पाठ – 9
द्रव्य का परमाण्विक आधार
In this post we have given the detailed notes of class 9 Science chapter 9 Atomic Foundations of Matter in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 board exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के विज्ञान के पाठ 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT — Exploration / अन्वेषण (2026-27) |
| Class | Class 9 |
| Subject | Science |
| Chapter no. | Chapter 9 |
| Chapter Name | द्रव्य का परमाण्विक आधार (Atomic Foundations of Matter) |
| Category | Class 9 Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
पाठ 9, द्रव्य का परमाण्विक आधार
पिछले पाठ में हमने परमाणु की संरचना, उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन तथा संयोजकता कोश के अष्टक नियम के बारे में पढ़ा था। इस पाठ में हम यह समझेंगे कि तत्वों के परमाणु आपस में संयोजित होकर यौगिक कैसे बनाते हैं, इस संयोजन को नियंत्रित करने वाले नियम कौन-कौन से हैं, तथा किसी यौगिक का सूत्र और द्रव्यमान किस प्रकार ज्ञात किया जाता है।
9.1 द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass)
द्रव्यमान संरक्षण का नियम: किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्य (matter) का न तो सृजन किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, अर्थात अभिक्रिया से पहले अभिकारकों (reactants) का कुल द्रव्यमान तथा अभिक्रिया के बाद बने उत्पादों (products) का कुल द्रव्यमान सदैव समान रहता है। इस नियम को सन् 1789 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक एन्तवॉ लवाइजिए (Antoine Lavoisier) ने प्रतिपादित किया था। लवाइजिए को “आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक” कहा जाता है।
जब बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) को सिरके में एक बंद व्यवस्था में मिलाया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है और आरंभिक तथा अंतिम पाठ्यांक समान रहते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि द्रव्यमान संरक्षित रहता है। इसी प्रकार सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के विलयनों को मिलाने पर बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप और सोडियम क्लोराइड बनता है, परंतु मिश्रण से पहले और बाद के द्रव्यमान में कोई अंतर नहीं आता।
हल किया गया उदाहरण 9.1:
एक बंद पात्र में 4.0 g कैल्सियम कार्बोनेट को 2.92 g हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ मिलाया गया। अभिक्रिया के बाद 1.76 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.72 g जल और 4.44 g कैल्सियम क्लोराइड प्राप्त हुआ। जाँच कीजिए कि द्रव्यमान संरक्षण का नियम पालन हो रहा है या नहीं।
हल:
- अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = कैल्सियम कार्बोनेट + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल = 4.0 g + 2.92 g = 6.92 g
- उत्पादों का कुल द्रव्यमान = कार्बन डाइऑक्साइड + जल + कैल्सियम क्लोराइड = 1.76 g + 0.72 g + 4.44 g = 6.92 g
चूँकि अभिकारकों का कुल द्रव्यमान (6.92 g) उत्पादों के कुल द्रव्यमान (6.92 g) के बराबर है, अतः द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन हो रहा है।
हल किया गया उदाहरण 9.2:
12 g कार्बन, 32 g ऑक्सीजन के साथ संयोजित होकर 44 g कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। यदि 2.4 g कार्बन पूर्णतः ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करे, तो कितनी कार्बन डाइऑक्साइड बनेगी?
हल:
- दिया है — 12 g कार्बन से 44 g कार्बन डाइऑक्साइड बनती है।
- अतः 1 g कार्बन से बनने वाली कार्बन डाइऑक्साइड = 44/12 g
- अतः 2.4 g कार्बन से बनने वाली कार्बन डाइऑक्साइड = (44/12) × 2.4 g = 8.8 g
अतः 2.4 g कार्बन से 8.8 g कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होगी।
9.2 स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions)
स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions): इसे निश्चित अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions) अथवा प्राउस्ट का नियम (Proust’s Law) भी कहते हैं। इस नियम के अनुसार, दो या दो से अधिक तत्वों से बने किसी भी यौगिक में वे तत्व सदैव द्रव्यमान के एक निश्चित (स्थिर) अनुपात में संयोजित होते हैं, चाहे वह यौगिक कहीं से भी प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो। इस नियम को सन् 1799 के आसपास फ्रांसीसी रसायनज्ञ जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने प्रस्तावित किया था।
उदाहरण के लिए, चाहे जल नदी, बोरवेल अथवा समुद्र किसी भी स्रोत से प्राप्त किया जाए, शुद्ध जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन सदैव 1:8 के द्रव्यमान अनुपात में ही पाए जाते हैं। अर्थात 9 g शुद्ध जल को विघटित करने पर सदैव 1 g हाइड्रोजन और 8 g ऑक्सीजन ही प्राप्त होती है।
हल किया गया उदाहरण 9.3:
सोडियम क्लोराइड (NaCl) में सोडियम और क्लोरीन का द्रव्यमान अनुपात 23:35.5 है। यदि 46 g सोडियम पूर्णतः अभिक्रिया करे, तो NaCl बनाने के लिए कितने द्रव्यमान की क्लोरीन चाहिए होगी?
