Skip to content
Criss Cross ClassesCriss Cross ClassesOur Content is Our Power
Menu
  • Home
  • CBSE
    • Hindi Medium
      • Class 9
      • Class 10
      • Class 11
      • Class 12
    • English Medium
      • Class 9
      • Class 10
      • Class 11
      • Class 12
  • State Board
    • UP Board (UPMSP)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Bihar Board (BSEB)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Chhattisgarh Board (CGBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Haryana Board (HBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Jharkhand Board (JAC)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Uttarakhand Board (UBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Madhya Pradesh Board (MPBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Punjab Board (PSEB)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
    • Rajasthan Board (RBSE)
      • Hindi Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
      • English Medium
        • Class 9
        • Class 10
        • Class 11
        • Class 12
  • Contact us
  • About us
Menu
Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? Notes in Hindi

क्या लिखूँ? (CH- 2) Detailed Summary || Class 9 Hindi गंगा (CH- 2) ||

Posted on August 17, 2026 by

पाठ – 2

क्या लिखूँ?

In this post we have given the detailed notes of Class 9 Hindi chapter 2 क्या लिखूँ? These notes are useful for the students who are going to appear in Class 9 board exams

इस पोस्ट में कक्षा 9 के हिंदी के पाठ 2 क्या लिखूँ? के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं हिंदी विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT — Ganga (2026-27)
ClassClass 9
SubjectHindi (गंगा)
Chapter no.Chapter 2
Chapter Nameक्या लिखूँ?
CategoryClass 9 Hindi
MediumHindi
Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ?
Explore the topics
पाठ – 2
क्या लिखूँ?
पाठ 2, क्या लिखूँ?
सारांश
निबंध लिखने की समस्या
निबंधशास्त्र के आचार्यों के विचार
मानटेन की पद्धति और अमीर खुसरो की कथा
दूर के ढोल सुहावने और समाज-सुधार का विवेचन

पाठ 2, क्या लिखूँ?

-पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

सारांश

निबंध लिखने की समस्या

लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी अपने निबंध की शुरुआत इस बात से करते हैं कि आज उन्हें कुछ-न-कुछ लिखना ही पड़ेगा। वे अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंधकार ए.जी. गार्डिनर का कथन याद करते हैं, जिनके अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है, जिसमें मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उठता है और तब विषय चाहे जो भी हो, लेखक उसमें अपने हृदय के भाव भर देता है। गार्डिनर का उदाहरण है कि जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है, वैसे ही मनोभाव व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय उपयुक्त है, क्योंकि असली वस्तु हैट है, खूँटी नहीं। लेखक कहते हैं कि इस कथन में सच्चाई तो है, पर उनकी अपनी कठिनाई यह है कि उन्होंने कभी वह मानसिक स्थिति अनुभव ही नहीं की, जिसमें भाव अपने-आप उमड़ पड़ते हों। उन्हें तो सोचना पड़ता है, चिंता और परिश्रम करना पड़ता है, तभी वे कोई निबंध लिख पाते हैं। आज उनकी कठिनाई और बड़ी है क्योंकि उन्हें कोई साधारण निबंध नहीं, बल्कि दो आदर्श निबंध लिखने हैं। नमिता का आग्रह है कि वे ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ विषय पर लिखें और अमिता चाहती है कि वे ‘समाज-सुधार’ पर लिखें, क्योंकि ये दोनों विषय परीक्षा में आ चुके हैं और लेखक को उन्हें निबंध-रचना का रहस्य समझाना है। लेखक को यह भी चिंता है कि इतने बड़े और गंभीर विषयों को मात्र पाँच पेज में कैसे समेटा जाए।

