 3xyz = (x + y + z)(x2 + y2 + z2 − xy − xz − yz)

मुख्य बिंदु (Chapter Summary):

  • सर्वसमिकाएँ ऐसे समीकरण हैं जो चर के सभी मानों के लिए सत्य होते हैं।
  • सर्वसमिकाओं को ज्यामितीय प्रदर्शों (वर्ग/आयत/घन के मॉडल) या बीजीय टाइलों की सहायता से दृश्यांकित किया जा सकता है।
  • सर्वसमिकाओं का उपयोग बीजीय व्यंजकों के गुणनखंडन तथा अंकीय गणनाओं (वर्ग व घन ज्ञात करना) को सरल बनाने के लिए किया जाता है।
  • परिमेय बीजीय व्यंजकों को अंश और हर का गुणनखंड करके तथा सार्व गुणनखंड हटाकर सरल किया जा सकता है, बशर्ते वह गुणनखंड शून्य के समान न हो।

We hope that class 9 Math Chapter 4 बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण (Exploring Algebraic Identities) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 9 Math Chapter 4 बीजीय सर्वसमिकाओं का अन्वेषण (Exploring Algebraic Identities) Notes in Hindi or about any other Notes of class 9 Math in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

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