हल:
क्लोरीन का आवश्यक द्रव्यमान = (35.5 ÷ 23) × 46 = 71 g
अतः 46 g सोडियम के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए 71 g क्लोरीन आवश्यक होगी।
9.3 डॉल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton’s Atomic Theory)
द्रव्यमान संरक्षण के नियम और स्थिर अनुपात के नियम को तार्किक रूप से समझाने के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉन डॉल्टन (John Dalton) ने सन् 1808 में अपना परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया। इस सिद्धांत के प्रमुख अभिगृहीत (postulates) निम्नलिखित हैं —
डॉल्टन के अभिगृहीत:
- संपूर्ण द्रव्य अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है जिन्हें परमाणु (atom) कहते हैं, और ये रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं।
- परमाणु अविभाज्य (indivisible) कण होते हैं, जिन्हें किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में न तो सृजित किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
- किसी एक तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं।
- विभिन्न तत्वों के परमाणुओं का द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म भिन्न-भिन्न होते हैं।
- परमाणु सरल पूर्णांकों (simple whole numbers) के अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
- किसी यौगिक में परमाणुओं की सापेक्ष संख्या एवं उनके प्रकार सदैव निश्चित होते हैं।
डॉल्टन के इन अभिगृहीतों से यह स्पष्ट होता है कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु आपस में संयोजित होकर जल बनाते हैं, परंतु स्वयं परमाणु न तो नष्ट होते हैं और न ही किसी अन्य पदार्थ में बदलते हैं — वे केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
9.4 परमाणु किस प्रकार संयोजन करते हैं? (How Atoms Combine)
अणु (Molecule): अणु एक विद्युत रूप से उदासीन (electrically neutral) कण है, जिसमें एक से अधिक परमाणु होते हैं, जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है तथा उस पदार्थ के सभी गुणधर्मों को प्रदर्शित करता है। एक ही तत्व के परमाणु संयोजित होकर उस तत्व का अणु बना सकते हैं (जैसे — हाइड्रोजन का अणु H₂, दो हाइड्रोजन परमाणुओं से बनता है), जबकि विभिन्न तत्वों के परमाणु संयोजित होकर किसी यौगिक का अणु बनाते हैं (जैसे — हाइड्रोजन क्लोराइड HCl)। हीलियम जैसे कुछ तत्व केवल परमाणुओं के रूप में ही स्थायी रहते हैं क्योंकि उनके परमाणु पहले से ही स्थायी होते हैं।
जिन परमाणुओं के संयोजकता (बाह्यतम) कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (K-कोश के लिए 2 इलेक्ट्रॉन) से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं, वे स्थायी बनने के लिए इलेक्ट्रॉनों को साझा (share) कर सकते हैं, ग्रहण (gain) कर सकते हैं अथवा त्याग (lose) सकते हैं। परमाणुओं को आपस में बाँधे रखने वाले इस बल को रासायनिक आबंध (Chemical Bond) कहते हैं। यह मुख्यतः दो प्रकार से बनता है — इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (सहसंयोजी आबंध) और इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण (आयनिक आबंध)।
(A) सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond) — इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी
सहसंयोजी आबंध: जब दो परमाणु इलेक्ट्रॉनों के एक साझा युग्म (shared pair) के माध्यम से आपस में जुड़ते हैं, तो इसे सहसंयोजी आबंध कहते हैं। यदि दो परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं तो उन्हें एकल आबंध (single bond, जैसे H—H) से जुड़ा कहा जाता है।
- हाइड्रोजन अणु (H₂): हाइड्रोजन परमाणु के K-कोश में केवल 1 इलेक्ट्रॉन होता है, स्थायी होने के लिए उसे 1 और इलेक्ट्रॉन चाहिए। दो हाइड्रोजन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करके H—H अणु बनाते हैं (एकल आबंध)।
- क्लोरीन अणु (Cl₂): क्लोरीन परमाणु के संयोजकता कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, अतः उसे 1 और इलेक्ट्रॉन चाहिए। दो क्लोरीन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा कर Cl—Cl अणु बनाते हैं।
- ऑक्सीजन अणु (O₂): ऑक्सीजन परमाणु के संयोजकता कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, अतः उसे अष्टक पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए। दो ऑक्सीजन परमाणु दो-दो इलेक्ट्रॉन साझा करके द्वि-आबंध (double bond, O=O) बनाते हैं।
- हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl): हाइड्रोजन और क्लोरीन दोनों को 1-1 इलेक्ट्रॉन चाहिए, अतः वे एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा कर H—Cl अणु बनाते हैं। यह एक सहसंयोजी यौगिक है।
- जल का अणु (H₂O): ऑक्सीजन को अष्टक पूरा करने हेतु 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए, जो दो हाइड्रोजन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करके पूरा करते हैं। इस प्रकार बने अणु में 2 हाइड्रोजन परमाणु और 1 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं (H₂O)।
सहसंयोजी यौगिकों का नामकरण (Naming Covalent Compounds):
सहसंयोजी यौगिकों का नाम एक उपसर्ग प्रणाली से रखा जाता है, जिसमें प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या दर्शाई जाती है। प्रथम तत्व का सामान्य नाम रखा जाता है जबकि दूसरे तत्व के नाम के अंत में “-आइड (-ide)” लगाया जाता है। परमाणुओं की संख्या दर्शाने के लिए उपसर्ग होते हैं — मोनो- (1), डाइ- (2), ट्राइ- (3), टेट्रा- (4), पेंटा- (5), हेक्सा- (6)। प्रथम तत्व के लिए “मोनो” सामान्यतः नहीं लिखा जाता, परंतु दूसरे तत्व के लिए इसका प्रयोग होता है।
- CO — कार्बन मोनोक्साइड
- CO₂ — कार्बन डाइऑक्साइड
- CS₂ — कार्बन डाइसल्फाइड
- PCl₃ — फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड
- SF₆ — सल्फर हेक्साफ्लुओराइड
- N₂O₄ — डाइनाइट्रोजन टेट्रॉक्साइड
- N₂O₅ — डाइनाइट्रोजन पेंटऑक्साइड
जब सूत्र में प्रथम तत्व हाइड्रोजन हो, तो उसके पहले कोई उपसर्ग नहीं जोड़ा जाता — जैसे H₂S को “हाइड्रोजन सल्फाइड” कहा जाता है, न कि “डाइहाइड्रोजन सल्फाइड”। कुछ यौगिक अपने सामान्य (common) नाम से ही जाने जाते हैं — जैसे H₂O को “जल” और NH₃ (वास्तव में नाइट्रोजन ट्राइहाइड्राइड) को “अमोनिया” कहा जाता है।
(B) आयनिक आबंध (Ionic Bond) — इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण
धनायन (Cation): जब कोई परमाणु स्थायी बनने के लिए अपने एक या अधिक संयोजकता इलेक्ट्रॉन त्याग देता है, तो वह धनावेशित हो जाता है और उसे धनायन कहते हैं। उदाहरण के लिए सोडियम परमाणु (परमाणु क्रमांक 11) अपना एकमात्र संयोजकता इलेक्ट्रॉन त्यागकर सोडियम धनायन Na⁺ बनाता है (11 प्रोटॉन, 10 इलेक्ट्रॉन)।
ऋणायन (Anion): जब कोई परमाणु स्थायी बनने के लिए एक या अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो वह ऋणावेशित हो जाता है और उसे ऋणायन कहते हैं। उदाहरण के लिए क्लोरीन परमाणु (7 संयोजकता इलेक्ट्रॉन) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके क्लोराइड ऋणायन Cl⁻ बनाता है।
आयन (Ion): धनायन और ऋणायन को सामूहिक रूप से आयन कहा जाता है।
आयनिक आबंध (Ionic Bond): विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच लगने वाले स्थिर वैद्युत आकर्षण बल (electrostatic force of attraction) को आयनिक आबंध कहते हैं। जैसे — Na⁺ और Cl⁻ आपस में आयनिक आबंध द्वारा जुड़कर सोडियम क्लोराइड (NaCl) बनाते हैं। सल्फर जैसे तत्व, जिनके बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, अष्टक पूरा करने हेतु 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके S²⁻ ऋणायन बनाते हैं। आयनिक यौगिक अणु नहीं बनाते, बल्कि आयन एक नियमित त्रिविमीय (3-D) पुनरावृत्ति प्रतिरूप में व्यवस्थित होकर क्रिस्टल संरचना बनाते हैं, जिसे क्रिस्टल जालक (crystal lattice) कहा जाता है।
आयनिक यौगिकों का नामकरण (Naming Ionic Compounds):
आयनिक यौगिक का नाम लिखते समय पहले धनायन का नाम और उसके बाद ऋणायन का नाम लिखा जाता है। सरल ऋणायनों के नाम के अंत में “-आइड” होता है। सामान्यतः धातुएँ धनायन तथा अधातुएँ ऋणायन बनाती हैं। जो आयन दो या अधिक तत्वों के परमाणुओं के संयोजन से बनते हैं उन्हें बहुपरमाण्विक आयन (polyatomic ions) कहते हैं, और इनके नाम प्रायः “-आइड” से समाप्त नहीं होते (जैसे हाइड्रॉक्साइड, नाइट्रेट, कार्बोनेट)।
तालिका 9.1: कुछ सामान्य आयन, उनके सूत्र और संयोजकता
| आयन का नाम | सूत्र | संयोजकता |
| सोडियम | Na⁺ | 1 |
| लीथियम | Li⁺ | 1 |
| पोटैशियम | K⁺ | 1 |
| सिल्वर | Ag⁺ | 1 |
| कैल्सियम | Ca²⁺ | 2 |
| बेरियम | Ba²⁺ | 2 |
| आयरन (फेरस) | Fe²⁺ | 2 |
| आयरन (फेरिक) | Fe³⁺ | 3 |
| कॉपर (क्यूप्रस) | Cu⁺ | 1 |
| कॉपर (क्यूप्रिक) | Cu²⁺ | 2 |
| मैग्नीशियम | Mg²⁺ | 2 |
| जिंक | Zn²⁺ | 2 |
| ऐलुमिनियम | Al³⁺ | 3 |
| फ्लुओराइड | F⁻ | 1 |
| क्लोराइड | Cl⁻ | 1 |
| ब्रोमाइड | Br⁻ | 1 |
| आयोडाइड | I⁻ | 1 |
| ऑक्साइड | O²⁻ | 2 |
| सल्फाइड | S²⁻ | 2 |
| हाइड्रॉक्साइड (बहुपरमाण्विक) | OH⁻ | 1 |
| नाइट्रेट (बहुपरमाण्विक) | NO₃⁻ | 1 |
| हाइड्रोजनकार्बोनेट (बहुपरमाण्विक) | HCO₃⁻ | 1 |
| कार्बोनेट (बहुपरमाण्विक) | CO₃²⁻ | 2 |
| सल्फेट (बहुपरमाण्विक) | SO₄²⁻ | 2 |
| अमोनियम (बहुपरमाण्विक) | NH₄⁺ | 1 |
9.5 रासायनिक सूत्र लिखना (Writing Chemical Formulae)
9.5.1 सहसंयोजी यौगिकों के सूत्र लिखना:
- यौगिक के संघटक तत्वों के प्रतीक लिखिए।
- इन तत्वों की संयोजकताएँ लिखिए।
- संयोजकताओं का तिर्यक (criss-cross) कीजिए, अर्थात प्रत्येक तत्व की संयोजकता को दूसरे तत्व के प्रतीक के नीचे पादांक (subscript) के रूप में लिखिए। यदि तिर्यक करने के बाद किसी तत्व की संयोजकता 1 आती है, तो उसे नहीं लिखा जाता।