निबंधशास्त्र के आचार्यों के विचार

विषय पर लिखने से पहले लेखक यह जान लेना चाहते हैं कि आदर्श निबंध किसे कहते हैं और वह कैसे लिखा जाता है, इसके लिए वे निबंधशास्त्र के विद्वानों की रचनाएँ देखते हैं। एक विद्वान का मत है कि निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि बड़े निबंध में रचना का सौंदर्य बना नहीं रह पाता — यह बात लेखक को अपने लाभ की लगती है, क्योंकि उन्हें वैसे भी थोड़े ही समय में लिखना है। उन्हीं आचार्य के अनुसार निबंध के दो प्रमुख अंग होते हैं — सामग्री और शैली। सामग्री जुटाने के लिए विषय का गहन अध्ययन और मनन आवश्यक है, परंतु लेखक के पास न तो पहले से इन विषयों पर अध्ययन करने का समय था और न ही पास में कोई विश्वकोश या ग्रंथ है, इसलिए उन्हें अपने ही ज्ञान के भरोसे लिखना होगा। विद्वानों का यह भी कथन है कि निबंध लिखने से पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए, पर लेखक को यह असंभव जान पड़ता है — वे तो निबंध का सार निबंध लिखने के बाद बता सकते हैं, पहले नहीं। वे बताते हैं कि गार्डिनर को भी अपने लेखों का शीर्षक सोचने में सबसे अधिक कठिनाई होती थी, यहाँ तक कि शेक्सपियर को भी नाटक लिखने से ज़्यादा कठिनाई उनका नाम रखने में हुई, तभी घबराकर उन्होंने एक नाटक का नाम ही ‘जैसा तुम चाहो’ रख दिया।

अब लेखक शैली पर विचार करते हैं। आचार्यों के अनुसार भाषा में प्रवाह होना चाहिए और वाक्य छोटे-छोटे तथा परस्पर संबद्ध होने चाहिए — यह बात लेखक को ठीक तो लगती है, पर वे व्यंग्य करते हैं कि वे तो ‘मास्टर’ हैं, इसलिए अपनी विद्वता दिखाने और गौरव स्थापित करने के लिए उनके वाक्य कम-से-कम आधे पृष्ठ में समाप्त होने चाहिए, जैसे बाणभट्ट ने कादंबरी में लिखे हैं। वाक्यों में जान-बूझकर अस्पष्टता भी होनी चाहिए, क्योंकि इससे गंभीरता आती है — जैसे संस्कृत कवि श्रीहर्ष और कवि सेनापति ने अपनी रचनाएँ दुर्बोध बना रखी हैं। इस तरह के परस्पर विरोधी नियमों के बीच लेखक असमंजस में पड़ जाते हैं कि आखिर क्या किया जाए।

मानटेन की पद्धति और अमीर खुसरो की कथा

इसी उलझन में लेखक अंग्रेजी निबंधकारों की दूसरी पद्धति की चर्चा करते हैं, जिसके जन्मदाता मानटेन (मॉन्तेन) माने जाते हैं। इस पद्धति में लेखक अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए को ही सीधे-सीधे निबंध में लिख देता है। ऐसे निबंधों की विशेषता यह है कि वे मन की स्वच्छंद रचनाएँ होते हैं, जिनमें न कवि-जैसी उदात्त कल्पना होती है, न विद्वान-जैसा गंभीर तर्क, बल्कि लेखक की सच्ची अनुभूति और सच्चे भावों की सहज अभिव्यक्ति होती है। लेखक सोचते हैं कि वे भी इसी पद्धति को अपनाकर लिख सकते हैं, पर समस्या यह है कि उन्हें एक साथ दो निबंध लिखने हैं। तभी उन्हें अमीर खुसरो की कथा याद आती है — प्यास लगने पर खुसरो एक कुएँ पर पहुँचे, जहाँ चार स्त्रियाँ पानी भर रही थीं और पानी देने के बदले उन्होंने क्रमशः खीर, चरखे, कुत्ते और ढोल पर कविता सुनाने की माँग रखी। प्रतिभाशाली खुसरो ने एक ही दोहे में चारों की इच्छा पूरी कर दी — “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।” लेखक कहते हैं कि उनमें खुसरो जैसी प्रतिभा तो नहीं, पर इसी युक्ति का सहारा लेकर वे दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेटने का निश्चय करते हैं।

