पाठ – 6
गति पर बलों का प्रभाव
In this post we have given the detailed notes of class 9 Science chapter 6 How Forces Affect Motion in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 board exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के विज्ञान के पाठ 6 गति पर बलों का प्रभाव के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT — Exploration / अन्वेषण (2026-27) |
| Class | Class 9 |
| Subject | Science |
| Chapter no. | Chapter 6 |
| Chapter Name | गति पर बलों का प्रभाव (How Forces Affect Motion) |
| Category | Class 9 Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
पाठ 6, गति पर बलों का प्रभाव
बल की अवधारणा (The Concept of Force)
बल (Force): बल किसी वस्तु को विरामावस्था से गति में ला सकता है, गतिशील वस्तु की चाल और गति की दिशा को परिवर्तित कर सकता है और यहाँ तक कि किसी वस्तु के आकार में भी परिवर्तन कर सकता है। उदाहरण के लिए — विरामावस्था में रखी गेंद पर बल लगाने से वह गति करने लगती है, क्रिकेट के बल्ले से लगाया गया बल गेंद की दिशा बदल देता है और अँगुलियों द्वारा लगाए गए बल से नींबू को निचोड़ा जा सकता है।
- बल एक ऐसी भौतिक राशि (physical quantity) है जिसके लिए परिमाण (magnitude) और मात्रक के साथ-साथ उसकी दिशा भी बतानी पड़ती है, ठीक वैसे ही जैसे स्थिति, विस्थापन, वेग और त्वरण के लिए बताई जाती है।
- बल का SI मात्रक न्यूटन (newton) है, जिसका प्रतीक N है। जब किसी मात्रक का नाम किसी व्यक्ति के नाम पर रखा जाता है तो उसका पूरा नाम छोटे अक्षर से शुरू होता है (newton), किंतु प्रतीक बड़े अक्षर से लिखा जाता है (N)।
- बल के परिमाण को कमानीदार तुला (spring balance) से मापा जा सकता है — यह न केवल वस्तु का भार बल्कि सामान्य रूप से किसी भी बल का परिमाण माप सकती है।
- यदि किसी वस्तु पर लगाए गए बल का परिमाण या दिशा अथवा दोनों ही परिवर्तित हो जाते हैं तो उस बल का प्रभाव भी परिवर्तित हो जाता है।
संतुलित एवं असंतुलित बल (Balanced and Unbalanced Forces)
दैनिक जीवन में प्रायः किसी वस्तु पर एक से अधिक बल लगते हैं। उदाहरण के लिए — किसी बॉक्स को धकेलते समय, धकेलने वाले बल के अतिरिक्त गति की विपरीत दिशा में घर्षण बल भी लगता है। इसी प्रकार जल पर तैरती हुई गेंद पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल (नीचे की ओर) और द्रव का उत्प्लावन बल (ऊपर की ओर) — दोनों साथ-साथ कार्य करते हैं।
- संतुलित बल (Balanced forces): यदि दो बल परिमाण में बराबर किंतु दिशा में विपरीत हों (जैसे रस्साकशी में दोनों टीमें बराबर बल से खींचें), तो रस्सा विस्थापित नहीं होता। ऐसे बल संतुलित बल कहलाते हैं।
- असंतुलित बल (Unbalanced forces): यदि एक टीम अधिक बल लगाए, तो बल असंतुलित हो जाते हैं और रस्सा अधिक बल वाली दिशा में गति करता है।
- परिणामी बल (Net force): यदि बल विपरीत दिशा और असमान परिमाण के हों, तो परिणामी बल = दोनों बलों के परिमाणों का अंतर, और दिशा अधिक परिमाण वाले बल की दिशा में होती है। यदि दोनों बल समान दिशा में हों, तो परिणामी बल = दोनों बलों का योग।
- यदि वस्तु पर लगे बल असंतुलित हों तो उस पर एक अशून्य परिणामी बल कार्य करता है, जिससे वस्तु की गति में परिवर्तन होता है। किसी वस्तु की गति केवल परिणामी बल पर निर्भर करती है, चाहे उस पर कितने भी बल कार्य कर रहे हों।
उदाहरण 6.1 (हल सहित):
एक मेज पर रखे गुटके पर 10 N और 6 N के दो बल तीन अलग-अलग स्थितियों में लग रहे हैं। प्रत्येक स्थिति में परिणामी बल का परिमाण और दिशा ज्ञात कीजिए।
- (क) दोनों बल एक ही दिशा (दाईं ओर) में लगें: परिणामी बल = 10 N + 6 N = 16 N, दाईं ओर।
- (ख) 10 N दाईं ओर तथा 6 N बाईं ओर लगे: परिणामी बल = 10 N − 6 N = 4 N, दाईं ओर (अधिक बल की दिशा में)।
- (ग) 6 N दाईं ओर तथा 10 N बाईं ओर लगे: परिणामी बल = 10 N − 6 N = 4 N, बाईं ओर।
घर्षण बल — प्रायः अनदेखा परंतु सदैव विद्यमान बल (Force of Friction)
घर्षण बल (Force of friction): जब किसी स्थिर वस्तु पर आगे की दिशा में बल लगाया जाता है, तो वस्तु की निचली सतह और फर्श के मध्य उत्पन्न घर्षण बल, आपके द्वारा लगाए गए बल की विपरीत दिशा में कार्य करता है। वस्तु तभी गति करना आरंभ करती है जब लगाया गया बल घर्षण बल से अधिक हो, जिससे गति की दिशा में एक परिणामी बल कार्य करने लगे।
- क्रियाकलाप 6.1 और 6.2 (सिक्कों के ढेर को रबड़ बैंड से अलग-अलग सतहों पर छोड़ने तथा कमानीदार तुला से खींचने के प्रयोग) से यह निष्कर्ष निकलता है कि घर्षण बल संपर्क में आने वाली सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है — जब घर्षण बल कम होता है, वस्तु का वेग धीरे-धीरे घटता है और वह अधिक दूरी तय करके विरामावस्था में आती है।
- किसी धकेली जा रही वस्तु पर लागू बल और घर्षण बल के अतिरिक्त, गुरुत्वाकर्षण बल (भार) नीचे की दिशा में तथा सतह द्वारा लगाया गया अभिलंब बल (normal force) ऊपर की दिशा में भी कार्य करता है — ये दोनों बल आपस में संतुलित रहते हैं।
- गतिमान वस्तु पर बल लगाना बंद करने पर घर्षण बल उसे धीरे-धीरे विरामावस्था में ले आता है। इसीलिए किसी वस्तु को नियत वेग से गतिमान रखने के लिए घर्षण बल के विरुद्ध निरंतर बल लगाना पड़ता है।
न्यूटन का गति का प्रथम नियम (Newton’s First Law of Motion)
प्राचीन काल में यह मान लिया गया था कि किसी वस्तु को नियत वेग से गतिमान रखने के लिए भी बल की आवश्यकता होती है। सत्रहवीं शताब्दी में गैलीलियो गैलिली ने विचार-प्रयोगों से दर्शाया कि यदि किसी वस्तु की गति में आने वाली सभी बाधाएँ हटा दी जाएँ, तो वह अनिश्चित काल तक गतिमान रहेगी। आइज़क न्यूटन ने वस्तुओं की इस प्रवृत्ति को जड़त्व (inertia) कहा और इसी विचार के आधार पर अपना प्रथम नियम प्रतिपादित किया। न्यूटन ने वर्ष 1687 में गति के तीन नियम प्रस्तुत किए, जो विज्ञान के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण क्षण थे।
न्यूटन का प्रथम नियम (कथन): कोई वस्तु विरामावस्था में है तो वह विरामावस्था में ही रहेगी, और यदि गति की अवस्था में है तो नियत वेग से गति करती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई परिणामी बल कार्य न करे।
- दूसरे शब्दों में — यदि किसी वस्तु पर लगने वाला परिणामी बल शून्य है, तो वस्तु न तो गति करना आरंभ कर सकती है और न ही अपने वेग में परिवर्तन कर सकती है; ऐसी स्थिति में उसका त्वरण भी शून्य होता है।
- इसी कारण न्यूटन के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम (law of inertia) भी कहा जाता है — यह वस्तु की विराम अथवा एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
- विरामावस्था का अर्थ है वेग शून्य होना। नियत वेग का अर्थ है वेग के परिमाण और दिशा — दोनों में कोई परिवर्तन न होना।
उदाहरण 6.2 (हल सहित):
कोई व्यक्ति किसी गतिमान बॉक्स पर आगे की दिशा में उतना ही बल लगा रहा है जितना घर्षण बल उसकी निचली सतह और फर्श के मध्य लग रहा है। क्या बॉक्स गतिमान रहेगा या रुक जाएगा?
हल: बॉक्स पर लगने वाले दोनों बल (लगाया गया बल तथा घर्षण बल) बराबर और विपरीत दिशा में हैं, अतः वे एक-दूसरे को संतुलित करते हैं। परिणामी बल शून्य है, इसलिए न्यूटन के प्रथम नियम के अनुसार बॉक्स नियत वेग से गतिमान रहेगा।
उदाहरण 6.3:
जब किसी वस्तु पर परिणामी बल शून्य होता है, तो दो संभावनाएँ होती हैं — या तो वस्तु विरामावस्था में रहती है (जिसका स्थिति-समय ग्राफ समय-अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा और वेग-समय ग्राफ शून्य पर सीधी रेखा होता है), या वह नियत वेग से गतिमान रहती है (जिसका स्थिति-समय ग्राफ झुकी हुई सीधी रेखा तथा वेग-समय ग्राफ समय-अक्ष के समानांतर सीधी रेखा होता है)।
न्यूटन का गति का द्वितीय नियम (Newton’s Second Law of Motion)
किसी वस्तु पर लगने वाला बल उसे गति में ला सकता है, विरामावस्था में ला सकता है, अथवा उसके वेग को परिवर्तित कर सकता है — अर्थात बल त्वरण (acceleration) उत्पन्न करता है। क्रियाकलाप 6.3 और 6.4 (गाड़ी-घिरनी निकाय पर अलग-अलग बल तथा अलग-अलग द्रव्यमान से त्वरण मापने के प्रयोग) से निम्नलिखित निष्कर्ष प्राप्त होते हैं:
- नियत द्रव्यमान वाली वस्तु का त्वरण, उस पर लगाए गए परिणामी बल के बढ़ने के साथ बढ़ता है (त्वरण ∝ बल)।
- किसी दिए गए बल के परिमाण के लिए, उत्पन्न त्वरण वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है (त्वरण ∝ 1/द्रव्यमान)।
न्यूटन का द्वितीय नियम (कथन): जब किसी वस्तु पर कोई परिणामी बल कार्य करता है, तो वस्तु परिणामी बल की दिशा में त्वरित होती है। त्वरण का परिमाण परिणामी बल के परिमाण के समानुपाती तथा वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
सूत्र (Formula):
गणितीय रूप में — a = F/m अथवा F = ma (समीकरण 6.2), जहाँ a त्वरण, F बल और m वस्तु का द्रव्यमान है। त्वरण की दिशा वही होती है जो परिणामी बल की दिशा होती है।
- यदि m = 1 kg तथा a = 1 m s⁻² हो, तो F = 1 kg × 1 m s⁻² = 1 kg m s⁻² = 1 N। अर्थात एक न्यूटन बल वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 m s⁻² का त्वरण उत्पन्न करता है।
- गुरुत्वाकर्षण बल के कारण त्वरण (g) पृथ्वी की सतह के निकट लगभग नियत मान g = 9.8 m s⁻² (आकलन के लिए 10 m s⁻²) रखता है और वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। किसी m द्रव्यमान की वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल — F = mg (समीकरण 6.3)।
संवेग (Momentum): न्यूटन के द्वितीय नियम को अधिक संपूर्णता से संवेग के पदों में व्यक्त किया जाता है। किसी वस्तु का संवेग, उसके द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है, और इसकी दिशा वेग की दिशा के समान होती है। इस रूप में, न्यूटन का द्वितीय नियम बताता है कि किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर परिणामी बल के समानुपाती होती है और परिवर्तन उसी दिशा में होता है जिसमें परिणामी बल कार्य करता है। संवेग के पदों में व्यक्त यह नियम उन स्थितियों में भी मान्य रहता है जहाँ वस्तु का द्रव्यमान नियत नहीं होता।
दैनिक जीवन में द्वितीय नियम के अनुप्रयोग:
- क्रिकेट में तेज गेंद पकड़ते समय क्षेत्ररक्षक हाथों को पीछे खींचता है — इससे वेग शून्य होने की अवधि बढ़ जाती है, त्वरण का परिमाण घट जाता है, अतः गेंद रोकने के लिए कम बल चाहिए और चोट लगने की संभावना घट जाती है।
- वाहनों में एयरबैग — टक्कर के समय एयरबैग फूलकर नरम गद्दी बन जाता है, जिससे टक्कर में लगने वाला समय बढ़ता है, त्वरण घटता है, और व्यक्ति पर लगने वाला बल तथा चोट लगने का खतरा कम हो जाता है।
- नारियल को एक ही बार में तोड़ते समय अत्यंत तीव्र वेग से कठोर सतह से टकराया जाता है — नारियल बहुत कम समय में रुकता है, इसलिए धरती को उस पर बहुत अधिक बल लगाना पड़ता है, जिससे नारियल का खोल टूट जाता है।
उदाहरण 6.4 (हल सहित):
एक भारोत्तोलक 10 kg द्रव्यमान की भारोत्तोलन दंड को पकड़े हुए है, जिसके दोनों ओर 10-10 kg द्रव्यमान की चकतियाँ स्थिर हैं। इस निकाय को स्थिर रखने के लिए वह कितना बल लगा रही है?
हल: चकतियों सहित भारोत्तोलन दंड का कुल द्रव्यमान = 10 + 10 + 10 = 30 kg।
गुरुत्वाकर्षण बल, F = mg = 30 kg × 9.8 m s⁻² = 294 N (नीचे की दिशा में)।
निकाय को स्थिर रखने के लिए भारोत्तोलक को इसके बराबर परंतु विपरीत दिशा में बल लगाना होगा। अतः वह 294 N ऊपर की दिशा में बल लगा रही है।
उदाहरण 6.5 (हल सहित):
एक विद्यार्थी क्षैतिज सतह पर रखे 25 kg के एक स्थिर गुटके को धकेलने का प्रयास कर रहा है। गुटके की गति का विरोध करने वाला अधिकतम घर्षण बल 50 N है। यदि विद्यार्थी इसे (i) 50 N और (ii) 55 N के नियत बल से आगे की दिशा में धकेलता है, तो 2 सेकंड में गुटके का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
हल (i): लगाया गया बल (50 N) घर्षण बल (50 N) के बराबर है, अतः दोनों बल संतुलित हैं और परिणामी बल शून्य है। इसलिए गुटका स्थिर ही रहेगा।
हल (ii): परिणामी बल = 55 N − 50 N = 5 N। द्रव्यमान m = 25 kg।
न्यूटन के द्वितीय नियम से त्वरण, a = F/m = 5 N / 25 kg = 0.2 m s⁻²।
गति के समीकरण s = ut + ½at² का प्रयोग करने पर, जहाँ u = 0:
s = 0 × 2 + ½ × 0.2 × (2)² = ½ × 0.2 × 4 = 0.4 m (आगे की दिशा में)।
उदाहरण 6.6 (हल सहित):
पूर्व दिशा की ओर गतिमान 1500 kg द्रव्यमान की एक स्पोर्ट्स कार का वेग-समय ग्राफ दिया गया है। कार पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए — (i) 0 s से 5 s तक, (ii) 5 s से 10 s तक, (iii) 10 s से 15 s तक।
हल (i) 0 s से 5 s: u = 0 m s⁻¹, v = 10 m s⁻¹, t = 5 s। गति के समीकरण v = u + at से,
10 = 0 + a × 5 ⟹ a = 2 m s⁻²।
F = ma = 1500 kg × 2 m s⁻² = 3000 N, पूर्व दिशा की ओर।
हल (ii) 5 s से 10 s: वेग-समय ग्राफ समय-अक्ष के समानांतर है, अर्थात कार नियत वेग से गति कर रही है। अतः कोई परिणामी बल कार्य नहीं कर रहा (0 N)।
हल (iii) 10 s से 15 s: u = 10 m s⁻¹, v = 0 m s⁻¹, t = 5 s।
0 = 10 + a × 5 ⟹ a = −2 m s⁻²।
F = ma = 1500 × (−2) = −3000 N। ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि बल गति की दिशा के विपरीत अर्थात पश्चिम दिशा की ओर 3000 N कार्य कर रहा है।
न्यूटन का गति का तृतीय नियम (Newton’s Third Law of Motion)
बल लगने के लिए कम-से-कम दो वस्तुओं का परस्पर क्रिया करना आवश्यक है। जब आप अपने पैर से गेंद को ठोकर मारते हैं, तो आपको गेंद द्वारा अपने पैर पर लगाए गए बल का भी अनुभव होता है। क्रियाकलाप 6.5 (पहियों वाली कुर्सी पर बैठकर मेज को धकेलना) और क्रियाकलाप 6.6 (दो कमानीदार तुलाओं को जोड़कर खींचना) से प्रयोगात्मक रूप से यह सिद्ध होता है कि दो वस्तुओं के बीच परस्पर लगने वाले बलों का परिमाण बराबर होता है।