उदाहरण के लिए — हाइड्रोजन (संयोजकता 1) और क्लोरीन (संयोजकता 1) से HCl बनता है; हाइड्रोजन (संयोजकता 1) और सल्फर (संयोजकता 2) से H₂S बनता है; कार्बन (संयोजकता 4) और क्लोरीन (संयोजकता 1) से कार्बन टेट्राक्लोराइड CCl₄ बनता है।
9.5.2 आयनिक यौगिकों के सूत्र लिखना:
- पहले धनायन का प्रतीक और उसके बाद ऋणायन का प्रतीक लिखिए।
- आवेशों को प्रतीकों के नीचे (सुपरस्क्रिप्ट के रूप में नहीं) लिखिए।
- केवल संख्याओं का तिर्यक कीजिए और उन्हें पादांक के रूप में लिखिए।
- रासायनिक सूत्र यौगिक में तत्वों का सरलतम अनुपात दर्शाता है, अतः यदि तिर्यक करने के बाद पादांकों में कोई उभयनिष्ठ (common) गुणनखंड हो, तो उसे उससे भाग दिया जाता है (जैसे 2 और 4 को 2 से भाग देकर 1 और 2 प्राप्त होता है)।
उदाहरण:
- कैल्सियम (Ca²⁺) और क्लोराइड (Cl⁻) से — कैल्सियम क्लोराइड का सूत्र CaCl₂ बनता है।
- ऐलुमिनियम (Al³⁺) और ऑक्साइड (O²⁻) से — ऐलुमिनियम ऑक्साइड का सूत्र Al₂O₃ बनता है।
- मैग्नीशियम (Mg²⁺) और ऑक्साइड (O²⁻) से — दोनों की संयोजकता समान होने के कारण सूत्र Mg₂O₂ न लिखकर सरलतम रूप में MgO लिखा जाता है।
- कैल्सियम (Ca²⁺) और कार्बोनेट (CO₃²⁻) से — कैल्सियम कार्बोनेट का सूत्र CaCO₃ बनता है (Ca₂(CO₃)₂ नहीं, क्योंकि दोनों की संयोजकता समान है)।
- मैग्नीशियम (Mg²⁺) और हाइड्रॉक्साइड (OH⁻) से — मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड का सूत्र Mg(OH)₂ बनता है। जब सूत्र में एक ही प्रकार के दो या अधिक बहुपरमाण्विक आयन हों, तो उन्हें कोष्ठक ( ) में लिखा जाता है।
- ऐलुमिनियम (Al³⁺) और हाइड्रॉक्साइड (OH⁻) से — Al(OH)₃ बनता है, न कि AlOH₃।
- ऐलुमिनियम (Al³⁺) और सल्फेट (SO₄²⁻) से — ऐलुमिनियम सल्फेट का सूत्र Al₂(SO₄)₃ बनता है।
9.6 आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म
प्रयोगों से यह देखा गया है कि आयनिक यौगिक (जैसे सोडियम क्लोराइड, कॉपर सल्फेट) सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं परंतु किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में अघुलनशील रहते हैं। इसके विपरीत, अधिकांश सहसंयोजी यौगिक (जैसे कर्पूर, नैफ्थलीन) जल में अघुलनशील होते हैं परंतु किरोसिन और पेट्रोल में घुलनशील होते हैं।
- आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते, क्योंकि उनके आयन प्रबल बलों द्वारा निश्चित स्थितियों में बँधे रहते हैं। जब उन्हें जल में घोला जाता है, तो आयन गति करने के लिए मुक्त हो जाते हैं और विलयन विद्युत का चालन करता है।
- सुगर (चीनी) जैसे कुछ सहसंयोजी यौगिक जल में घुलनशील तो होते हैं परंतु विलयन में आयन नहीं बनाते, इसलिए विद्युत का चालन नहीं करते। कर्पूर और नैफ्थलीन जैसे अन्य सहसंयोजी यौगिक भी विद्युत का चालन नहीं करते।
- प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बलों के कारण आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक प्रायः उच्च होते हैं, जबकि सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक निम्न होते हैं।
9.7 सहसंयोजी यौगिकों का आण्विक द्रव्यमान (Molecular Mass)
आण्विक द्रव्यमान (Molecular Mass): किसी सहसंयोजी यौगिक के एक अणु में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों (atomic masses) के योग को उस यौगिक का आण्विक द्रव्यमान कहते हैं। परमाणु द्रव्यमान को u (परमाणु द्रव्यमान इकाई) में व्यक्त किया जाता है।