दूर के ढोल सुहावने और समाज-सुधार का विवेचन

इसके बाद लेखक वास्तविक विवेचन आरंभ करते हैं। वे कहते हैं कि दूर के ढोल इसलिए सुहावने लगते हैं क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक पहुँचते-पहुँचते मधुर हो जाती है — पास बैठे लोगों के कान के पर्दे भले फटें, पर दूर नदी-तट पर संध्या के समय वही ध्वनि किसी के मन में विवाह-उत्सव और लजीली नव-वधू की मधुर कल्पना जगा देती है। इसी तरह जो लोग यथार्थ से दूर होते हैं, उन्हें उसकी कठोरता का अनुभव नहीं होता। यही कारण है कि संसार के संघर्ष से दूर तरुणों को जीवन का चित्र मनमोहक लगता है, और अपने बचपन-जवानी से दूर हो चुके वृद्धों को अपना बीता समय सुखद स्मृति लगता है। तरुण भविष्य के सपने देखते हैं और वृद्ध अतीत के — दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, तरुण भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं इसलिए वे क्रांति के समर्थक बनते हैं, जबकि वृद्ध अतीत को वर्तमान में खींचना चाहते हैं इसलिए वे अतीत-गौरव के संरक्षक बन जाते हैं। इसी खींचतान से वर्तमान सदा क्षुब्ध और परिवर्तनशील बना रहता है, और यही समाज-सुधार की निरंतर आवश्यकता को जन्म देता है।

लेखक आगे बताते हैं कि मनुष्य-जाति के इतिहास में ऐसा कोई काल नहीं रहा जब सुधार की ज़रूरत न रही हो। भारत के इतिहास में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी जैसे अनेक सुधारक हुए, फिर भी सुधारों का सिलसिला कभी समाप्त नहीं हुआ, क्योंकि जीवन में नित नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और उनके नए सुधार भी होते रहते हैं — जो कभी सुधार थे, वे ही आगे चलकर दोष बन जाते हैं और उनका फिर नया सुधार करना पड़ता है। इसी निरंतर परिवर्तन के कारण जीवन को प्रगतिशील कहा गया है। लेखक हिंदी के प्रगतिशील साहित्य का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि आज के प्रगतिशील साहित्यकार अपने साहित्य को भविष्य का गौरव मानते हैं, पर समय बीतने पर वह भी अतीत की स्मृति बनकर रह जाएगा और आज के तरुण भी वृद्ध होकर अतीत के ही सपने देखेंगे, तब उनके स्थान पर तरुणों की नई पीढ़ी आकर फिर भविष्य के सपने देखेगी। लेखक निबंध का समापन इसी भाव से करते हैं कि तरुणों और वृद्धों दोनों के सपने सुखद इसलिए होते हैं, क्योंकि दूर के ढोल सुहावने होते हैं — इस तरह लेखक ने अत्यंत कुशलता से दोनों कठिन विषयों को एक ही सूत्र में पिरोकर, हास्य-व्यंग्य और आत्मपरक शैली में एक आदर्श निबंध रच दिया।

We hope that Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? notes in Hindi helped you. If you have any query about Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? notes in Hindi or about any other notes of Class 9 Hindi Notes, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

Category: Class 9 Hindi

Post navigation

← दो बैलों की कथा (CH- 1) Detailed Summary || Class 9 Hindi गंगा (CH- 1) ||
संवादहीन (CH- 3) Detailed Summary || Class 9 Hindi गंगा (CH- 3) || →

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Download our App Now - Criss Cross Classes

Free WhatsApp Group

Free Telegram Group

Our Application

Ask Your Doubts

MORE NOTES

  • Class 10 Hindi (42)
  • Class 10 Math Notes in Hindi (15)
  • Class 10 Science Notes in Hindi (16)
  • Class 10 SST Notes in Hindi (22)
  • Class 11 Economics Notes in Hindi (14)
  • Class 11 Geography Notes in Hindi (23)
  • Class 11 Hindi (23)
  • Class 11 History Notes in Hindi (11)
  • Class 11 Physical Education Notes in Hindi (10)
  • Class 11 Political Science Notes in Hindi (20)
  • Class 11 Sociology Notes in Hindi (10)
  • Class 12 Economics Notes in Hindi (20)
  • Class 12 Geography Notes in Hindi (23)
  • Class 12 Hindi (51)
  • Class 12 History Notes in Hindi (16)
  • Class 12 Home Science Notes in Hindi (16)
  • Class 12 Notes (21)
  • Class 12 Physical Education Notes in Hindi (10)
  • Class 12 Political Science Notes in Hindi (19)
  • Class 12 Sociology Notes in Hindi (16)
  • Class 9 Hindi (53)
  • Class 9 Math Notes in Hindi (23)
  • Class 9 Science Notes in Hindi (28)
  • Class 9 Social Science Notes in Hindi (29)
  • Physical Education CUET (8)
  • Uncategorized (1)
© 2026 Criss Cross Classes | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme