पाठ – 1
दो बैलों की कथा
In this post we have given the detailed notes of Class 9 Hindi chapter 1 दो बैलों की कथा These notes are useful for the students who are going to appear in Class 9 board exams
इस पोस्ट में कक्षा 9 के हिंदी के पाठ 1 दो बैलों की कथा के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं हिंदी विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT — Ganga (2026-27) |
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi (गंगा) |
| Chapter no. | Chapter 1 |
| Chapter Name | दो बैलों की कथा |
| Category | Class 9 Hindi |
| Medium | Hindi |
पाठ 1, दो बैलों की कथा
-प्रेमचंद
सारांश
लेखक प्रेमचंद कहानी की शुरुआत में गधे और बैल के स्वभाव की चर्चा करते हैं। गधे को संसार में सबसे बुद्धिहीन समझा जाता है, क्योंकि वह कितना भी सताया जाए, कभी क्रोध नहीं करता। बैल को भी लेखक गधे का छोटा भाई बताते हैं, पर बैल कभी-कभी अपना असंतोष प्रकट कर देता है, इसलिए उसका स्थान गधे से कुछ ऊँचा है। इसी भूमिका के बाद कहानी झूरी नामक किसान के दो बैलों, हीरा और मोती, पर आ जाती है। दोनों पछाईं जाति के सुंदर और मेहनती बैल थे तथा वर्षों साथ रहते-रहते उनमें गहरा भाईचारा हो गया था। दोनों मूक-भाषा में एक-दूसरे के मन की बात समझ लेते थे और काम के समय अधिक-से-अधिक बोझ अपनी गरदन पर लेने की होड़ करते थे।
पराए घर में और घर वापसी
एक दिन झूरी अपनी गाय गोइ को अपने साले गया के घर ससुराल भेजता है और साथ में हीरा-मोती को भी भेज देता है। बैलों को लगता है कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है, इसलिए वे रास्ते-भर विरोध करते हैं। नए स्थान पर पहुँचकर वे न तो चारा खाते हैं और न ही स्वयं को वहाँ का मानते हैं। रात होते ही दोनों जोर लगाकर पगहे तोड़ डालते हैं और घर की ओर भाग निकलते हैं। सुबह झूरी उन्हें द्वार पर खड़ा देखकर स्नेह से गले लगा लेता है और गाँव के बच्चे तालियाँ बजाकर उनका स्वागत करते हैं, पर झूरी की पत्नी इस पर बहुत क्रोधित होती है और बैलों को नमक-हराम कहकर उनके लिए सूखा भूसा देने का आदेश दे देती है।
गया के यहाँ यातना और भैरो की बेटी
दूसरे दिन गया फिर आकर दोनों बैलों को गाड़ी में जोतकर ले जाता है और घर पहुँचकर मोटी रस्सियों से बाँधकर पहले की शरारत की सजा देता है। अगले दिन जब गया उन्हें हल में जोतता है, तो दोनों बैल पाँव तक नहीं उठाते। गया के डंडों से क्रोधित होकर मोती हल तोड़ डालता है, पर हीरा उसे समझाकर हिंसा से रोक लेता है, क्योंकि यह उनकी जाति का धर्म नहीं है। इसी दौरान भैरो की छोटी बेटी, जिसकी माँ मर चुकी है और सौतेली माँ उसे सताती है, चुपके से दोनों बैलों को रोज़ रात में दो रोटियाँ खिलाने लगती है। बैलों को इस बच्ची से आत्मीयता हो जाती है। जब घर में बैलों की नाक में नाथ डालने की बात होती है, तो वही लड़की रात में उनकी रस्सियाँ खोल देती है और उन्हें भागने को कहती है, फिर स्वयं शोर मचाकर उन पर से संदेह हटाने का प्रयत्न करती है। दोनों मित्र भागकर रास्ता भटक जाते हैं और एक खेत में मटर चरकर आज़ादी का आनंद उठाते हैं तथा आपस में खेल-खेल में सींग भिड़ाते हैं।
साँड़ से भिड़ंत और काँजीहौस की यातना
आगे रास्ते में एक भयंकर साँड़ उन पर आक्रमण करता है। हीरा और मोती मिलकर, एक आगे से और एक पीछे से वार करके, साँड़ को घायल करके भगा देते हैं। विजय के नशे में वे फिर एक खेत में मटर चरने लगते हैं, जहाँ खेत के रखवाले उन्हें पकड़कर काँजीहौस (पशु-बाड़े) में बंद कर देते हैं। वहाँ कई दिनों तक उन्हें भूखा रखा जाता है। एक रात हीरा दीवार में सींग गड़ाकर उसे गिरा देता है, जिससे बाड़े के सभी जानवर भाग निकलते हैं, केवल दो गधे डर के मारे खड़े रह जाते हैं, जिन्हें मोती धकेलकर बाहर निकालता है। इस शरारत के लिए हीरा और मोती दोनों को फिर पकड़कर मोटी रस्सियों से बाँध दिया जाता है और एक सप्ताह तक भूखा रखा जाता है, जिससे दोनों बहुत दुर्बल हो जाते हैं।
नीलामी और घर लौटना
अंत में एक क्रूर दिखने वाला दढ़ियल आदमी उन्हें नीलामी में खरीद लेता है, जो असल में एक कसाई होता है। रास्ते में चलते हुए बैलों को अचानक पहचान आती है कि यह वही राह है जो उनके गाँव को जाती है, और वे खुशी से दौड़ पड़ते हैं। झूरी उन्हें देखकर दौड़ा आता है और गले लगा लेता है। दढ़ियल उन्हें अपना बताकर ज़बरदस्ती ले जाना चाहता है, पर मोती उस पर सींग से आक्रमण कर उसे गाँव से बाहर तक खदेड़ देता है और वह डरकर भाग जाता है। अंत में झूरी की पत्नी भी पछतावे के साथ आकर दोनों बैलों के माथे चूम लेती है और उन्हें भरपेट खली-चोकर खिलाया जाता है। इस प्रकार हीरा और मोती की मित्रता, स्वाभिमान और संघर्ष से भरी यह कथा सुखद अंत के साथ पूरी होती है।
We hope that Class 9 Hindi Chapter 1 दो बैलों की कथा notes in Hindi helped you. If you have any query about Class 9 Hindi Chapter 1 दो बैलों की कथा notes in Hindi or about any other notes of Class 9 Hindi Notes, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