हल किया गया उदाहरण 9.4 — जल (H₂O) का आण्विक द्रव्यमान:
परमाणु द्रव्यमान — H = 1 u; O = 16 u
H₂O का आण्विक द्रव्यमान = (1 u × 2) + (16 u × 1) = 2 u + 16 u = 18 u
हल किया गया उदाहरण 9.5 — कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का आण्विक द्रव्यमान:
परमाणु द्रव्यमान — C = 12 u; O = 16 u
CO₂ का आण्विक द्रव्यमान = (12 u × 1) + (16 u × 2) = 12 u + 32 u = 44 u
ध्यान रहे — चूँकि आयनिक यौगिकों में आयन 3-D क्रिस्टल बनाते हैं, वे वास्तविक अणु नहीं बनाते; इसलिए आयनिक यौगिकों के लिए “आण्विक द्रव्यमान” के स्थान पर “सूत्र इकाई द्रव्यमान” का प्रयोग किया जाता है।
9.8 आयनिक यौगिकों का सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass)
सूत्र इकाई (Formula Unit): किसी आयनिक यौगिक में आयनों की सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात के संग्रह को सूत्र इकाई कहते हैं। सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): किसी सूत्र इकाई में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग को सूत्र इकाई द्रव्यमान कहते हैं।
हल किया गया उदाहरण 9.6 — सोडियम ऑक्साइड (Na₂O) का सूत्र इकाई द्रव्यमान:
परमाणु द्रव्यमान — Na = 23 u; O = 16 u
Na₂O का सूत्र इकाई द्रव्यमान = (23 u × 2) + (16 u × 1) = 46 u + 16 u = 62 u
हल किया गया उदाहरण 9.7 — कैल्सियम नाइट्रेट Ca(NO₃)₂ का सूत्र इकाई द्रव्यमान:
परमाणु द्रव्यमान — Ca = 40 u; N = 14 u; O = 16 u
- Ca का योगदान = 40 u × 1 = 40 u
- प्रत्येक NO₃ समूह का द्रव्यमान = (14 u × 1) + (16 u × 3) = 14 u + 48 u = 62 u
- दो NO₃ समूहों का योगदान = 62 u × 2 = 124 u
Ca(NO₃)₂ का सूत्र इकाई द्रव्यमान = 40 u + 124 u = 164 u
महत्वपूर्ण बिंदु (At a Glance)
- किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन हो सकता है और न ही नाश — यह द्रव्यमान संरक्षण का नियम है।
- किसी यौगिक में तत्व सदैव द्रव्यमान के एक स्थिर अनुपात में संयोजित होते हैं, चाहे यौगिक कहीं से भी प्राप्त किया जाए — यह स्थिर (निश्चित) अनुपात का नियम है।
- अणु एक विद्युत उदासीन कण है, जो एक से अधिक परमाणुओं से बनता है और स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है।
- परमाणु स्थायित्व प्राप्त करने के लिए संयोजित होकर अणु बनाते हैं; उन्हें बाँधे रखने वाले बल को रासायनिक आबंध कहते हैं।
- इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से सहसंयोजी आबंध बनता है; इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से आयनिक आबंध बनता है (धनायन एवं ऋणायन बनते हैं)।
- सहसंयोजी यौगिक का रासायनिक सूत्र तत्वों तथा प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या दर्शाता है।
- आयनिक यौगिक का रासायनिक सूत्र उसमें उपस्थित तत्वों की सरलतम पूर्ण संख्या के अनुपात को दर्शाता है।
- आण्विक द्रव्यमान — अणु के सभी संघटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग।
- सूत्र इकाई द्रव्यमान — आयनिक यौगिक की सूत्र इकाई में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग।
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