न्यूटन का तृतीय नियम (कथन): जब भी कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तो दूसरी वस्तु भी उसी समय पहली वस्तु पर बराबर बल विपरीत दिशा में लगाती है।
- बल सदैव युग्मों (pairs) में होते हैं, परंतु ये दोनों बल दो अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को संतुलित नहीं करते। (यदि दो समान-विपरीत बल एक ही वस्तु पर कार्य करें, तभी वे एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।)
- यह नियम सभी प्रकार के बलों — संपर्क (contact) तथा असंपर्क (non-contact), जैसे चुंबकीय बल, स्थिरवैद्युत बल और गुरुत्वाकर्षण बल — पर समान रूप से लागू होता है।
दैनिक जीवन में उदाहरण:
- पेड़ पर चढ़ना: नारियल या ताड़ के पेड़ पर चढ़ने वाले व्यक्ति के पैर तने पर नीचे की ओर धक्का देते हैं; तने और पैरों के मध्य घर्षण व्यक्ति को ऊपर की ओर बराबर बल से धकेलता है — इसीलिए चिकने तनों (कम घर्षण) पर चढ़ना कठिन होता है।
- डोंगी चलाना: जब डोंगी चालक चप्पू से जल को पीछे धकेलता है, तो जल चप्पू को बराबर बल से आगे धकेलता है; दोनों बल अलग-अलग वस्तुओं (चप्पू और जल) पर कार्य करते हैं, इसलिए निरस्त नहीं होते और डोंगी आगे बढ़ती है। जितना अधिक बल जल पर लगाया जाए, डोंगी का वेग उतना ही अधिक बढ़ता है।
- चलना/दौड़ना: पैर पृथ्वी की सतह को पीछे धकेलते हैं और पृथ्वी की सतह घर्षण के रूप में पैरों पर विपरीत दिशा में बल लगाती है, जिससे व्यक्ति आगे बढ़ता है। यहाँ घर्षण गति में सहायक है, विरोधी नहीं। इसीलिए जूतों के तलवों और वाहनों के टायरों पर खाँचे बनाए जाते हैं, ताकि घर्षण बढ़े।
- रॉकेट प्रमोचन: रॉकेट का इंजन गैस उत्पन्न करके उसे नीचे की दिशा में बाहर निकालता है; निष्कासित गैस रॉकेट पर ऊपर की दिशा में बराबर और विपरीत बल लगाती है। यह बल रॉकेट के भार से अधिक होने पर परिणामी बल ऊपर की ओर हो जाता है और रॉकेट उड़ान भरता है। इसी सिद्धांत का उपयोग करके चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सॉफ्ट लैंडिंग के लिए अपनी गति धीमी की थी (इंजन को गति की दिशा में गैस छोड़ने पर विपरीत बल लगता है)।
उदाहरण 6.7:
पृथ्वी और फल एक-दूसरे पर बराबर और विपरीत गुरुत्वाकर्षण बल लगाते हैं, तो फल पृथ्वी की ओर गति क्यों करता है जबकि पृथ्वी फल की ओर गति करती हुई प्रतीत नहीं होती?
उत्तर: यद्यपि दोनों पर बल का परिमाण बराबर है, पृथ्वी का द्रव्यमान (फल की तुलना में) इतना अधिक है कि a = F/m के अनुसार पृथ्वी का त्वरण अत्यंत कम होता है। अतः पृथ्वी पर पड़ने वाला प्रभाव इतना कम है कि वह हमारे संज्ञान में नहीं आता।
उदाहरण 6.8 (हल सहित):
जब 0.1 kg की गोली 5 kg की बंदूक से 2 N के बल से दागी जाती है, तो बंदूक पीछे की ओर प्रतिक्षेपित (recoil) होती है। गोली और बंदूक के प्रारंभिक त्वरण का परिमाण ज्ञात कीजिए।
हल: न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार बंदूक पर लगने वाला प्रतिक्षेप बल भी 2 N है (गोली पर लगे बल के बराबर और विपरीत)।
न्यूटन के द्वितीय नियम से, बंदूक का त्वरण = बल/बंदूक का द्रव्यमान = 2 N / 5 kg = 0.4 m s⁻²।
गोली का त्वरण = बल/गोली का द्रव्यमान = 2 N / 0.1 kg = 20 m s⁻²।
यद्यपि दोनों पर लगे बल परिमाण में बराबर हैं, फिर भी त्वरण के मान भिन्न हैं क्योंकि दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान भिन्न-भिन्न हैं।
वस्तुओं के निकाय पर लगने वाले बल (Forces Acting on a System of Objects)
अब तक न्यूटन के तीन नियम एकल वस्तु पर लागू करके पढ़े गए। परंतु यदि दो या अधिक वस्तुएँ परस्पर जुड़ी हों, तो उन्हें एक निकाय (system) मानकर विश्लेषण किया जा सकता है।
- मान लीजिए m₁ और m₂ द्रव्यमान की दो पेटिकाएँ एक डोरी से जुड़ी हुई घर्षण-रहित क्षैतिज सतह पर रखी हैं। एक बाह्य बल F पेटिका 1 को दाईं ओर खींचता है। पेटिका 1, डोरी के माध्यम से पेटिका 2 पर बल लगाती है, और न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार पेटिका 2 भी डोरी के माध्यम से पेटिका 1 पर बराबर-विपरीत बल (तनाव, T) लगाती है।
- दोनों पेटिकाओं और डोरी को एक ही निकाय मानने पर, निकाय के भीतर के बल (तनाव T) आंतरिक बल हैं जिन्हें अलग से विचार करने की आवश्यकता नहीं; केवल बाह्य बल F ही निकाय के त्वरण के लिए उत्तरदायी है।
सूत्र (Formula):
निकाय का त्वरण, a = F / (m₁ + m₂) (समीकरण 6.4)। अर्थात दो पेटिकाओं का निकाय ठीक उसी प्रकार त्वरित होता है जैसे (m₁ + m₂) द्रव्यमान की एक अकेली वस्तु त्वरित होती है। जुड़ी हुई वस्तुओं को एक निकाय मानकर विश्लेषण करना अक्सर सरल हो जाता है — इससे न्यूटन के नियमों की जटिल निकायों के अध्ययन में उपादेयता स्पष्ट होती है।
न्यूटन के तीनों नियमों का सारांश
| नियम | कथन | सूत्र |
| प्रथम नियम (जड़त्व का नियम) | वस्तु विरामावस्था में रहेगी या नियत वेग से गति करती रहेगी, जब तक उस पर कोई परिणामी बल कार्य न करे। | परिणामी बल = 0 ⟹ त्वरण = 0 |
| द्वितीय नियम | त्वरण, परिणामी बल के समानुपाती और द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा बल की दिशा में होता है। | F = ma |
| तृतीय नियम | प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया होती है, जो दो भिन्न वस्तुओं पर लगती है। | बल-युग्म परिमाण में बराबर, दिशा विपरीत |
मुख्य बिंदु (Key Points to Remember)
- घर्षण बल किसी वस्तु पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में कार्य करता है, तथा यह संपर्क में आने वाली सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है।
- न्यूटन का प्रथम नियम गति के कारण (परिणामी बल) की आवश्यकता को दर्शाता है; इसी को जड़त्व का नियम कहा जाता है।
- न्यूटन का द्वितीय नियम बल, द्रव्यमान और त्वरण के बीच का मात्रात्मक संबंध देता है — F = ma; संवेग के पदों में यह वस्तु के परिवर्तनशील द्रव्यमान की स्थिति में भी लागू होता है।
- न्यूटन का तृतीय नियम बताता है कि बल सदैव जोड़ों में उत्पन्न होते हैं, परंतु दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करने के कारण वे परस्पर संतुलित नहीं होते।
- परस्पर जुड़ी वस्तुओं के निकाय का विश्लेषण, उन्हें एक ही वस्तु मानकर बाह्य बल और कुल द्रव्यमान के आधार पर सरल किया जा सकता है — a = F / (m₁ + m₂)।
We hope that class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव (How Forces Affect Motion) Notes in Hindi helped you. If you have any queries about class 9 Science Chapter 6 गति पर बलों का प्रभाव (How Forces Affect Motion) Notes in Hindi or about any other Notes of class 9 Science in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

